facebookmetapixel
Advertisement
अच्छे दिनों में राजकोषीय गुंजाइश न बनाना भारत की बड़ी भूल, आर्थिक संकट में विकल्प हुए सीमितEditorial: फेड चीफ के सख्त रुख और ब्याज दर बढ़ने के डर से सहमा ग्लोबल मार्केटफार्मा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क के सिस्टम में बड़ी सेंधमारी, हैकर्स ने मांगी 2.5 करोड़ डॉलर की फिरौतीमहंगाई दर को लेकर सतर्क रहना जरूरी, नीतिगत दरों में बदलाव के लिए करना होगा इंतजार: RBIटेलीग्राम बैन पर केंद्र सरकार के फैसले को दिल्ली HC की मंजूरी, कोर्ट ने कहा: यह कदम अनुचित नहींमुकेश अंबानी का बड़ा बयान: आयातित ऊर्जा पर निर्भरता लंबे समय के लिए ठीक नहीं, ग्रीन एनर्जी में निवेश बढ़ाएगी RILईशा अंबानी का मेगा प्लान: ₹1 लाख करोड़ के राजस्व लक्ष्य के साथ देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी बनेगी RCPLमुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा AI कंप्यूट प्लेटफॉर्म बनाएगी रिलायंसGold Price Crash: फेड के सख्त रुख और मजबूत डॉलर से टूटा सोना, लगातार तीसरे सप्ताह आई भारी गिरावटReliance Stocks: JIO IPO से चमकेगी रिलायंस की किस्मत, शेयरों की रेटिंग में बड़े सुधार के संकेत

FMCG सेक्टर में दिख रही उम्मीद, मांग में सुधार जारी रहने की संभावना

Advertisement
Last Updated- June 08, 2023 | 10:41 PM IST
Rural demand growing at a very slow pace, Wipro Consumer Care revealed

एफएमसीजी क्षेत्र (FMCG Sector) को आम तौर पर मुश्किल समय में सुरक्षित निवेश के रूप में माना जाता है क्योंकि लोग कभी भी साबुन और टूथपेस्ट खरीदना बंद नहीं करते हैं। हालांकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र की कमजोर मांग वर्ष 2020-21 के लॉकडाउन के बाद से मसला रही है, जबकि बढ़ती महंगाई ने भी मार्जिन को प्रभावित किया है।

एफएमसीजी की दिग्गज कंपनियां मूल्य वृद्धि और प्रबंधन की अच्छी कार्यप्रणाली के आधार पर बच पाई हैं, लेकिन उन्होंने वृद्धि में मंदी देखी है तथा कच्चे माल और परिवहन लागत में इजाफे की वजह से मार्जिन में संकुचन का अनुभव किया है।

लगातार पांच तिमाहियों में गिरावट के बाद वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही के दौरान एफएमसीजी क्षेत्र में सकारात्मक वॉल्यूम वृद्धि देखी गई और मांग में इस मजबूती का नेतृत्व शहरी बाजारों ने किया। हालांकि विश्लेषकों को लगता है कि ग्रामीण क्षेत्र की नरमी शायद थम चुकी है तथा इनपुट लागत में कमी और मुद्रास्फीति में नरमी से मांग में सुधार जारी रहना चाहिए।

कम लागत के मद्देनजर सकल मार्जिन और एबिटा में सुधार होना चाहिए। एफएमसीजी कंपनियों को इन लाभों का कुछ हिस्सा उत्पादों के नवाचार तथा वितरण विस्तार और विपणन व्यय में निवेश करना होगा, जिससे परिचालन मार्जिन विस्तार सीमित हो सकता है।

एफऐंडबी (खाद्य और पेय) और होम केयर क्षेत्र ने चार साल की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर या सीएजीआर के संबंध में क्रमश: 12 प्रतिशत और 11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आवश्यक वस्तुओं के मामले में प्रदर्शन जारी रखा है। वृद्धि का संचालन अब भी मूल्य निर्धारण से हो रहा है, लेकिन आगे चलकर वॉल्यूम में सुधार होने की उम्मीद है।

वैकल्पिक श्रेणियों में अब भी मांग में नरमी देखी जा सकती है, लेकिन पेंट और फास्ट फूड रेस्तरां जैसे खंडों में वृद्धि देखी गई है। सिगरेट का राजस्व भी कम आधार की वजह से बढ़ा है। पॉम ऑयल, कच्चे तेल, कच्चे तेल से निर्मित उत्पाद आदि जैसे प्रमुख इनपुट की कीमतों में नरमी देखी गई और अधिकांश कंपनियों के मार्जिन में क्रमिक सुधार दर्ज किया गया।

Advertisement
First Published - June 8, 2023 | 10:41 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement