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80 ही क्यों, 180 साल क्यों न जीएं, अधिकांश समस्याएं हमारे कम मानव जीवनकाल के कारण: दीपिंदर गोयल

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दीपिंदर गोयल ने कंटिन्यू रिसर्च के माध्यम से मानव दीर्घायु और स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया, ताकि लोग 180 साल तक जीवित रहकर दीर्घकालिक जिम्मेदारी और सोच विकसित कर सकें

Last Updated- October 24, 2025 | 10:40 PM IST
Deepinder Goyal
जोमैटो और ​ब्लिंकइट की मूल कंपनी इटर्नल के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपिंदर गोयल

जोमैटो और ​ब्लिंकइट की मूल कंपनी इटर्नल के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपिंदर गोयल कंटिन्यू रिसर्च में पर्सनल फंडों से 2.5 करोड़ डॉलर का निवेश कर रहे हैं। यह एक दीर्घायु अनुसंधान उद्यम है, जिसे उन्होंने दो साल पहले शुरू किया था। इसका उद्देश्य मुक्त स्रोत जैविक अनुसंधान के माध्यम से स्वस्थ मानव क्रिया का विस्तार करना है। गोयल ने मानव जीवनकाल को कम बताते हुए इसे सभ्यता का मूल दोष करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि 80 साल का जीवन लोगों को लापरवाह बनाता है, क्योंकि उन्हें अपने निर्णयों के दीर्घकालिक परिणामों का सामना नहीं करना पड़ता। कंटिन्यू एक वाणिज्यिक कंपनी के बजाय एक अनुसंधान टीम और सीड फंड के रूप में काम करेगा।

गोयल ने एक्स पर कहा, ‘एक दशक से अधिक समय से मेरा मानना है कि दुनिया की अधिकांश समस्याएं हमारे कम मानव जीवनकाल के कारण उपजी हैं। कंटिन्यू रिसर्च का लक्ष्य स्वस्थ मानव क्रिया को इतना लंबा करना है कि मनुष्य अल्पकालिक निर्णय लेना बंद कर दें। यह अनुसंधान कई दशक की प्रक्रिया होगी। यहां हमारा लक्ष्य मानव विकास यात्रा में एक छोटा सा उत्प्रेरक बनना है, जो हमें डार्विन युग के बाद के युग में ले जाए।’

गोयल ने कंटिन्यू की वेबसाइट पर एक पोस्ट में मानव दीर्घायु और जैविक नवाचार के लिए अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे-जैसे मुनष्य का विकास हुआ, उससे वह दीर्घायु के लिए नहीं, बल्कि प्रजनन के लिए अनुकूलित हुआ। आधुनिक चिकित्सा को जैविक बाधाओं से पार पाने के अवसर के रूप में पेश करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक रूप से कभी इस बात की परवाह नहीं की गई कि हम 180 वर्ष तक जीवित रहें। केवल यह सोचा गया कि हम 30 वर्ष तक जिंदा रहें। तेजी से बदलते युग के बारे में गोयल ने कहा कि आज अंतरिक्ष-युग की चुनौतियों वाले युग में पाषाण-युग का शरीर ढो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, परमाणु हथियार और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए दीर्घकालिक ज्ञान की आवश्यकता है जिसे विकसित करने के लिए हम पर्याप्त समय तक जीवित नहीं रहते हैं।

उन्होंने लोगों से एक ऐसी दुनिया की कल्पना करने का आग्रह किया जहां लोग 80 साल के बजाय 180 साल तक जीवित रहें। यानी संपूर्ण स्वास्थ्य के साथ 100 साल अ​धिक आयु तक जीवन का आनंद लें, जिसमें उसका दिमाग और शरीर दोनों पूरी तरह कार्यशील रहें। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह की दीर्घायु वैश्विक निर्णय लेने में नया आयाम पेश कर सकती है। साथ ही इससे पीढ़ियों के बीच जिम्मेदारी का भाव आएगा। 

गोयल लिखते हैं, ‘उनके विचार मृत्यु को हराने के बारे में बिल्कुल नहीं हैं। यह मेफ्लाई यानी अल्पकालिक सोच रखने वाली प्रवृ​त्ति से छुटकारा पाने के बारे में है, क्योंकि यही आदत तो हमें लापरवाह बनाती है।’

दीपिंदर गोयल दीर्घायु-केंद्रित उद्यमों के बढ़ते क्षेत्र में कदम रख चुके हैं, जिसमें एमेजॉन के संस्थापक जेफ बेजोस के समर्थन वाली ऐल्टोस लैब्स तथा एंड्रीसन होरोविट्ज की बायोएज लैब्स भी शामिल है। इस क्षेत्र में एक और उभरता हुआ उद्यम रुबेडो लाइफ साइंसेज है, जिसे खोसला वेंचर्स का समर्थन हासिल है। भारत में दीर्घायु पर काम करने वाला उद्यम अभी शुरुआती दौर में है, जिसमें अल्ट्राह्यूमन और बायोपीक जैसी वेलनेस स्टार्टअप काम कर रही हैं और जिनका ध्यान मौलिक उम्र बढ़ने के अनुसंधान के बजाय बेहतर स्वास्थ जीवन पर है।

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First Published - October 24, 2025 | 10:32 PM IST

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