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मुंबई: 13 हजार पुरानी इमारतों के ऑडिट से जोश में रियल एस्टेट

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मुंबई में रियल एस्सेट पुनर्विकास बाजार का 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है

Last Updated- March 02, 2025 | 10:14 PM IST
Brihanmumbai Municipal Corporation
प्रतीकात्मक तस्वीर

अगले दो वर्षों के दौरान मुंबई में रियल एस्टेट क्षेत्र में मांग में लगातार सुधार दिखता रहेगा। यह कहना है कि देश की आर्थिक राजधानी के रियल एस्टेट बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का। रियल एस्टेट क्षेत्र के इन दिग्गजों के अनुसार मुंबई शहर में लगभग 13,000 पुरानी इमारतों की जांच (ऑडिट) होने वाली है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी मरम्मत या पुनर्विकास की जरूरत है या नहीं।

राज्य सरकार नियंत्रित महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) ने इमारतों की जांच के लिए संरचनात्मक सलाहकार नियुक्त किए हैं। ऐसी इमारतों को स्थानीय सेस इमारत कहा जाता है। सेस इमारत ऐसी इमारतें होती हैं जिन पर कर या मरम्मत राशि का भुगतान करना पड़ता है। म्हाडा ने अपने इंजीनियरों को उन इमारतों के लिए नोटिस जारी करने के लिए कहा है जो मुंबई भवन मरम्मत एवं पुनर्निर्माण बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। म्हाडा ने अपने नोटिस में कहा, ‘ऑडिट से मुंबई की पुरानी एवं जर्जर इमारतों की देख-रेख की प्रक्रिया मजबूत हो जाएगी और समय रहते इनका विकास हो जाएगा। इसके साथ ही इनमें रहने वाले लोगों का रहन-सहन भी सुधर जाएगा।‘ सेस इमारतों का निर्माण मुंबई में सितंबर 1969 से पहले हुआ था। म्हाडा इन इमारतों के लिए मरम्मत उपकर वसूलता है।

म्हाडा ने 171 ऐसी इमारतों का ऑडिट किया है जिनमें 32 की रिपोर्ट इसे मिल चुकी है। वैस्कॉन इंजीनियर्स के प्रबंध निदेशक वासुदेवन मूर्ति ने कहा, ‘ये पुरानी इमारतों में रियल एस्सेट कारोबारियों के लिए काफी संभावनाएं मौजूद हैं। इन अवसरों का भरपूर लाभ उठाने के लिए डेवलपरों को ऑडिट रिपोर्ट पर नजर रखनी चाहिए, संबंधित पक्षों के साथ बात करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परियोजनाएं नियम-कानून एवं समुदाय की जरूरतों के अनुरूप रहें।‘

मुंबई में रियल एस्सेट पुनर्विकास बाजार का 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है और वृहद मुंबई नगर निगम के अनुसार अगले 30 वर्षों के दौरान इन पुरानी इमारतों का पुनर्विकास पूरा हो सकता है।

जमीन के बदले घर

धारावी और मध्य मुंबई में अंग्रेजों के जमाने के बीडीडी चॉल नए सिरे से बनाए जा रहे हैं और शहर के दूसरे हिस्सों में भी ऐसी झुग्गियों एवं चॉल के पुनर्विकास से जुड़ी संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। धारावी और बीडीडी में खाली बचने वाली जमीन पर बहु-मंजिला इमारतें बनाई जाएंगी, जो फ्री सेल के लिए उपलब्ध होगा। फ्री सेल के तहत पुनर्विकास की गई जायदाद का एक हिस्सा बिल्डरों को बाजार में मौजूदा दरों पर बेचने की इजाजत दी जाती है। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी कहते हैं, ‘राज्य सरकार ने हाल में इस (म्हाडा) योजना की घोषणा की है। हालांकि, इन जायदाद को बाजार में आते-आते कुछ वर्ष तो लग ही जाएंगे।’

मुंबई में खाली जमीन की बहुत किल्लत है इसलिए विभिन्न पुनर्विकास परियोजनाओं से रियल एस्टेट खंड में मांग पर कोई खास असर नहीं होगा। सैविल्स इंडिया में प्रबंध निदेशक (आवासीय कारोबार) श्वेता जैन कहती हैं, ‘मुंबई में आवासीय जायदाद की मांग काफी अधिक है, खासकर कुछ क्षेत्रों में इसमें काफी तेजी दिख रही है। इसे देखते हुए मकानों की अत्यधिक आपूर्त जैसी नौबत शायद ही आएगी। दक्षिण मुंबई और बांद्रा जैसे महंगे इलाकों में मांग काफी मजबूत है जिससे नए मकान आते ही बिकने लगेंगे।‘

भारत में मुंबई सबसे बड़ा जायदाद बाजार है जहां वर्ष 2024 में 96,187 मकानों की बिक्री हुई थी। नाइट फ्रैंक के अनुसार इसमें सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। स्क्वायर यार्ड्स में सह-संस्थापक एवं मुख्य कारोबार अधिकारी (कैपिटल मार्केट ऐंड सर्विसेस) आनंद मूर्ति ने कहा कि तैयार मकानों के खाली रहने की दर 5 प्रतिशत से भी कम है इसलिए आवासीय खंड में अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति नहीं आएगी।

कीमतों पर असर!

रियल एस्टेट कारोबारियों को कीमतों में बहुत गिरावट का अंदेशा नहीं है। कोलियर्स इंडिया में प्रबंध निदेशक (सलाहकार सेवाएं) स्वप्निल अनिल कहते हैं,‘बाजार में भारी संख्या में तैयार मकान आने से मांग-आपूर्ति का समीकरण बिगड़ा तो तो कीमतें गिर सकती हैं, खासकर सस्ते आवास और मझोले आवास खंड में यह असर अधिक दिख सकता है। मगर दक्षिण और मध्य मुंबई में जमीन की सीमित उपलब्धता और इन इलाकों में रियल एस्टेट की अत्यधिक मांग के कारण कीमतें बहुत गिरने से रहीं।’

वर्ष 2024 में मुंबई में आसावीय मकानों की कीमतें औसतन सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 8,277 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गईं। मांग-आपूर्ति के समीकरण को देखते हुए डेवलपर कीमतों को लेकर चौकन्ने रह सकते हैं। सूरज एस्टेट डेवलपर्स में पूर्ण-कालिक सदस्य राहुल थॉमस कहते हैं, ‘अगर मांग की तुलना में आपूर्ति काफी अधिक हो गई तो फिर कीमतें गिर सकती हैं। मगर मुंबई के सूरत-ए-हाल, पिछले इतिहास और महंगी जायदादों की लगातार मांग को देखते हुए कीमतों में मामूली अंतर ही आएगा।‘

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First Published - March 2, 2025 | 10:14 PM IST

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