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भारत की रफ्तार पर IMF का भरोसा, 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर किया 6.4%

आईएमएफ ने अपनी ताजा विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा, ‘2026 और 2027 में वृद्धि घटकर 6.4 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है क्योंकि चक्रीय और अस्थायी कारक कमजोर पड़ रहे हैं।’

Last Updated- January 19, 2026 | 10:18 PM IST
International Monetary Fund (IMF)
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) | फाइल फोटो

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने  सोमवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का अनुमान अपने अक्टूबर 2025 के अनुमान से 20 आधार अंक बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। यह वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.3 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के अनुमान से कम है।

आईएमएफ ने अपनी ताजा विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा, ‘2026 और 2027 में वृद्धि घटकर 6.4 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है क्योंकि चक्रीय और अस्थायी कारक कमजोर पड़ रहे हैं।’

आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का अनुमान अक्टूबर 2025 के अनुमान की तुलना में 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में उम्मीद से बेहतर परिणाम और चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में मजबूत वृद्धि को देखते हुए आईएमएफ ने वृद्धि अनुमान बढ़ाया है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी जीडीपी के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 6.5 प्रतिशत की तुलना में अधिक है।

आईएमएफ के आर्थिक सलाहकार और अनुसंधान निदेशक पियरे ओलिवियर गोरिंचास ने कहा कि व्यापार व्यवधानों के बीच वैश्विक वृद्धि ने दम दिखाया है, लेकिन इस तरह के व्यवधानों के नकारात्मक प्रभाव समय के साथ बढ़ सकते हैं।

भारत को इस समय 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कपड़ा, जूते और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम बहुल क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 13 जनवरी को घोषणा की थी कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका ‘तत्काल प्रभाव से’ 25 प्रतिशत शुल्क लगाएगा।

गोरिंचास ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘सामान्य तौर पर हम सभी पक्षों से एक ऐसा समाधान खोजने की कोशिश करने की वकालत कर रहे हैं जो व्यापार प्रणाली को खुला रखेगा, स्थिर और अनुमान लगाने योग्य नियम बनाए रखेगा और कारोबार को एक निश्चित स्तर की निश्चितता के साथ निवेश और आपूर्ति-श्रृंखला संबंधी निर्णय लेने की अनुमति देगा। वर्तमान वातावरण निश्चित रूप से इसके अनुकूल नहीं है।’

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता और शुल्क बढ़ाने से उन देशों को भी नुकसान होगा, जो शुल्क लगा रहे हैं।

गोरिंचास ने कहा, ‘अगर शुल्क में बहुत अधिक वृद्धि होती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।’

आईएमएफ ने रिपोर्ट में कहा है कि 2025 में गिरावट के बाद भारत में महंगाई दर लक्ष्य के भीतर आने की उम्मीद है।

अग्रिम अनुमानों के मुताबिक वृद्धि के परिदृश्य को जीडीपी डिफ्लेटर से मदद मिली है, जो 5 दशक के निचले स्तर 0.5 प्रतिशत पर है। साथ ही नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर वित्त  वर्ष 2026 में 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।  यह महामारी प्रभावित वित्त वर्ष 2020-21 के बाद की तुलना में सबसे कम है।

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) पर, गोरिंचास ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि एआई संचालित निवेश में परिवर्तनकारी क्षमता है, लेकिन इससे वित्तीय और संरचनात्मक जोखिम भी पैदा हुए हैं, जिनके लिए सतर्कता बरतने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि नवाचार वृद्धि को बढ़ावा देता है, लेकिन इससे कुछ सेग्मेंट में नौकरियों के तरीके में बदलाव और वेतन कम होने का भी जोखिम है।

गोरिंचास ने कहा कि नीतिगत फैसलों की राह की बाधाएं कम करने, श्रमिकों को कुशल बनाकर उनकी प्रासंगिकता बनाए रखने में मदद करने और लक्षित कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार की गतिशीलता को समर्थन करने पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

First Published - January 19, 2026 | 10:18 PM IST

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