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सीमा शुल्क के लिए माफी योजना! बजट में हो सकता है ऐलान

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सोना, डिफॉल्टर, नशीले पदार्थ और तस्करी से जुड़े मामले रहेंगे प्रस्तावित योजना से बाहर

Last Updated- December 30, 2025 | 10:33 PM IST
Customs amnesty scheme

सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में सीमा शुल्क के लिए माफी योजना की घोषणा कर सकती है ताकि पुराने विवादित मामलों का निपटारा किया जा सके। प्रस्तावित योजना का मकसद पंचाट और अदालत सहित अलग-अलग स्तर पर लंबे समय से अटके सीमा शुल्क संबं​धित विवादों को सुलझाना है। घटनाक्रम से अवगत लोगों ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सोना, जानबूझकर की गई चूक, नशीले पदार्थ और तस्करी से जुड़े मामले इससे बाहर रखे जाएंगे।

एक सूत्र ने बताया कि सरकार इसमें ब्याज और जुर्माने में छूट देने पर विचार कर रही है, जिससे पात्र करदाता केवल सीमा शुल्क की मूल रा​शि चुकाकर मामले का निपटारा कर सकेंगे। इस कदम से कारोबारों के लिए फंसी पूंजी मिल सकती है और सरकार के बकाये की वसूली में भी तेजी आएगी। इस बारे में जानकारी के लिए वित्त मंत्रालय को ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।

लंबित अपत्यक्ष कर में सीमा शुल्क बकाये का बड़ा हिस्सा है। दिसंबर 2024 तक वसूली योग्य बकाया से जुड़े कुल 72,592 मामले लंबित थे, जिनमें कुल 24,016.20 करोड़ रुपये फंसे थे। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की अनुदान मांगों (2025-26) पर 18वीं लोक सभा की वित्त पर स्थायी समिति की 9वीं रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। दिसंबर 2024 के अंत तक सीमा शुल्क के कुल बकाया मामले में फंसी रकम 1.36 लाख करोड़ रुपये थी। इनमें कानूनी मामले, अदालत का स्थगन और ऐसे मामले शामिल हैं जिनमें अपील का समय खत्म नहीं हुआ है।

इस महीने की शुरुआत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सीमा शुल्क को सरल बनाना सरकार के सुधारों की कड़ी में अगली बड़ी प्राथमिकता होगी। विशेषज्ञों के अनुसार सीमा शुल्क विवादों के लंबित मामलों को कम करना ऐसे किसी भी सुधार का मुख्य हिस्सा होना चाहिए।

टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज के पार्टनर विवेक जालान ने कहा कि सीमा शुल्क मामलों में ब्याज और जुर्माना आम तौर पर मूल शुल्क मांग से तीन गुना होता है। जालान ने कहा कि कई विवाद मामूली चूक से पैदा होते हैं, जैसे वर्गीकरण के मुद्दे जहां आयातक कारण बताओ नोटिस या ऑर्डर मिलने के बाद पहले ही एचएसएन कोड और शुल्क की दर ठीक कर लेते हैं मगर ब्याज और जुर्माने के भारी बोझ के कारण बीते समय की ‘अनजाने में हुई त्रुटि’ बताते हुए चुनौती देते हैं।

केपीएमजी में पार्टनर और अप्रत्यक्ष कर के नैशनल हेड अभिषेक जैन ने कहा कि सीमा शुल्क के लंबित मामलों के लिए माफी योजना अदालत और पंचाट के बोझ को भी कम कर सकती है। जैन ने कहा, ‘अगर इसे उचित शर्तों के साथ लाया जाए तो ऐसी योजना विवाद सुलझाने और कारोबार करना आसान बनाने के लिए महत्त्वपूर्ण उपाय हो सकती है।’

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First Published - December 30, 2025 | 10:13 PM IST

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