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Yearender 2025: टैरिफ और वैश्विक दबाव के बीच भारत ने दिखाई ताकत

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भारतीय अर्थव्यवस्था ने अमेरिकी टैरिफ के बावजूद मजबूती दिखाई है, लेकिन राजस्व, वेतन वृद्धि और निर्यात चुनौतियों के चलते आगे अस्थिरता बनी रह सकती है।

Last Updated- December 27, 2025 | 5:48 PM IST
Indian economy
Representative Image

भारतीय अर्थव्यवस्था ने इस साल विदेशी चुनौतियों, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का सामना करते हुए भी मजबूती दिखाई है। फिर भी, आने वाले समय में स्थिति थोड़ी अस्थिर हो सकती है।

2025 के पहले नौ महीनों में अर्थव्यवस्था ने 7.4 से 8.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जो कई विशेषज्ञों के लिए आश्चर्यजनक है। जुलाई-सितंबर तिमाही में अमेरिकी टैरिफ का असर पूरी तरह सामने आने के बावजूद यह बढ़त कायम रही।

नवंबर में वस्तु निर्यात में 38 प्रतिशत की वृद्धि ने भी यह दिखाया कि भारत ने अपने निर्यात को नए बाजारों में फैलाकर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को काफी हद तक कम किया है।

भारत के पहले चीफ स्टैटिस्टिशियन प्रणब सेन का कहना है, “टैरिफ के कारण फिलहाल हमारी अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है।”

लेकिन आंकड़ों की बारीकियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जबकि वास्तविक (रियल) GDP वृद्धि अच्छी रही, नाममात्र (नॉमिनल) GDP वृद्धि निराशाजनक रही। अप्रैल-सितंबर 2025 में नॉमिनल GDP वृद्धि केवल 8.8 प्रतिशत रही, जबकि बजट में पूरे साल के लिए 10.1 प्रतिशत का अनुमान था।

नॉमिनल GDP अर्थव्यवस्था के आकार, कर संग्रह और वित्तीय घाटे जैसी महत्वपूर्ण चीजों को तय करता है। इस साल जुलाई तक केंद्र की कर आय 12.7 ट्रिलियन रुपये रही, जो पिछले साल के समान अवधि से 2.3 प्रतिशत कम है। GST दरों में कटौती और आयकर छूट की बढ़ोतरी भी राजस्व पर असर डाल सकती है।

विदेशी लेनदेन की बात करें तो चालू खाता घाटा जुलाई-सितंबर 2025 में 1.3 प्रतिशत GDP पर रहा। लेकिन पूंजी का बहिर्वाह रुपये पर दबाव बढ़ा रहा है, और 26 दिसंबर को डॉलर के मुकाबले रुपया 89.85 पर बंद हुआ।

हालांकि अब तक निर्यात पर टैरिफ का असर कम दिखा, सेन का कहना है कि यह केवल पहले से बुक किए गए ऑर्डर और बाजार विविधीकरण की वजह से है। सेन ने कहा “ट्रंप टैरिफ का असर अब दिखाई देगा।”

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर राज्य के निर्यात आधारित उद्योगों में बढ़ती संकट की जानकारी दी है। उन्होंने तत्काल द्विपक्षीय समाधान की मांग की है। तिरुपुर के निर्यातकों के करीब 15,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर रद्द हो गए हैं और उत्पादन में 30 प्रतिशत तक कटौती हुई है।

वेतन वृद्धि भी धीमी रही है। 2023-24 में आकस्मिक श्रमिकों का नाममात्र वेतन केवल 3.7 प्रतिशत बढ़ा। सेन का मानना है कि कम वेतन वृद्धि से उपभोक्ता खर्च प्रभावित हो सकता है और आर्थिक विस्तार धीमा पड़ सकता है।

हालांकि मुद्रास्फीति में कमी आई है। नवंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 3 प्रतिशत से नीचे रही और थोक मूल्यों में महंगाई घटकर नकारात्मक रही।

अर्थशास्त्री अनिल एसूद्ध का कहना है कि फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था कम मांग और धीमी वृद्धि की चुनौती से गुजर रही है।

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First Published - December 27, 2025 | 5:47 PM IST

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