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कोविड-19 सर्कुलर बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं घटा सकता: दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को बीमाधारक को पूरा क्लेम चुकाने का आदेश दिया, कहा बीमा कंपनी का कोविड-19 सर्कुलर का सहारा लेना अनुचित है

Last Updated- September 29, 2025 | 3:46 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान दिल्ली सरकार द्वारा अस्पताल शुल्क नियंत्रित करने के लिए जारी सर्कुलर को बीमा कंपनियों की संविदात्मक जिम्मेदारियों को सीमित करने के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

जस्टिस सचिन दत्ता ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता रीना गोयल को कोविड-19 अस्पताल खर्च का बकाया हिस्सा चुकाए। कंपनी ने बीमित कवरेज के भीतर होने के बावजूद उनका क्लेम आंशिक रूप से ही मंजूर किया था।

अदालत ने कहा कि बकाया राशि का भुगतान न करना न केवल अनुचित है, बल्कि भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (Irdai) द्वारा जारी स्पष्टीकरणों के विपरीत भी है।

सर्कुलर का मकसद केवल फीस नियंत्रित करना

कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार का 20 जून 2020 का सर्कुलर केवल अस्पतालों द्वारा कोविड-19 मरीजों से वसूले जाने वाले शुल्क को नियंत्रित करने के लिए था, न कि बीमा पॉलिसियों के तहत मिलने वाले भुगतान को घटाने के लिए।

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यह स्थिति पहले ही Irdai ने जनवरी और अप्रैल 2021 के सर्कुलर में स्पष्ट कर दी थी।

चार हफ्तों में क्लेम चुकाने का आदेश

रीना गोयल 4 से 18 दिसंबर 2020 तक अस्पताल में भर्ती रहीं और उन्होंने ₹3,56,295 खर्च किए। उनके पास ₹3 लाख का बेस पॉलिसी कवरेज और ₹3 लाख का “सुपर टॉप अप मेडिकेयर पॉलिसी” था। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने केवल ₹1,75,340 की ही अदायगी की और दिल्ली सरकार के सर्कुलर का हवाला दिया।

कोर्ट ने कहा कि कंपनी का यह रवैया Irdai की स्पष्टताओं और समान मामलों में कंपनी की खुद की कार्यवाही के विपरीत है। अदालत ने बीमा कंपनी को चार हफ्तों के भीतर बकाया राशि चुकाने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रक्षिता गोयल, सैयम गुप्ता, आदित्य गोयल, अंजु भूषण गोयल और अंकिता चौधरी पेश हुए। वहीं Irdai की ओर से अभिषेक नंदा, ऋषिका रावत और सौरभ सिंह ने उपस्थिति दर्ज की।

(एजेंसी के इनपुट के साथ )

First Published - September 29, 2025 | 3:38 PM IST

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