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GST 2.0: फाडा ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कंपनसेशन सेस क्रेडिट अटका तो होगा 2,500 करोड़ का नुकसान

प्रधानमंत्री को 8 सितंबर को लिखे एक पत्र में फाडा ने अनुरोध किया है कि 21 सितंबर, 2025 को मुआवजा उपकर क्रेडिट लेजर में मौजूद शेष राशि को आईजीएसटी/ सीजीएसटी क्रेडिट लेजर में स्

Last Updated- September 10, 2025 | 6:45 AM IST
FADA
GST 2.0

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) ने 22 सितंबर को जीएसटी-2 लागू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुआवजा उपकर से जुड़ी चिंताओं का समाधान तलाशने का अनुरोध किया है।

उद्योग को महंगी कारों  पर मुआवजा उपकर हटाए जाने से 2,500 करोड़ रुपये का नुकसान होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री को 8 सितंबर को लिखे एक पत्र में फाडा ने अनुरोध किया है कि 21 सितंबर, 2025 को मुआवजा उपकर क्रेडिट लेजर में मौजूद शेष राशि को आईजीएसटी/ सीजीएसटी क्रेडिट लेजर में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जाए। पत्र में कहा गया है, ‘ऐसी शेष राशि का उपयोग नियमित जीएसटी भुगतान (सीजीएसटी/ एसजीएसटी/ आईजीएसटी) के लिए किया जा सकता है।’

इसमें कहा गया है कि जीएसटी-2 पीढ़ी में एक बार होने वाला बदलाव है,  जिसका मकसद नागरिकों और छोटे व्यवसायों के लिए जीवन को सरल बनाना है।

फाडा के अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर ने पत्र में कहा, ‘मुआवजा उपकर क्रेडिट के लिए एक साफ सुथरा ढांचा सुनिश्चित करने से इसके कार्यान्वयन की बाधाएं दूर हो जाएंगी। इससे कर अनुपालन करने वाले लाखों एमएसएमई और डीलरों के बीच भरोसा बना रहेगा और खपत के कारण मांग को गति मिलेगी, क्षमता का अधिकतम उपयोग हो सकेगा  और निवेश तथा नौकरियों के सृजन को बल मिलेगा। संक्षेप में, एक छोटे से प्रशासनिक कदम से आपके द्वारा परिकल्पित लाभों में कई गुना वृद्धि हो जाएगी।’

इस समय डीलरों के पास लगभग 600,000 वाहनों का भंडार है। त्योहार के सीजन में मांग की उम्मीद के कारण डीलरों ने इसे रखा है। उद्योग संगठन ने इस मांग को लेकर पहले ही वित्त मंत्री से संपर्क साधा था, जिससे उनकी त्योहारों की बिक्री प्रभावित नहीं हो।

उन्होंने कहा, ‘देश भर के वाहनों के डीलरों के इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में वैधता के साथ मुआवजा उपकर की राशि है। वर्तमान कानून के तहत इस शेष राशि का उपयोग सीजीएसटी/ एसजीएसटी / आईजीएसटी के भुगतान में नहीं किया जा सकता है। अगर इसके लिएराह नहीं बनाई जाती है तो यह समाप्त हो जाएगा और इससे वैध और कर भुगतान की गई पूंजी त्योहार की शुरुआत में ही खत्म हो जाएगी।’

पत्र में आगे कहा गया है, ‘व्यवस्था संबंधी नजरिया साफ है। डीलरों की इन्वेंट्री का 95 प्रतिशत से अधिक बैंकों से कर्ज लेकर रखा गया है।  यदि क्रेडिट अनुपयोगी हो जाता है और उसकी निकासी की शक्ति घट जाती है तो ब्याज की लागत बढ़ेगी और इससे दबाव बढ़ेगा।  यह ऐसे समय में होगा, जब डीलरों ने सितंबर में दीपावली की बिक्री के लिए स्टॉक जमा किया है।’

First Published - September 10, 2025 | 6:45 AM IST

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