भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपने एजेंटों की संख्या 40 प्रतिशत बढ़ाने पर विचार कर रही है। कंपनी एजेंटों के मजबूत चैनल के माध्यम से कारोबार बढ़ाना चाहती है। इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी अपनी एचआर व्यवस्था भी दुरुस्त करने पर विचार कर रही है, जिससे कि सबसे पुरानी बीमा कंपनी तकनीकी रूप से ज्यादा मजबूत हो सके।
व्यक्तिगत न्यू बिजनेस प्रीमियम खरीदने के लिए एलआईसी अपने व्यक्तिगत एजेंटों पर बहुत ज्यादा निर्भर है। 31 दिसंबर 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी में 13.3 लाख व्यक्तिगत एजेंट हैं। यह देश के कुल एजेंट नेटवर्क का 55 प्रतिशत है और दूसरी बड़ी जीवन बीमा कंपनी की तुलना में एजेंटों की संख्या 6.8 गुना ज्यादा है।
उपरोक्त उल्लिखित व्यक्ति ने कहा, ‘नए एजेंट शामिल करने के लिए भर्ती एजेंसियों को आक्रामक लक्ष्य दिए गए हैं।’
भारत के जीवन बीमा क्षेत्र में एलआईसी के पास सबसे ज्यादा लाभ पहुंचाने वाला एजेंट नेटवर्क है। अप्रैल-दिसंबर 2021 के दौरान उसके एजेंटों ने 2.6 लाख रुपये प्रति एजेंट के हिसाब से न्यू बिजनेस प्रीमियम दिया है, जबकि शीर्ष 5 निजी कंपनियों के एजेंटों ने प्रति एजेंट 1.1 लाख रुपये के न्यू बिजनेस प्रीमियम दिए हैं।
एलआईसी एजेंटों ने इस अवधि के दौरान प्रति एजेंट 9 व्यक्तिगत पॉलिसियों की बिक्री की है, जबकि शीर्ष 5 निजी बीमा कंपनियोंन प्रति एजेंट 1.1 व्यक्तिगत पॉलिसी बेची है।
बहरहाल छोड़ने की दर और निष्क्रिय सदस्य बीमाकर्ताओं के लिए चिंता का विषय रहा है।
सूचीबद्धता के पहले भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में दाखिल रेड रेहिंग प्रॉस्पेक्टस में एलआईसी ने कहा था कि अगर एलआईसी व्यक्तिगत एजेंटों को बरकरार नहीं रख पाती और उचित लागत पर समय से उनकी भर्ती नहीं करती तो उसके परिचालन पर बुरा असर पड़ सकता है।
दिसंबर 2021 में समाप्त 9 महीनों के दौरान एलआईसी ने 2.6 लाख व्यक्तिगत एजेंटों की सेवाएं रद्द कर दीं, जो 31 मार्च, 2021 के आंकड़ों के मुताबिक बीमा कंपनी के व्यक्तिगत एजेंटों की कुल संख्या के 19 प्रतिशत से अधिक है। इसी अवधि के दौरान एलआईसी ने 2.3 लाख व्यक्तिगत एजेंटों की भर्तियां कीं।
31 मार्च, 2021 और 31 दिसंबर, 2021 को एलआईसी के भारत में व्यक्तिगत एजेंटों की संख्या क्रमशः 13.53 लाख और 13.29 लाख थी। इनमें से मार्च 2021 तक 10.86 लाख एजेंट सक्रिय थे और दिसंबर 2021 तक 10.46 लाख एजेंट सक्रिय थे, जिन्होंने पहले के 12 महीनों में कम से कम एक पॉलिसी बेची थी।
कोविड-19 के असर के कारण सक्रिय सदस्यों की संख्या में करीब 4 प्रतिशत कमी आई है और लॉकडाउन के कारण बीमा पॉलिसियों का वितरण प्रभावित हुआ है। एलआईसी ने सार्वजनिक सूचीबद्धता के डिस्क्लोजर में कहा है कि भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) द्वारा व्यक्तिगत एजेंटों व कॉरपोरेट एजेंटों की परीक्षा टाले जाने की वजह से भी एलआईसी नए एजेंट नहीं जोड़ सकी।