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Import Duty: भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां फिलहाल अमेरिका के नए टैक्स से नहीं चिंतित

सरकार ने माना चीन और वियतनाम से डंपिंग की आशंका, पर घरेलू उद्योग की स्थिति अब भी बेहतर

Last Updated- April 07, 2025 | 10:37 PM IST
electronics

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को कहा कि सरकार चीन और वियतनाम से इलेक्ट्रॉनिक सामान की डंपिंग की संभावना से अवगत है और कंपनियां सोच रही हैं कि ऐसा होने पर क्या किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि फिलहाल भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के विनिर्माता अमेरिका द्वारा हाल में घोषित शुल्क बढ़ोतरी को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं।

कृष्णन ने कहा, ‘हम भारत के विनिर्माता के साथ नियमित रूप से संपर्क में हैं। हम इस मसले पर निरंतर बात कर रहे हैं। फिलहाल वे बहुत ज्यादा चिंतित नहीं हैं, लेकिन यह इस पर निर्भर करता है कि आने वाले समय में स्थिति क्या मोड़ लेती हैं। यह निरंतर बदलती हुई स्थिति है।’ उन्होंने कहा कि बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि शुल्क किस रूप में सामने आता है।

उन्होंने कहा कि चीन व वियतनाम की तुलना में भारत बेहतर स्थिति में है, जिन पर क्रमशः 34 प्रतिशत और 46 प्रतिशत कर लगाया गया है। इसी तरह से अन्य प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माता देशों जैसे ताइवान और इंडोनेशिया पर 32 प्रतिशत कर लगाया गया है, जबकि थाईलैंड पर अमेरिका ने 36 प्रतिशत कर लगाया है।

भारत पर अमेरिका ने 2 अप्रैल को 26 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। शुल्क की ये दरें 9 अप्रैल से लागू होंगी। अपने संबोधन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत बहुत कठिन बाजार है और उसने 52 प्रतिशत शुल्क लगा रखा है, जबकि अमेरिका ने लंबे समय से भारत से आयातित उत्पादों पर कोई शुल्क नहीं लगाया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के संगठनों जैसे इंडिया सेलुलर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ने भी कृष्णन से सहमति जताते हुए कहा कि घरेलू उद्योग 26 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बावजूद बेहतर स्थिति में है। आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने उस समय कहा था, ‘पहले की शुल्क कार्रवाई को शामिल कर लें तो कुल मिलाकर चीन पर लगा शुल्क 54 प्रतिशत से लेकर 154 प्रतिशत के उच्च स्तर पर है और वियतनाम पर 46 प्रतिशत शुल्क लगा है। यह रणनीतिक लाभ है। हालांकि ब्राजील और मिस्र पर लगे 10 प्रतिशत कर की तुलना में भारत की स्थिति कम अनुकूल है। इसके बावजूद कम अवधि के हिसाब से भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बेहतर नजर आ रही है।’

First Published - April 7, 2025 | 10:37 PM IST

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