facebookmetapixel
Advertisement
जून में सुस्त IPO के बावजूद ऋण प्रतिभूतियों ने रचा इतिहास, जुटाई ₹3.15 लाख करोड़ की रिकॉर्ड रकमपेपर लीक के खिलाफ कानून में संशोधन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी, सोमवार को संसद में पेश होगा विधेयकभारी बारिश और बाढ़ का कहर: गुजरात में सेना ने संभाला मोर्चा, असम-महाराष्ट्र में भी हालात गंभीरचार साल के निचले स्तर पर पहुंची निजी कारोबारी गतिविधियां, महंगाई और पश्चिम एशिया तनाव से सुस्त पड़ी रफ्तारफ्रंट-रनिंग मामले में ऐक्सिस MF के पूर्व डीलर वीरेश जोशी पर 7 साल का प्रतिबंध, 3 करोड़ का जुर्माना भीरसायन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 3,030 करोड़ रुपये की ‘भव्य-रसायन’ योजना मंजूरCBDT को वित्त मंत्री की सख्त हिदायत, कहा: अभी भी 5.4 लाख अपीलें लंबित, मुकदमेबाजी रणनीति की करें समीक्षाUS Tariff on India: अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाया 10% टैरिफ, धारा 301 के तहत हुई कार्रवाईUpcoming IPO: देश का सबसे बड़ा हेल्थकेयर IPO ला रही मणिपाल हेल्थ, 29 जुलाई से खुलेगा इश्यूHindustan Zinc Q1 Results: दोगुने से ज्यादा बढ़ा मुनाफा, 5,469 करोड़ रुपये पर पहुंचा आंकड़ा

NCLAT का दिवालियापन धोखाधड़ी पर आदेश IBC की व्याख्या को उलझा सकता है

Advertisement

8 सितम्बर के आदेश में NCLAT ने कहा कि दिवालियापन प्रक्रिया के दौरान अगर “धोखाधड़ी” होती है तो वह “सब कुछ निरस्त कर देगी, जिसमें समाधान योजना को मंजूरी देने वाला आदेश भी शामिल

Last Updated- September 30, 2025 | 7:13 AM IST
Order
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के हालिया आदेश ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस अधिकार को बरकरार रखा है जिसके तहत वह दिवालियापन प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी सामने आने पर किसी भी चरण में समाधान योजना (resolution plan) को वापस ले सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की व्याख्या में अनिश्चितता पैदा कर सकता है, खासकर जब सुप्रीम कोर्ट (SC) ने दिवालियापन कार्यवाहियों में लेनदारों की व्यावसायिक बुद्धिमत्ता (commercial wisdom) को सर्वोपरि माना है।

गांधी लॉ एसोसिएट्स के पार्टनर रहील पटेल कहते हैं, “धोखाधड़ी का इरादा एक खतरनाक रूप से व्यापक छतरी है। यदि इसे बहुत दूर तक खींचा गया तो यह उस अंतिमता को कमजोर करेगा जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संरक्षित किया है। जहां शीर्ष अदालत ने लेनदारों की समिति की बुद्धिमत्ता को सर्वोच्च माना है, वहीं NCLAT का यह विचार कि किसी भी चरण में योजना वापस ली जा सकती है, भ्रम पैदा करता है और बोलीदाताओं का भरोसा घटाता है।”

आदेश और सुप्रीम कोर्ट का रुख

8 सितम्बर के आदेश में NCLAT ने कहा कि दिवालियापन प्रक्रिया के दौरान अगर “धोखाधड़ी” होती है तो वह “सब कुछ निरस्त कर देगी, जिसमें समाधान योजना को मंजूरी देने वाला आदेश भी शामिल है।” उसने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया का चरण अप्रासंगिक है यदि IBC की धारा 65 लागू होती है, जो धोखाधड़ी या दुर्भावनापूर्ण शुरुआत को दंडित करती है।

Also Read: कोविड-19 सर्कुलर बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं घटा सकता: दिल्ली हाई कोर्ट

यह रुख सुप्रीम कोर्ट के भूषण पावर एंड स्टील मामले से अलग है, जहां अदालत ने जेएसडब्ल्यू स्टील की समाधान योजना को बरकरार रखा था और चेतावनी दी थी कि स्वीकृत योजनाओं को फिर से खोलना “पैंडोरा का बॉक्स” खोलने जैसा होगा और IBC को कमजोर करेगा।

विशेषज्ञों की आशंकाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि “धोखाधड़ी” की परिभाषा को लेकर अस्पष्टता समाधान योजनाओं को हमेशा चुनौती के दायरे में रख सकती है। हालांकि कुछ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकृत योजनाओं को वापस लेने के लिए उच्च मानदंड तय कर दिए गए हैं, जिससे NCLAT का आदेश केवल विरले मामलों में ही लागू होगा।

बी श्रावन्थ शंकर, सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, कहते हैं, “हालांकि IBC की धारा 65 धोखाधड़ी की पहचान का कोई तंत्र नहीं बताती, यह फिर भी दुर्भावनापूर्ण दाखिलों के खिलाफ सुरक्षा देती है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश यह संकेत देता है कि अदालतें अब अपने अधिकार का इस्तेमाल सीमित रूप से करेंगी और समाधान योजनाओं की अंतिमता को प्राथमिकता देंगी।”

लेकिन अन्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि स्पष्टता की कमी लंबे मुकदमों का रास्ता खोल सकती है। इक्विलेक्स के मैनेजिंग पार्टनर दीप रॉय कहते हैं, “समाधान आवेदकों को यह मानना होगा कि उनकी योजनाएं या अधिग्रहण लेन-देन अब भी संशोधित या निरस्त हो सकते हैं — भले ही उन्हें मंजूरी मिल चुकी हो या लागू हो चुकी हों। उन्हें ऐसे हालात के लिए सुरक्षा और मुआवजा तंत्र बनाना होगा।”

अल्फा पार्टनर्स के एसोसिएट पार्टनर चिराग गुप्ता कहते हैं: “अगर यह विश्वास करने के लिए पर्याप्त कारण हों कि दिवालियापन या परिसमापन लेनदारों को धोखा देने के लिए शुरू किया गया था, तो योजना किसी भी चरण में वापस ली जा सकती है।”

Advertisement
First Published - September 30, 2025 | 7:13 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement