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2025 में ध्वस्त हुईं भविष्यवाणियां: अर्थशास्त्री, रणनीतिकार और विदेश नीति के ‘एक्सपर्ट्स’ कैसे चूक गए? 

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वर्ष 2026 के लिए पूर्वानुमानों की कोई कमी नहीं है लेकिन 2025 दिखाता है कि आखिर क्यों हमें किसी भी पूर्वानुमान को संदेह की दृष्टि से देखना चाहिए। बता रहे हैं टीटी राम मोहन

Last Updated- January 19, 2026 | 10:43 PM IST
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इलस्ट्रेशन- बिनय सिन्हा

नया साल आरंभ हो गया है। इसके साथ ही नए साल से अपेक्षाएं और पूर्वानुमान भी सामने आने लगे हैं। हमें इन पूर्वानुमानों को सामान्य से अधिक आशंका के साथ देखना चाहिए। अनुमान लगाने वालों का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है। 2025 में वे कई मोर्चों पर बुरी तरह विफल रहे थे। आइए देखते हैं कि अर्थशास्त्र के विद्वानों, सैन्य विश्लेषकों, विदेश नीति के जानकारो के अनुमान किस प्रकार विफल रहे। हम यहां सीमित नमूनों पर बात करेंगे।

ट्रंप की शुल्क वृद्धि और अमेरिका की आर्थिक वृद्धि

अप्रैल 2025 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने अनुमान लगाया था कि अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 2025 में 1.8 फीसदी और 2026 में 1.6 फीसदी रह सकती है। यह अनुमान 2024 के 2.8 फीसदी से कम था। पिछले अक्टूबर में उसने अपने अनुमान को संशोधित कर क्रमशः 2 फीसदी और 2.1 फीसदी कर दिया। अब सभी स्वीकार कर रहे हैं कि अमेरिका के लिए महाविनाश की भविष्यवाणी गलत साबित हुई है।

अर्थशास्त्री अब समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि अनुमान में चूक कहां रह गई। मसलन अमेरिका द्वारा शुल्क उतने नहीं बढ़ाए गए जितनी कि आशंका थी। मानो औसत भारित शुल्क का 3 फीसदी से बढ़कर लगभग 17 फीसदी होना ही पर्याप्त बुरा न हो। इस बात को अनुमान में शामिल करना चाहिए था कि निर्यातक अमेरिका को अग्रिम निर्यात कर देंगे। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की उछाल ने अर्थव्यवस्था की कमजोरियों की भरपाई कर दी है।

दरअसल, 2025 की तीसरी तिमाही में अमेरिका की जीडीपी में 4.3 फीसदी वृद्धि उपभोक्ता खर्च और निर्यात से प्रेरित थी, न कि व्यापार निवेश से।अर्थशास्त्रियों के लिए चौंकाने वाली बात यह है कि डॉनल्ड ट्रंप के शुल्क के परिणामस्वरूप अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लगने वाले झटके 2026 में भी वर्तमान अनुमानों के अनुसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के लिए अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर 2.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।

भारत की जीडीपी वृद्धि

ट्रंप ने गत वर्ष अप्रैल में लिबरेशन डे शुल्क दरों की घोषणा की थी और भारत पर 25 फीसदी का जवाबी शुल्क लगाया था। अगस्त में उन्होंने भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया क्योंकि वह रूस से तेल खरीद रहा था। अप्रैल में ही भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 26 की जीडीपी वृद्धि के अनुमानों को 6.7 फीसदी से कम करके 6.5 फीसदी कर दिया था। अगस्त 2025 के दंडात्मक शुल्क के बाद कुछ निजी एजेंसियों ने कहा कि भारत की जीडीपी वृद्धि 6 फीसदी से नीचे आ सकती है।

कोई भी यह कल्पना नहीं कर सकता था कि जिस वर्ष भारतीय निर्यात को अमेरिका में वित्त वर्ष के आधे से अधिक समय तक 50 फीसदी से अधिक शुल्क का सामना करना पड़ा, उस वर्ष भारत की जीडीपी वृद्धि 7.4 फीसदी होगी, जो पिछले वर्ष की 6.5 फीसदी वृद्धि से काफी अधिक है। अब, कई एजेंसियां अनुमान लगा रही हैं कि वित्त वर्ष 27 में वृद्धि की गति 7 से 7.5 फीसदी के स्तर पर बनी रहेगी।

अमेरिका में भारत विरोधी भावना

साल 2024 में जब ट्रंप चुनाव जीते तो माना जा रहा था कि भारत और अमेरिका के रिश्तों में और सुधार होगा। लेकिन तब से अब तक रिश्तों ने जो आकार लिया है वह किसी झटके से कम नहीं है। विद्वान कहा करते थे कि दोनों सरकारों के बीच चाहे जो समीकरण हों लेकिन जनता के आपसी रिश्ते सकारात्मक रहने वाले हैं। ऐसा होता नहीं दिख रहा है। ऐसा लगता है कि ट्रंप प्रशासन में भारत विरोधी रुझान ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ में यकीन रखने वालों के व्यापक भारत विरोधी रुख का एक पहलू भर है।

