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ताइवानी कंपनी गोगोरो, बेलराइज के साथ लगाएंगी फैक्ट्री

महाराष्ट्र में बैटरी की अदला-बदली और चार्जिंग स्टेशन पर मिलकर करेगी 2.5 अरब डॉलर निवे

Last Updated- January 17, 2023 | 11:32 PM IST
Gogoro to make India a manufacturing hub for electric two-wheelers
BS

ताइवान की कंपनी गोगोरो ने बेलराइज इंडस्ट्रीज के साथ संयुक्त उद्यम लगाने की घोषणा की है। इस उद्यम में दोनों कंपनियों की आधी-आधी हिस्सेदारी होगी। महाराष्ट्र में बैटरी की अदला-बदली (बैटरी स्वैपिंग) एवं ऊर्जा ढांचा विकसित करने के लिए इस उद्यम के जरिये अगले 8 वर्षों में 2.5 अरब डॉलर निवेश किए जाएंगे। गोगोरो मोबिलिटी टेक्नोलॉजी एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर खंड में काम करती है।

बैटरी स्वैपिंग एवं ऊर्जा ढांचा विकसित करने के लिए दावोस में एक गैर-बाध्यकारी समझौता हुआ है। महाराष्ट्र सरकार राज्य भर में बैटरी स्वैपिंग एवं स्मार्ट बैटरी स्टेशन की स्थापना करना चाहती है। गोगोरो के संस्थापक होरेस ल्यूक ने दावोस से एक साक्षात्कार में कहा, ‘शुरू में पुणे और मुंबई सहित महाराष्ट्र के दस सबसे घनी आबादी वाले शहरों में स्मार्ट बैटरी स्टेशन बनाए जाएंगे।

भारत एक तेजी से उभरता बाजार है और हमें मांग पूरी करने के लिए ऐसे कदम उठाने होंगे।‘ ल्यूक ने कहा कि 1.2 अरब बैटरियों के साथ बैटरी-स्वैपिंग तकनीक में उनकी कंपनी एक खास पहचान बना चुकी है। इनमें आधी बैटरियों की स्वैपिंग कोरिया, जापान, ताइवान, इंडोनेशिया सहित अन्य देशों में हो रही है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में इस परियोजना के लिए बेलराइज इंडस्ट्रीज का चयन सोच-समझ कर किया गया है। ल्यूक ने कहा, ‘दोपहिया वाहनों के लिए ढांचा तैयार करने एवं सस्पेंशन पार्ट तैयार करने के बाजार में बेलराइज की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है।‘ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पूरी रकम केवल इस संयुक्त उद्यम की दोनों कंपनियों की तरफ से नहीं आएगी। ल्यूक ने कहा कि क्लाइमेट एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर फंडों से भी निवेश लाने के प्रयास किए जाएंगे।

दोनों कंपनियों का यह संयुक्त उद्यम ऐसे समय में आ रहा है जब सरकार बैटरी स्वैपिंग नीति का एक मसौदा तैयार कर रही है। इस नीति के प्रभावी होने से उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए थोड़ा कम भुगतान करना होगा। खरीदार को बैटरी का पूरी कीमत नहीं चुकानी होगी और इसके बदले वे बैटरी स्वैपिंग कर सकेंगे। एक इलेक्ट्रिक वाहन की कुल कीमत में बैटरी की हिस्सेदारी 40-50 प्रतिशत तक होती है।

गोगोरो नैसडैक में सूचीबद्ध कंपनी है। इस कंपनी में शुरू में टेमासेक, सुमितोमो कॉर्पोरेशन, पैनासोनिक सहित 24 से अधिक कंपनियों ने निवेश किया था। पिछले दो वर्षों से भी कम समय में गोगोरो ने यह चौथी साझेदारी की है। 2021 में कंपनी ने भारत की सबसे बड़ी दोपहिया कंपनी हीरो मोटोकॉर्प के साथ एक संयुक्त उद्यम लगाने की घोषणा की थी। इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियों ने पूरे देश में बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने की बात कही थी। दोनों कंपनियों ने दुनिया के अन्य देशों में भी बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना तैयार की थी।

2022 में गोगोरो ने कहा था कि वह ऐपल के लिए आईफोन बनाने वाली फॉक्सकॉन के साथ मिलकर भारत में एक बैटरी निर्माण संयंत्र लगाने की संभावनाएं तलाश रही है। कंपनी ने यह भी कहा था कि बैटरी स्वैपिंग ढांचा तैयार करने के लिए वह हीरो मोटोकॉर्प के अलावा दूसरी वाहन निर्माता कंपनियों के साथ भी सहयोग करना चाहती है। नवंबर 2022 में गोगोरो ने जिप इलेक्ट्रिक के साथ साझेदारी करने की घोषणा भी की थी। गोगोरो ने कहा था कि वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में जिप इलेक्ट्रिक के लिए बैटरी स्वैपिंग स्टेशन लगाएगी।

नए साल में कुछ दिन पहले ही कंपनी ने इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने के लिए वाहनों के कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनी मेटलमैन ऑटो के साथ अनुबंध आधारित समझौता करने की घोषणा की है। ये इलेक्ट्रिक स्कूटर 2023 के मध्य तक सड़कों पर दिख जाएंगे। इन स्कूटरों का उत्पादन मेटलमैन ऑटो के वालुज संयंत्र में होगा।

विभिन्न कंपनियों के साथ साझेदारी पर ल्यूक ने कहा कि बैटरी स्वैपिंग तभी ठीक ढंग से काम करेगी जब यह पूरे वैल्यू चेन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी। उन्होंने कहा, बाजार तैयार करने में हमेशा यह बात उठती है कि पहले बुनियादी ढांचा तैयार किया जाए या पहले वाहनों को सड़कों पर उतरने देना चाहिए। महाराष्ट्र सरकार के साथ समझौते के तहत हम सभी तरह के समाधान उपलब्ध कराएंगे। सभी कंपनियां ऊर्जा भंडारण तंत्र तैयार करने में एक दूसरे का साथ देंगी।

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ल्यूक ने कहा कि उदाहरण के लिए वह पहले कुछ स्टेशनों पर जिप के साथ आजमाइश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि भारत में बैटरी स्वैपिंग कैसे काम करती है और दूसरे देशों से यह कितनी अलग होगी। ल्यूक ने कहा कि दूसरे चरण में और अधिक चार्जिंग स्टेशन खोले जाएंगे और जिप जैसी कंपनियां (बी2बी कंपनियां) इनका इस्तेमाल करेंगी और सारी बातें समझने के बाद वे बी2सी श्रेणी (हीरो मोटोकॉर्प जैसी कंपनियां) में कदम रखेंगी।

ल्यूक ने कहा कि वे एक खुले तंत्र का निर्माण कर रहे हैं जिनका इस्तेमाल कई वाहन निर्माता कंपनियां कर सकेंगी। यह किसी खास कंपनी के लिए तैयार की गई व्यवस्था नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए ताइवान में यामहा से लेकर सुजूकी तक 10 वाहन निर्माता कंपनियां गोगोरो के तंत्र का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि उन्होंने बाजार में अपना इलेक्ट्रिक स्कूटर उतारने के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की। ल्यूक ने इतना जरूर कहा कि उनके एक दर्जन मॉडल तैयार हैं।

First Published - January 17, 2023 | 11:11 PM IST

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