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भारत बना लाइफ साइंसेज GCC का ग्लोबल हब, 23 कंपनियों ने पांच साल में शुरू किया काम: EY Report

EY की रिपोर्ट ने दिखाया कि भारत ने पांच साल में लाइफ साइंसेज जीसीसी का वैश्विक हब बनकर वित्त, एचआर, आपूर्ति श्रृंखला और शोध कार्यों में अग्रणी भूमिका हासिल की

Last Updated- September 01, 2025 | 10:31 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ईवाई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने तेजी से खुद को लाइफ साइंसेज के वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) के वैश्विक हब के रूप में स्थापित किया है। शीर्ष 50 वैश्विक लाइफ साइंसेज कंपनियों में से लगभग 23 ने अपना परिचालन शुरू किया है। खास बात यह कि यह परिचालन पिछले 5 साल में ही शुरू हुआ है।

‘रीइमेजिनिंग लाइफ साइंसेज ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी)’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में लाइफ साइंसेज जीसीसी अब अपनी वैश्विक लाइफ साइंसेज फर्मों के 70 प्रतिशत वित्त, 75 प्रतिशत मानव संसाधन, 62 प्रतिशत आपूर्ति श्रृंखला और 67 प्रतिशत आईटी कार्यों को संभालते हैं। अध्ययन में फार्मास्युटिकल अनुसंधान, नवाचार और एंड-टू-एंड मूल्य सृजन में भारत की व्यापक भूमिका को स्पष्ट किया गया है।

ईवाई इंडिया में पार्टनर और जीसीसी सेक्टर लीड- टेक्नोलॉजी, मीडिया ऐंड एंटरटेनमेंट ऐंड टेलीकम्युनिकेशंस अरिंदम सेन ने कहा, ‘लाइफ साइंसेज क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपना सर्वाधिक रणनीतिक, ज्ञान-प्रधान कार्य यहां से शुरू कर रही हैं। इस कारण भारत लाइफ साइंस में नवाचार, अनुपालन और भावी विकास का केंद्र बन रहा है।’

सेन ने कहा, ‘हमारा विश्लेषण बताता है कि कैसे भारत वैश्विक फार्मा और स्वास्थ्य सेवा के सहायक केंद्र से तेजी से नवाचार केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। सिर्फ पांच वर्षों में वित्त, मानव संसाधन, आपूर्ति श्रृंखला और आईटी जैसे सक्षम कार्यों में जीसीसी की पहुंच 60 प्रतिशत को पार कर गई है।’ मुख्य कार्यों की बात करें तो दवा खोज और विकास में 45 प्रतिशत, नियामकीय मामलों में 60 प्रतिशत, चिकित्सा मामलों में 54 प्रतिशत और वाणिज्यिक संचालन में 50 प्रतिशत पहुंच के साथ एक बड़ा बदलाव आया है।

उन्होंने कहा, ‘लेकिन जो बात सबसे ज्यादा मजबूती से उभरी है, वह है मुख्य कार्यों में गहरी होती भूमिका। इन कामों में दवा खोज और नियामकीय मामलों से लेकर चिकित्सा और वाणिज्यिक कार्यों तक शामिल हैं। अब बात लागत में बड़े अंतर की नहीं है बल्कि वैश्विक शोध एवं विकास प्रवाह में भारत के अपरिहार्य बनने की है।’ 

First Published - September 1, 2025 | 10:31 PM IST

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