facebookmetapixel
Advertisement
शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की धमाकेदार वापसी, 4 महीने की बिकवाली के बाद जुलाई में लगाए ₹20,200 करोड़दिल्ली में छाए रहेंगे बादल, 23 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; जानें आपके इलाके का कैसा रहेगा हाल8th Pay Commission की तैयारी तेज, कर्मचारियों से सुझाव लेने कई राज्यों का करेगा दौरा; जानें पूरा प्लान5 महीने बाद खत्म होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? ट्रंप बोले: शांति समझौते के पैरामीटर्स तय, हमले पर लगाई रोकपश्चिम एशिया में तनाव चरम पर, ईरान बोला: अमेरिका ने और हमला किया तो खाड़ी देशों के तेल ठिकाने होंगे राखHDFC Bank ने FCNR डिपॉजिट पर बढ़ाया ब्याज, RBI स्वैप स्कीम के बीच NRI निवेशकों को मिलेगा बड़ा फायदाDividend Stocks: एक शेयर पर ₹270 का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की कंपनी का तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सजुलाई में UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड, 23.66 बिलियन ट्रांजैक्शन के साथ डिजिटल पेमेंट ने भरी ऐतिहासिक उड़ानजुलाई में GST कलेक्शन में जोरदार उछाल, आयात-घरेलू मांग के दम पर ₹2.11 लाख करोड़ के पार पहुंचा आंकड़ाDividend Stocks: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! अगले हफ्ते 98 कंपनियां बांटेगी डिविडेंड, ₹270 तक पाने का मौका

मौद्रिक नीति प्रणाली में बड़े बदलाव से बॉन्ड बाजार प्रभावित होगा : राजन

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 7:02 AM IST

भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे महामारी के झटके से बाहर निकल रही है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चेताया है कि देश के मौद्रिक नीति के ढांचे में किसी तरह के बड़े बदलावों से बॉन्ड बाजार प्रभावित हो सकता है। बैंकों को निजी क्षेत्र को देने के बारे में राजन ने कहा कि उन्हें औद्योगिक घरानों को बेचना भारी गलती होगी
राजन ने रविवार को कहा कि मौजूदा व्यवस्था ने मुद्रास्फीति को काबू में रखने और वृद्धि को प्रोत्साहन देने में मदद की है। राजन ने कहा कि सरकार का 2024-25 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5,000 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य आकांक्षी अधिक है। उन्होंने कहा कि यहां तक कि महामारी से पहले भी इस लक्ष्य को लेकर सावधानी से गणना नहीं की गई।
पूर्व गवर्नर ने कहा, ‘मेरा मानना है कि मौद्रिक नीति प्रणाली ने मुद्रास्फीति को नीचे लाने में मदद की है। इसमें रिजर्व बैंक के लिए अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की गुंजाइश भी है। यह सोचना भी मुश्किल है कि यदि यह ढांचा नहीं होता, तो हम कैसे इतना ऊंचा राजकोषीय घाटा झेल पाते।’
उनसे पूछा गया था कि क्या वह मौद्रिक नीति के तहत मुद्रास्फीति के 2 से 6 प्रतिशत के लक्ष्य की समीक्षा के पक्ष में हैं। रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) पर रखने का लक्ष्य दिया गया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर नीतिगत दरें तय करती है।
दो बैंकों के निजीकरण के बारे में पूछे जाने पर राजन ने कहा कि इसका अधिक ब्योरा नहीं दिया गया है कि यह कैसे किया जाएगा। राजन ने कहा, ‘बैंकों को औद्योगिक घरानों को बेचना भारी गलती होगी।’ उन्होंने कहा कि किसी अच्छे आकार के बैंक को विदेशी बैंक को बेचना भी राजनीतिक दृष्टि से व्यावहारिक नहीं होगा।’

Advertisement
First Published - March 14, 2021 | 11:19 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement