खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन से नवंबर महीने में देश के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 25 महीने में सबसे अधिक 6.7 फीसदी पर पहुंच गई। पिछले साल नवंबर में इसमें 5 फीसदी का इजाफा हुआ था और इस साल अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन की संशोधित वृद्धि दर 0.5 फीसदी रही।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का उच्च स्तर नवंबर 2023 में 11.9 फीसदी दर्ज किया गया था। त्योहारों से पहले देश में मांग और खपत को बढ़ावा देने के लिए कई उपभोक्ता वस्तुओं पर माल और सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती की गई थी जिसका लाभ उठाने के लिए विनिर्माण ऑर्डरों में तेजी आई। इसके साथ ही राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अक्टूबर 2025 के लिए औद्योगिक उत्पादन वृद्धि के आंकड़े को 0.4 फीसदी से संशोधित कर 0.5 फीसदी कर दिया गया है।
औद्योगिक उत्पादन में 78 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन नवंबर 2025 में 8 फीसदी बढ़ा, जो एक साल पहले इसी महीने में 5.5 फीसदी था। खनन क्षेत्र का उत्पादन भी नवंबर में 5.4 फीसदी बढ़ा जबकि नवंबर 2024 में इस क्षेत्र का उत्पादन 1.9 फीसदी बढ़ा था। लेकिन बिजली क्षेत्र का प्रदर्शन पिछले महीने कमजोर रहा। नवंबर में बिजली उत्पादन में 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में इसमें 4.4 फीसदी की वृद्धि हुई थी।
नवंबर के आईआईपी आंकड़ों में सुधार से संकेत मिलता है कि औद्योगिक गतिविधियों में खास तौर पर विनिर्माण और खनन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तेजी लौट रही है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-नवंबर के दौरान देश का औद्योगिक उत्पादन 3.3 फीसदी की दर से बढ़ा जो एक साल पहले इसी अवधि में 4.1 फीसदी बढ़ा था। विनिर्माण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 23 में 20 उद्योग समूहों के उत्पादन में नवंबर में सालाना आधार पर सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘अमेरिकी शुल्क और जुर्माने का असर कुछ विनिर्माण क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है, जिससे जीएसटी दरों में बदलाव के सकारात्मक प्रभाव का असर कम हो सकता है।’ उन्होंने कहा कि दो महीने के बाद दिसंबर 2025 में बिजली की मांग बढ़ी है, जिससे उस महीने बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और यह आईआईपी वृद्धि के लिए सकारात्मक संकेत है।
नायर ने आगे कहा, ‘हमें उम्मीद है कि दिसंबर 2025 में आईआईपी वृद्धि घटकर 3.5 से 5 फीसदी के दायरे में आ सकती है क्योंकि तुलनात्मक आधार प्रभाव सामान्य होगा।’