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‘विश्व की इंजीनियरिंग भूमिकाओं में करीब एक-चौथाई हिस्सा भारत का’

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नैसकॉम की प्राथमिकताओं, प्रतिभाओं की कमी, उद्योग के भविष्य पर नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार से खास बातचीत:

Last Updated- December 19, 2024 | 10:26 PM IST
वास्तविक आय की अनदेखी और उत्पादक रोजगार, Editorial: Ignoring real income and productive employment

नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार का मानना है कि उद्योग को भू-राजनीतिक चुनौतियों, बढ़ती नियामकीय मांगों और तीव्र तकनीकी उथलपुथल जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इसके बावजूद एआई से मिले अवसर इस क्षेत्र के विकास के लिए सही वक्त का इशारा कर रहे हैं। शिवानी शिंदे के साथ
वर्चुअल साक्षात्कार में उन्होंने नैसकॉम की प्राथमिकताओं, प्रतिभाओं की कमी और उद्योग के भविष्य को लेकर चर्चा की। प्रमुख अंश …

आपके नेतृत्व में नैसकॉम का ध्यान किस पर रहेगा?
जब हम उद्योग की पुनर्कल्पना करते हैं तो हमारी पहली प्राथमिकता विकास को रफ्तार देते रहना है। विकास के अवसरों की अगली लहर की पहचान करना और उसे आगे बढ़ाना जरूरी है। दूसरी प्राथमिकता कौशल है। हालांकि भारत को हमेशा से ही अपनी प्रतिभाओं के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन अब हमें विकास को रफ्तार देने के लिए अपने प्रौद्योगिकी कौशल को और गहरा करना होगा। तीसरी प्राथमिकता उद्योग को उथल-पुथल की अगली लहर के लिए तैयार करना है। हमने बार-बार उथल-पुथल का अनुभव किया है। आने वाले समय में और भी उथल-पुथल होंगी। नैसकॉम को तैयारियां सुनिश्चित करने के लिए सरकार और उद्योग के भागीदारों के साथ मिलकर काम करना होगा।

एक चिंता यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप की वापसी के बाद आव्रजन नियमों में बदलाव होंगे। ऐसे समय में जब विकास भी धीमा है, उद्योग पर इस बदलाव का क्या असर होगा?
एक प्रमुख क्षेत्र जिस पर हमें ध्यान देने की जरूरत है, वह है प्रतिभा की आवाजाही और आव्रजन के बीच स्पष्ट रूप से अंतर करना। बाइडन प्रशासन द्वारा 17 दिसंबर, 2024 को घोषित नवीनतम नियम एच-1बी वर्क वीजा के लिए पात्रता को स्पष्ट करता है और यह सही दिशा में उठाया गया कदम है। नैसकॉम पिछले एक साल के दौरान कई प्रस्तुतियों के जरिये संतुलित सुधारों की सक्रिय रूप से वकालत कर रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण है कि एच-1बी के तंत्र से मुख्य रूप से भारतीय कंपनियों की तुलना में अमेरिकी फर्मों को ज्यादा फायदा होता है। इसलिए अमेरिकी कंपनियों के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि वे अपने दृष्टिकोण को हमारे अनुरूप करें। हम मौजूदा और आने वाले अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर ऐसी नीतियों के आकार के लिए सक्रिय रहेंगे, जो वैश्विक कार्यबल की बढ़ती मांगों पर ध्यान देती हैं।

यह विचार जोर पकड़ रहा है कि आईटी सेवाओं ने पर्याप्त नवाचार नहीं किया है। वैश्विक डिलिवरी मॉडल सबसे महत्वपूर्ण नवाचार बना हुआ है। आप इस आलोचना से किस तरह निपटेंगे, खास तौर पर एआई के दौर में?
मैं इस विचार से आंशिक रूप से असहमत हूं। तकनीकी उद्योग में नवाचार विभिन्न स्तरों पर होता है। हालांकि हमें अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी) में अधिक निवेश करने की आवश्यकता है, लेकिन भारत में नवाचार की कई मिसाल हैं। उदाहरण के लिए क्विक कॉमर्स मॉडल विशिष्ट रूप से भारतीय है और ये टेक-फर्स्ट कंपनियां हैं।
भारत सेवा क्षेत्र के नवाचार के मामले में वैश्विक केंद्र के रूप में भी उभर रहा है, जो देश में वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) के तेजी से विकास से स्पष्ट है। हालांकि उद्योग ने भले ही श्रम या तकनीकी के लाभ के साथ शुरुआत की हो, लेकिन हमने इसे खासा बेहतर किया है। आज हम नवाचार फायदों की पेशकश कर रहे हैं।
फिर भी मैं इस बात से सहमत हूं कि हमें अपने पेटेंट आवेदनों में सुधार करने और आरऐंडडी में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। राष्ट्र और कंपनी दोनों ही स्तरों पर आरऐंडडी खर्च फिलहाल काफी कम है। हालांकि यह बात गौर करने लायक है कि दुनिया की लगभग एक-चौथाई इंजीनियरिंग भूमिकाओं में भारत की हिस्सेदारी है। यहां स्टार्टअप कंपनियां महत्त्वपूर्ण नवाचार को आगे बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए साल 2023 में 83,000 पेटेंट दाखिल किए गए जो पिछले साल की तुलना में 25 प्रतिशत इजाफा दर्शाते हैं। यहां रफ्तार तो है, लेकिन निश्चित रूप से और ज्यादा करने की गुंजाइश है।

वित्त वर्ष 23 और वित्त वर्ष 24 में उद्योग में पहली बार कर्मचारियों की संख्या में गिरावट देखी गई। क्या यह एआई के संबंध में नया मानदंड है? आपने कौशल के महत्व का भी उल्लेख किया है। उद्योग इस बदलाव के लिए क्या तैयारी कर रहा है?
हमने हमेशा ही कहा है कि एआई सीधे लोगों की जगह नहीं लेगा। इसके बजाय एआई टूल वाले लोग उन लोगों की जगह लेंगे, जिनके पास एआई टूल नहीं हैं। उद्योग डिग्री के मूल्यांकन से हटकर कौशल के मूल्यांकन पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है। उदाहरण के लिए प्रमाणपत्र कौशल का आकलन करने का महत्वपूर्ण तरीका बन रहे हैं।

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First Published - December 19, 2024 | 10:15 PM IST

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