PM Kusum Yojana: किसान सिंचाई के लिए डीजल पंपों पर निर्भरता घटा रहे हैं, वे इसकी जगह सौर ऊर्जा पंप अपना रहे हैं। केंद्र सरकार सौर ऊर्जा पंप को बढ़ावा देने के लिए पीएम-कुसुम योजना चला रही है। इस योजना का लाखों किसान लाभ उठा चुके हैं और इसके तहत हजारों मेगावाट सौर ऊर्जा स्थापित हो चुकी है। इस योजना में किसान, किसानों का समूह, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), जल उपयोगकर्ता संघ (डब्ल्यूयूए)/ प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पीएसी) भाग ले सकती हैं।
पीएम-कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) भारत सरकार की एक योजना है जिसका उद्देश्य किसानों को डीजल पर निर्भरता खत्म करने और सस्ती, स्वच्छ सौर ऊर्जा प्रदान करने के लिए सौर सिंचाई पंप स्थापित करने में मदद करना है, जिसमें उन्हें सरकार से 60 फीसदी तक की सब्सिडी मिलती है, जिससे वे अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी कमा सकते हैं और यह योजना देश की सौर ऊर्जा क्षमता को बढ़ाती है।
किसानों को पीएम-कुसुम योजना खूब पसंद आ रही है और लाखों की संख्या में किसान इसका लाभ उठा रहे हैं। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक पिछले महीने (30 नवंबर 2025) तक 20,42,459 लाभार्थी इस योजना का फायदा उठा चुके हैं। साथ ही इस योजना के सभी घटकों के तहत कुल 10,203 मेगावाट बिजली स्थापित की जा चुकी है। इस योजना के तीन घटक जैसे ग्रिड से जुड़े सोलर पावर प्लांट (500 kW तक), स्टैंडअलोन सोलर पंप (Off-grid)और ग्रिड कनेक्टेड पंप हैं। 30 नवंबर 2025 तक पीएम कुसुम योजना के तहत 7,106 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
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पीएम किसान योजना महाराष्ट्र में सबसे अधिक सफल हो रही है। इसी राज्य में इस योजना के सबसे अधिक 11,21,416 लाभार्थी हैं। इसके बाद राजस्थान में करीब 2.36 लाख, गुजरात में करीब 2.28 लाख, हरियाणा में करीब 1.80 लाख लाभार्थी हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या एक लाख से भी कम करीब 72 हजार है। बड़े राज्यों में सबसे कम महज 40 लाभार्थी पश्चिम बंगाल में है।