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सुप्रीम कोर्ट के टाइगर ग्लोबल फैसले से GAAR बना कर प्रवर्तन का सबसे मजबूत हथियार, मिली नई ताकत

गार से कर अधिकारियों को अधिकार मिलता है कि अगर कर चोरी के लिए या  वास्तविक कारोबारी मकसद के बगैर लेनदेन किया गया है तो ऐसे मामलों में कर छूट का लाभ न दिया जाए

Last Updated- January 16, 2026 | 10:23 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

टाइगर ग्लोबल मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा जनरल एंटी अवॉयडेंस रूल (गार) की व्याख्या से भारत के कर प्रवर्तन ढांचे के मूल उपकरण के रूप में इसकी स्थिति मजबूत हुई है। इसने करदाताओं को मौजूदा ढांचों और भविष्य के लेनदेन दोनों का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया है। गार से कर अधिकारियों को अधिकार मिलता है कि अगर कर चोरी के लिए या  वास्तविक कारोबारी मकसद के बगैर लेनदेन किया गया है तो ऐसे मामलों में कर छूट का लाभ न दिया जाए।

ग्रांट थॉर्नटन भारत में टैक्स पार्टनर ऋचा साहनी ने कहा, ‘टाइगर ग्लोबल के मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला अंतरराष्ट्रीय कर न्यायक्षेत्र को लेकर निर्णायक क्षण है। यह कर संधियों के भविष्य के इस्तेमाल और सीमा पार व्यवस्थाओं की ढांचा को प्रभावित करेगा।  उन्होंने कहा कि करदाताओं को इस फैसले के निर्धारित सिद्धांतों को देखते हुए अपनी मौजूदा व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करना पड़ सकता है। 

इस फैसले की महत्त्वपूर्ण बात यह है कि न्यायालय ने नियम से अधिक उस नियम के मकसद को महत्त्व दिया है और उसके मुताबिक गार के संचालन को मंजूरी दी है। इसके तहत कर अधिकारी किसी लेनदेन के कानूनी ढांचे की जगह उसके वास्तविक आर्थिक मकसद की जांच करते हैं। 

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ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर संदीप भल्ला ने कहा, ‘फैसले से संकेत मिलता है कि गार में नियम के बजाय उसके मकसद के सिद्धांत पर काम किया जा सकता है। इसका उन सभी लेन-देन पर प्रभाव पड़ेगा जहां संधि लाभ का दावा किया जाता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि  कि फैसले ने पुराने प्रावधानों की सुरक्षा को कमजोर कर दिया है और करदाताओं को इन पर आगे बढ़ने से पहले फिर से विचार करने की आवश्यकता होगी। 

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि गार वहां लागू हो सकता है, जहां किसी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कर लाभ प्राप्त करना है। 

साहनी ने कहा, ‘गार में गति आने के साथ इसके सभी पहलुओं पर व्यापक मार्गदर्शन की आवश्यकता है। केस स्टडीज और उदाहरणों से व्यक्तिपरकता  को कम करने में मदद मिलेगी।’

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नांगिया ग्लोबल के पार्टनर राजन सचदेव ने कहा, ‘टीआरसी कर-संधि लाभ का दावा करने के लिए गारंटी-कार्ड नहीं है।” उन्होंने कहा कि अदालत ने माना कि गार 1 अप्रैल, 2017 को या उसके बाद कर लाभ देने वाली किसी भी व्यवस्था पर लागू हो सकता है, चाहे निवेश किसी भी तारीख को किया गया हो।’ नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला ने कहा कि फैसले से प्रवर्तन में व्यापक बदलाव हुआ है। इकनॉमिक लॉज प्रैक्टिस के पार्टनर राहुल चरखा ने कहा कि इस फैसले से गार काफी मजबूत हुआ है। 

First Published - January 16, 2026 | 10:22 PM IST

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