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अभी नहीं थमा टाटा ट्रस्ट में घमासान! मेहली मिस्त्री के कार्यकाल पर तीन ट्रस्टियों की चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस

टाटा सन्स में 66% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट के भीतर एक बार फिर मतभेद गहराए; मेहली मिस्त्री के कार्यकाल बढ़ाने पर राय बंटी, सरकार तक पहुंचा मामला।

Last Updated- October 27, 2025 | 9:48 AM IST
Tata Trusts Dispute

Tata Trust Dispute: टाटा सन्स में करीब 66% हिस्सेदारी रखने वाला टाटा ट्रस्ट इन दिनों फिर से आपसी झगड़े में फंसा हुआ है। इस बार झगड़ा ट्रस्टी मेहली मिस्त्री के कार्यकाल को दोबारा बढ़ाने को लेकर है। अगर उनका समय पर कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया, तो टाटा ट्रस्ट के अंदर नया विवाद शुरू हो सकता है।

क्या है मेहली मिस्त्री के कार्यकाल का पूरा मामला?

मेहली मिस्त्री दो बड़े ट्रस्टों सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं। उनका पद 28 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। खबरों के मुताबिक, अभी तक तीन ट्रस्टियों ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, लेकिन तीन और ट्रस्टियों की मंजूरी अभी बाकी है। अगर मेहली मिस्त्री को सभी ट्रस्टियों की मंजूरी नहीं मिली, तो यह पहली बार होगा जब किसी ट्रस्टी का कार्यकाल समय पर नहीं बढ़ाया जाएगा। यह मामला टाटा ट्रस्ट के इतिहास में बड़ा और अनोखा कदम माना जाएगा।

कौन हैं मेहली मिस्त्री और क्या है उनका रिश्ता टाटा परिवार से?

मेहली मिस्त्री एक जाने-माने बिजनेसमैन हैं और रतन टाटा के बहुत करीबी माने जाते हैं। वे शापूरजी पालोनजी परिवार से आते हैं। यही वह परिवार है, जिससे सायरस मिस्त्री भी जुड़े थे। सायरस मिस्त्री को साल 2016 में टाटा सन्स के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था। इसके बाद टाटा ग्रुप और शापूरजी पालोनजी ग्रुप के बीच लंबा विवाद चला, जो काफी समय तक चर्चा में रहा।

यह भी पढ़ें: Tata Trust: कार्यकाल खत्म होने से पहले वेणु श्रीनिवासन बने आजीवन ट्रस्टी, अब मेहली मिस्त्री पर टिकी निगाहें

किसने मेहली मिस्त्री का समर्थन किया और किसने नहीं?

सूत्रों के मुताबिक, दारियस खंबाटा, प्रमीत झावेरी और जहांगीर एच.सी. जहांगीर ने मेहली मिस्त्री का कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया है। वहीं दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा, उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। ये तीनों लोग मिस्त्री के विरोधी गुट में माने जाते हैं। नोएल टाटा, रतन टाटा के सौतेले भाई हैं और टाटा समूह की कई कंपनियों में अहम पदों पर हैं। रतन टाटा के निधन के बाद उन्हें टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया गया था।

मिस्त्री और नोएल टाटा के बीच मतभेद क्यों हैं?

कुछ दिन पहले वेणु श्रीनिवासन का कार्यकाल बढ़ाने के लिए सभी ट्रस्टियों ने मंजूरी दे दी थी, लेकिन मेहली मिस्त्री ने इस पर शर्त रखी थी। उन्होंने कहा कि अगर एक ट्रस्टी का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है, तो बाकी सभी ट्रस्टियों का भी एक साथ बढ़ाया जाना चाहिए। मिस्त्री का कहना है कि जब किसी ट्रस्टी का कार्यकाल बढ़ा दिया जाता है, तो वह “लाइफ ट्रस्टी” यानी जीवनभर के लिए ट्रस्टी बन जाता है और उसे बार-बार मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन नोएल टाटा और उनके साथी इससे असहमत हैं। उनका मानना है कि हर बार कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा मंजूरी देना जरूरी होता है। इसी बात पर टाटा ट्रस्ट के भीतर विवाद गहराता जा रहा है।

क्या यह विवाद टाटा सन्स पर असर डाल सकता है?

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने टाटा सन्स को 30 सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) होने का निर्देश दिया है। टाटा सन्स ने पिछले साल लिस्टिंग से छूट मांगी थी, लेकिन अब तक फैसला नहीं हुआ है। इसी बीच, टाटा ट्रस्ट ने टाटा सन्स को सलाह दी है कि आरबीआई से बातचीत कर लिस्टिंग टाली जाए, जबकि शापूरजी पालोनजी समूह, जो 18% हिस्सेदारी रखता है, लिस्टिंग कराने पर जोर दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हाल ही में टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। मंत्रियों ने समूह में स्थिरता बनाए रखने की सलाह दी है क्योंकि टाटा समूह का भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है।

टाटा ट्रस्ट में चल रहे झगड़े को शांत करने के लिए हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बीच में आना पड़ा। दोनों मंत्रियों ने टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों से मुलाकात की और उनसे कहा कि समूह में शांति और स्थिरता बनाए रखें, क्योंकि टाटा ग्रुप देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है। इसी समय रिज़र्व बैंक (RBI) ने टाटा सन्स को आदेश दिया है कि वह 30 सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट हो जाए, यानी उसके शेयर आम लोगों के लिए खरीदे-बेचे जा सकें। टाटा सन्स ने पिछले साल लिस्टिंग से छूट मांगी थी, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।

इस बीच, टाटा ट्रस्ट ने टाटा सन्स को सलाह दी है कि आरबीआई से बात कर लिस्टिंग को टालने की कोशिश करें। वहीं दूसरी तरफ, शापूरजी पालोनजी समूह, जिसकी 18% हिस्सेदारी टाटा सन्स में है, लिस्टिंग करवाने की मांग पर अड़ा हुआ है।

अब आगे क्या हो सकता है?

अगर मेहली मिस्त्री का कार्यकाल समय पर नहीं बढ़ाया गया, तो इससे टाटा ट्रस्ट के भीतर चल रहा तनाव और बढ़ सकता है। यह विवाद न सिर्फ ट्रस्ट की एकता को प्रभावित करेगा, बल्कि टाटा सन्स की लिस्टिंग और समूह की भविष्य की योजनाओं पर भी असर डाल सकता है।

First Published - October 27, 2025 | 9:44 AM IST

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