facebookmetapixel
Advertisement
Editorial: UPI फ्रॉड पर RBI का एक्शन डिजिटल सुरक्षा के लिए जरूरीफोड़े के इलाज के लिए जानलेवा इंजेक्शन? FCRA संशोधन बिल को लेकर चिंता क्या वाकई सही हैShare Market: तेल 100 पार, बाजार धड़ाम! क्या आगे और गिरावट?UPI पर लगेगा ब्रेक? ₹10,000 से ऊपर ट्रांजैक्शन में 1 घंटे की देरी का प्रस्तावअमेरिका-ईरान जंग की आग में झुलसा रुपया: कच्चे तेल ने बिगाड़ा बजट, क्या टूटेगा गिरावट का रिकॉर्डTDS-TCS New Rules: 1 अप्रैल से बदल गया टैक्स का गणित, विदेश जाना और निवेश करना हुआ सस्ताग्रीष्मकालीन फसलों की बोआई में उछाल: दलहन और मोटे अनाज का बढ़ा रकबा, धान की खेती पिछड़ीCAFE-III Norms 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की तैयारी में सरकार, भारी उद्योग मंत्रालय ने दिए सख्त संकेतसैलरीड क्लास की मौज! ₹15.85 लाख CTC पर भी ‘जीरो’ टैक्स, अपनाएं ये ट्रिक और बचाए अपना पूरा पैसाTRACES में बड़ा बदलाव: TDS, TCS और प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए क्या बदलेगा? आसान भाषा में समझें

GDP: पारिवारिक बचत गिरी, उधारी बढ़ी

Advertisement

परिवारों की सालाना वित्तीय देनदारियां बढ़कर वित्त वर्ष 23 में जीडीपी की 5.8 प्रतिशत पर पहुंच गई जबकि यह वित्त वर्ष 22 में 3.8 प्रतिशत थी।

Last Updated- September 20, 2023 | 11:09 PM IST
GDP Growth

पारिवारिक बचत दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गई है। आरबीआई के आकंड़ों के मुताबिक पारिवारिक बचत वित्त वर्ष 23 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.1 फीसदी पर पहुंच गई जबकि यह वित्त वर्ष 22 में 7.2 प्रतिशत थी।

उधर परिवारों की सालाना वित्तीय देनदारियां बढ़कर वित्त वर्ष 23 में जीडीपी की 5.8 प्रतिशत पर पहुंच गई जबकि यह वित्त वर्ष 22 में 3.8 प्रतिशत थी।

वित्त वर्ष 21 में पारिवारिक शुद्ध बचत 22.8 लाख करोड़ रुपये थी। यह वित्त वर्ष 22 में गिरकर 16.96 लाख करोड़ हो गई थी और फिर वित्त वर्ष 23 में गिरकर 13.76 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई।

इसके वितरीत पारिवारिक उधारी में वृद्धि हुई। वित्तीय देनदारी के रूप में मापे जाने वाले परिवार का कर्ज उल्लेखनीय रूप से उच्च स्तर पर बना हुआ है।

यह वित्त वर्ष 23 में जीडीपी के 37.6 प्रतिशत पर पहुंच गया था जो वित्त वर्ष 22 में 36.9 प्रतिशत था। इससे यह संकेत मिलता है कि परिवार अपनी उपभोक्ता जरूरतों को पूरा करने के लिए उधारी को बढ़ा रहे हैं।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक स्वतंत्रता के बाद दूसरी बार बीते वित्त वर्ष में वित्तीय देनदारियों का प्रतिशत बढ़ा था और इससे पहले 2006-07 में 6.7 प्रतिशत था। बचत कम होने और उधारी बढ़ने का प्रमुख कारण बढ़ती महंगाई की तुलना में पारिवारिक आमदनी का स्थिर या कम होना है।

Advertisement
First Published - September 20, 2023 | 11:09 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement