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Uttar Pradesh: उद्योग समझ रहे विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण की अहमियत

स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीकों और पारदर्शी एनओसी प्रक्रिया के जरिए उद्योगों को पर्यावरण के साथ संतुलन बनाने में मदद

Last Updated- November 28, 2024 | 9:28 PM IST
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तेजी से बढ़ते औद्योगीकरण के बीच पर्यावरण का ध्यान रखने के लिए उद्योगों को पर्यावरण के अनुकूल तरीकों और तकनीकों को अपनाना होगा। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वच्छ पर्यावरण के लक्ष्य को केंद्र में रखकर उद्योगों के साथ तालमेल बिठाने का प्रयास कर रहा है और उन्हें पर्यावरण के अनुकूल तकनीकें अपनाने के लिए तैयार कर रहा है।

बोर्ड के अध्यक्ष डॉ रवीन्द्र प्रताप सिंह ने पर्यावरण के अनुकूल उपायों की मदद से उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर सिद्धार्थ कलहंस के साथ चर्चा की। प्रमुख अंश:

पर्यावरण संरक्षण और उद्योग एक दूसरे से विपरीत पाले में खड़े दिखते हैं। क्या दोनों एक साथ चल सकते हैं?

आधुनिक युग में विकास को बनाए रखने और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए विकास के लक्ष्य हासिल करने के लिए पर्यावरण संरक्षण और उद्योग साथ-साथ चल सकते हैं और चलने ही चाहिए। विकास के लिए उद्योग आवश्यक हैं। उत्तर प्रदेश ने एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए तेज़ औद्योगीकरण की आवश्यकता है।

लेकिन आधुनिक विकास को जारी रखने और बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण अनिवार्य है। पर्यावरण संरक्षण और उद्योग दोनों साथ-साथ चल सकते हैं क्योंकि तकनीक ने इसे संभव बनाया है। आज उद्योग आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण की भी जिम्मेदारी उठा रहे हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उद्योगों को पर्यावरण के अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने और कम से कम प्रदूषण करने के लिए कैसे प्रोत्साहित करेगा?

उद्योगों के लिए पर्यावरण के अनुकूल तरीके और तकनीकें अपनाना बहुत जरूरी है। यही तकनीकें लंबे समय में उद्योगों को टिकाऊ और पर्यावरण का ध्यान रखने वाला बनाएंगी। ये व्यावहारिक हैं और लंबे समय में बेहतर आर्थिक नतीजे देने के साथ-साथ न्यूनतम प्रदूषण भी पैदा करती हैं। उद्योगों में अधिकाधिक हरित ऊर्जा का उपयोग किया जाना चाहिए और आप देख सकते हैं कि ऐसा हो भी रहा है। बोर्ड लगातार इसके लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

प्रदूषण को लेकर उद्योगों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के बजाय क्या आप उनके साथ संवाद स्थापित करने की दिशा में काम करेंगे?

देखिए, कठोर कदम उठाना तो अंतिम उपाय होना चाहिए। उद्योगों को पर्यावरण के अनुकूल तकनीकें अपनाने के लिए बातचीत, जागरूकता और समझाने का तरीका, भले ही थोड़ा महंगा क्यों न हो, सामान्य तौर पर अपनाना ही चाहिए। हम हमेशा बातचीत के लिए तैयार हैं और यह भी करते रहे हैं।

उद्योगों के साथ-साथ लोगों में भी पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने का काम जारी रहना चाहिए। यह स्पष्ट है कि लोगों में, जिसमें उद्योग भी शामिल हैं, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जो समाज के लिए अच्छा है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) हमेशा से उद्योगों के लिए बड़ी समस्या रहा है। इसे आसान कैसे बनाएंगे?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में सरकार ने एनओसी के आवेदन और उसके निपटान की पूरी प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए कई उपाय किए हैं। उद्योग द्वारा एनओसी के लिए आवेदन और उसके निपटान के लिए ‘निवेश मित्र’ की एकल खिड़की व्यवस्था शुरू की गई है और सब कुछ उसी पोर्टल के जरिये किया जा रहा है। यह ‘निवेश मित्र’ पोर्टल बहुत मददगार साबित हुआ है।

पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी भी वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं। अब यह प्रक्रिया पहले के मुकाबले बहुत आसान हो गई है और उद्योगों को भी शायद ही अब कोई शिकायत है। योगी सरकार की एकल खिड़की व्यवस्था बहुत कारगर तरीके से काम कर रही है।

आम तौर पर कहा जाता है कि विकास से विनाश आता है। क्या इस धारणा को बदला जा सकता है?

आधुनिक विकास या हम कह सकते हैं कि औद्योगिक क्रांति ने मानव जीवन की गुणवत्ता में बहुत सुधार किया है। लेकिन यह भी सच है कि इसने पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी कई चुनौतियां भी खड़ी की हैं, जो अब सामने आ रही हैं।

इन चुनौतियों का सामना करने और पर्यावरणीय क्षति को कम करने के लिए शमनकारी उपायों के रूप में आधुनिक विकास के लगभग हर क्षेत्र में सतत विकास की अवधारणा पेश की जा रही हैं। अधिक से अधिक उद्योग हरित और स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प चुन रहे हैं, विकास अब पर्यावरण के साथ अच्छी तरह से तालमेल बिठा रहा है।

First Published - November 28, 2024 | 9:28 PM IST

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