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अनिल अंबानी की रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाएगी ई कार!

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अनिल अंबानी की कंपनी 2.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों और 10 GWh बैटरी संयंत्र की योजना बना रही है, आगे चलकर क्षमता में विस्तार की संभावना।

Last Updated- September 06, 2024 | 10:30 PM IST
Reliance Infra

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर अब इलेक्ट्रिक कारों और बैटरियों के विनिर्माण की योजना बना रही है। मामले के जानकार दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि कंपनी ने अपनी योजनाओं के लिए सलाहकार के तौर पर चीनी वाहन विनिर्माता बीवाईडी के पूर्व भारतीय अधिकारी को नियुक्त किया है।

पहले सूत्र ने बताया कि अनिल अंबानी के रिलायंस समूह वाली कंपनी ने सालाना करीब 2.5 लाख वाहनों की शुरुआती क्षमता वाले इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र के लागत व्यवहार्यता अध्ययन के लिए बाहरी सलाहकारों की नियुक्ति है, जिसे आगे चलकर 7.5 लाख वाहनों तक बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी 10 गीगावॉट घंटे (जीडब्ल्यूएच) क्षमता वाला बैटरी संयंत्र लगाने की संभावनाएं भी खंगाल रही है जिसे एक दशक में 75 जीडब्ल्यूएच तक बढ़ा
दिया जाएगा।

हालांकि, यह खबर पहली बार मिली है मगर रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। रॉयटर्स की इस खबर से पहले कंपनी के शेयर 0.2 फीसदी गिरे हुए थे लेकिन खबर के बाद वह 2 फीसदी चढ़कर बंद हुए।

इलेक्ट्रिक वाहन परियोजना के लिए सलाहकार के तौर पर नियुक्त बीवाईडी के पूर्व अधिकारी संजय गोपालकृष्णन ने भी कोई टिप्पणी नहीं की है। अनिल अंबानी एशिया के सबसे अमीर मुकेश अंबानी के छोटे भाई हैं। मुकेश का तेल और गैस सहित दूरसंचार से लेकर खुदरा क्षेत्र में कारोबार फैला हुआ है। दोनों भाइयों ने साल 2005 में पारिवारिक कारोबार का बंटवारा कर लिया था।

मुकेश अंबानी की कंपनी पहले से ही स्थानीय स्तर पर बैटरी विनिर्माण पर काम कर रही है और इस सप्ताह उसने 10 गीगावॉट बैटरी सेल उत्पादन के लिए सरकारी प्रोत्साहन की बोली भी जीती है। अगर अनिल अंबानी की कंपनी भी इस योजना को आगे बढ़ाने का फैसला करती है तो दोनों भाई एक ऐसे बाजार में होड़ करेंगे जहां अभी इलेक्ट्रिक वाहनों की उपस्थिति कम जरूर है मगर वह तेजी से बढ़ रही है।

पिछले साल भारत में बेची गई कुल 42 लाख कारों में से इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 2 फीसदी से भी कम थी लेकिन सरकार साल 2030 तक इसे 30 फीसदी तक बढ़ाना चाहती है। सरकार ने स्थानीय स्तर पर बैटरी सहित इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके कलपुर्जों के विनिर्माण करने वाली कंपनियों के लिए प्रोत्साहन के तौर पर 5 अरब डॉलर से अधिक का बजट रखा है।

भारत में फिलहाल बैटरी विनिर्माण का काम शुरू नहीं हुआ है लेकिन एक्साइड और अमर राजा जैसी कुछ स्थानीय कंपनियों ने देश में लिथियम आयन बैटरी सेल बनाने के लिए चीनी कंपनियों के साथ करार किया है। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर भी साझेदार की तलाश कर रही है जिनमें चीनी कंपनियां भी शामिल हैं। एक सूत्र ने कहा कि कंपनी अगले कुछ महीनों में ही अपनी योजनाओं को मूर्त रूप देना चाह रही है।

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First Published - September 6, 2024 | 10:30 PM IST

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