चांदी की कीमत MCX पर 3 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है, जो अब तक का एक रिकॉर्ड स्तर है। यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध जैसे हालात और आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार जानकारों का कहना है कि जब हालात बिगड़ते हैं, तो निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं और इसी वजह से सोना और चांदी दोनों की मांग बढ़ जाती है।
VT मार्केट के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के सीनियर मार्केट एनालिस्ट जस्टिन खू के मुताबिक, चांदी में आई यह तेजी सिर्फ थोड़े समय की नहीं है। यह एक बड़े और लंबे ट्रेंड का हिस्सा है। चांदी की सप्लाई पहले से ही सीमित है, जबकि सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसे सेक्टर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में चांदी महंगाई और बाजार की अनिश्चितता से बचाव का अच्छा जरिया बनी हुई है।
जस्टिन खू का कहना है कि ऊंची कीमतों पर चांदी में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। जो निवेशक कम समय के लिए ट्रेड करते हैं, वे ऊंचे स्तर पर थोड़ा मुनाफा निकाल सकते हैं। लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चांदी अब भी मजबूत विकल्प बनी हुई है। सलाह यही है कि रिकॉर्ड भाव पर जल्दबाजी में खरीदारी न करें, बल्कि गिरावट आने पर खरीदें और पहले से मौजूद निवेश को होल्ड करके रखें।
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केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी अब धीरे धीरे ऊंचे दायरे में जाने के संकेत दे रही है। मौजूदा आर्थिक हालात कीमती धातुओं के लिए फायदेमंद बने हुए हैं। इंडस्ट्रियल सेक्टर से मांग मजबूत है, लेकिन सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही है। तकनीकी संकेत भी बताते हैं कि मध्यम अवधि में चांदी का ट्रेंड पहले से ज्यादा स्थिर हो रहा है। रिपोर्ट में 100 डॉलर प्रति औंस का स्तर आगे के लिए अहम माना गया है, हालांकि ज्यादा उतार चढ़ाव और नीतिगत बदलाव बड़े जोखिम बने रहेंगे।
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा यूरोप के कुछ देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद बाजार में डर का माहौल बन गया। इसके बाद निवेशक शेयर बाजार से निकलकर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़े, जिससे चांदी की कीमत एक ही दिन में 4 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई और यह 94 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। हालांकि इसके बाद मुनाफा वसूली भी देखने को मिली, जिससे साफ है कि बाजार नीतिगत बयानों पर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में चांदी का उत्पादन बहुत धीमी रफ्तार से बढ़ रहा है। ज्यादातर चांदी तांबा और जिंक जैसी धातुओं के साथ निकलती है, इसलिए चांदी की सप्लाई को जल्दी बढ़ाना आसान नहीं है। दूसरी तरफ भारत और चीन जैसे देशों से मांग लगातार बढ़ रही है। लंदन के गोदामों में भी चांदी का स्टॉक घटा है, जिससे बाजार में तंगी बनी हुई है।
आज चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों में ही नहीं हो रहा। सोलर पैनल, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अकेले सोलर सेक्टर में ही दुनिया की कुल चांदी की मांग का बड़ा हिस्सा खप रहा है। यही वजह है कि चांदी की मांग लंबे समय तक बनी रहने की उम्मीद है।
इस तेजी की एक और बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की कमजोरी भी मानी जा रही है। कोटक म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर सतीश डोंडापाटी के मुताबिक, डॉलर के कमजोर होने से सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में निवेश और ज्यादा आकर्षक हो जाता है। जब डॉलर फिसलता है, तो दुनिया भर के निवेशक कीमती धातुओं की ओर तेजी से रुख करते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बीते एक साल में चांदी की कीमत 170 प्रतिशत से ज्यादा उछल चुकी है, जबकि सोना भी करीब 70 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दिखा चुका है। इतनी बड़ी तेजी यह दिखाती है कि निवेशकों का भरोसा लगातार सुरक्षित निवेश पर बढ़ रहा है।
सतीश डोंडापाटी के मुताबिक, चांदी की खास बात यह है कि वह सिर्फ सुरक्षित निवेश नहीं है, बल्कि एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है। मौजूदा समय में जब इंडस्ट्री से भी मांग बनी हुई है, तो चांदी को दोहरा फायदा मिल रहा है। यही वजह है कि मौजूदा आर्थिक हालात में चांदी की मजबूती सोने से भी ज्यादा नजर आ रही है।
उनका कहना है कि मौजूदा हालात में सोना और चांदी सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि बाजार के डर और अनिश्चितता का संकेत भी बन चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में तेजी का रुझान अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन ऊंचे दामों पर जोखिम भी ज्यादा होता है। इसलिए निवेशकों को संतुलन बनाकर चलना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक गिरावट पर खरीदारी करें और चांदी को पोर्टफोलियो में सीमित हिस्से के तौर पर रखें।
बंधान एएमसी के सीईओ विशाल कपूर का कहना है कि सोना और चांदी पोर्टफोलियो में विविधता लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि फिजिकल चांदी में शुद्धता, स्टोरेज और दोबारा बेचने की दिक्कतें होती हैं। वहीं ETF में निवेश के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी होता है, जो हर निवेशक के पास नहीं है। ऐसे में फंड ऑफ फंड के जरिए निवेश करना आसान विकल्प हो सकता है, जहां सिर्फ 1,000 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है और 100 रुपये से SIP भी की जा सकती है।