इसके लिए कई बातें जिम्मेदार रही हैं। उच्च कौशल वाले व्यक्तियों के लिए बनाए गए एच-1बी वीजा का दुरुपयोग करते हुए कम लागत वाले कामगारों को अमेरिका लाना भी एक वजह है। विभिन्न क्षेत्रों में भारतीयों की बहुत ज्यादा सफलता एक अन्य कारण है। सोशल मीडिया पर अमेरिकी यह पूछते हैं कि क्या अमेरिका को माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और आईबीएम जैसी कंपनियों का नेतृत्व करने के लिए भारतीयों की आवश्यकता है और क्या विवेक रामास्वामी शीर्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त रूप से अमेरिकी हैं। प्रवासी भारतीयों द्वारा अपनी धार्मिकता का प्रदर्शन भी तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर रहा है। टेक्सस में 85 फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा, प्रमुख उपनगरों में भारतीय त्योहारों का शोरगुल भरा उत्सव आदि। किसी भी विशेषज्ञ ने अमेरिका में भारत या भारतीय समुदाय के प्रति इस नकारात्मकता की भविष्यवाणी नहीं की थी।

विश्व मंच पर पाकिस्तान का उभार

जनवरी में जब ट्रंप ने दोबारा पदभार संभाला, तब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ा हुआ था। लेकिन 2025 में उसने कूटनीति की दुनिया में जबरदस्त वापसी की। पहलगाम नरसंहार और गत मई में भारत-पाक झड़प के बाद पाकिस्तान को किसी खास अंतरराष्ट्रीय निंदा का सामना नहीं करना पड़ा। इसके विपरीत, उसने इस झड़प का उपयोग ट्रंप की कृपा फिर से पाने के लिए किया। अन्य बातों के साथ-साथ बार-बार यह श्रेय उन्हें दिया कि उन्होंने लड़ाई को समाप्त कराया।

इसके बाद, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का व्हाइट हाउस में दो बार स्वागत किया गया, जो संभवतः किसी भी कार्यरत जनरल के लिए एक अनोखी पहली घटना थी। 2025 के अंत में अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए 68.6 करोड़ डॉलर का पैकेज मंजूर किया ताकि वह एफ-16 लड़ाकू विमानों का रखरखाव और उन्नयन कर सके। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक साझा रक्षा समझौता भी किया। यह बिना अमेरिका के आशीर्वाद के नहीं हो सकता था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का दावा है कि चीन, रूस और अमेरिका तीनों बड़ी शक्तियों के साथ उनके देश के अच्छे संबंध हैं। पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय कद में बदलाव ने विदेश नीति विशेषज्ञों को चौंका दिया है।

पश्चिम एशिया में इजरायल का दबदबा

सात अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर अचानक हमला किया। इसके बाद इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। 2024 के अंत में इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर अपने अभियान का विस्तार किया। टिप्पणीकारों ने चेतावनी दी कि हिज्बुल्ला हमास नहीं है। उसके पास एक लाख से अधिक मिसाइलें थीं और इजरायल के शहरों को तबाह करने की क्षमता थी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल को संकट की ओर ले जा रहे थे।

लेकिन विशेषज्ञ यह नहीं जानते थे कि इजरायल ने हिज़्बुल्ला के ठिकानों और उसकी मिसाइलों पर खुफिया जानकारी इकट्ठा कर ली थी। इजरायल ने हिज़्बुल्ला के नेतृत्व को खत्म कर दिया और उसकी मिसाइल क्षमता का 80 फीसदी नष्ट कर दिया। आज यह अपने पुराने स्वरूप की मात्र छाया बनकर रह गया है। दिसंबर 2024 में सीरिया में एक नया मोर्चा खुला, जहां एक विद्रोही संगठन ने इजरायल और तुर्किये की मदद से कुछ ही दिनों में असद शासन को गिराने की कोशिश की। पिछले जून में इजरायल और अमेरिका ने ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमला कर उन्हें काफी हद तक निष्क्रिय कर दिया। उन

विशेषज्ञों को अपने शब्द वापस लेने पड़े जिन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपनी क्षमता से अधिक विस्तार कर लिया है। 2025 में इजरायल का पश्चिम एशिया पर प्रभुत्व बढ़ गया। 2026 के लिए भविष्यवाणियों की कोई कमी नहीं है। एपस्टाीन फाइलें ट्रंप के पतन का कारण बनेंगी (शायद यह पहले ही गलत साबित हो चुका है)। वेनेजुएला ट्रंप के लिए दलदल साबित होगा (यह अभी ही संदिग्ध दिख रहा है)। रिपब्लिकन पार्टी इस वर्ष अमेरिकी चुनावों में बुरी तरह हार जाएगी, एआई का बुलबुला फूट जाएगा और अमेरिका में मुद्रास्फीति पर शुल्क वृद्धि का पूरा असर 2026 में महसूस किया जाएगा…वगैरह।

इंटेलेक्चुअल्स नामक पुस्तक में इतिहासकार पॉल जॉनसन लिखते हैं, ‘सड़क पर बेतरतीब चुने गए दर्जन भर लोग नैतिक और राजनीतिक मामलों पर उतने ही समझदार विचार देने की संभावना रखते हैं जितनी कि बुद्धिजीवियों का कोई प्रतिनिधि समूह… बुद्धिजीवियों से सावधान रहें।’ आप चाहें तो बुद्धिजीवियों के स्थान पर विशेषज्ञ भी रख सकते हैं।

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First Published - January 19, 2026 | 10:07 PM IST

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