facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

LPG बिक्री में नुकसान की भरपाई करेगा केंद्र, तेल कंपनियों को दी जाएगी 30,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति

Advertisement

तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपयोगकर्ताओं की वृद्धि स्थिर हो गई है और अधिकतर परिवार इसके दायरे में आ गए हैं।

Last Updated- May 05, 2025 | 10:30 PM IST
LPG
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार ने तेल विपणन कंपनियों से कहा है कि वह रसोई गैस (एलपीजी) की बिक्री में होने वाले नुकसान की भरपाई करेगी। तेल विपणन कंपनियों के दो अधिकारियों ने कहा है कि सरकार वित्त वर्ष 2026 के अंत तक 30 हजार करोड़ रुपये की भरपाई करेगी।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के अधिकारियों ने बीते हफ्ते कहा था कि उद्योग के लिहाज से तेल विपणन कंपनियों को चालू वित्त वर्ष में 30 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है। तीनों सरकारी तेल कंपनियों में से सबसे बड़ी आईओसीएल को वित्त वर्ष 2025 में एलपीजी की बिक्री में 19 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। तेल विपणन कंपनियों को घरेलू एलपीजी दरों और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आ रहे अंतर में सामंजस्य बिठाना पड़ रहा है, क्योंकि एलपीजी सिलिंडर की खुदरा कीमतें विनियमित रहती हैं।

अधिकारियों ने बताया कि बीते महीने केंद्र सरकार द्वारा एलपीजी की कीमतों में 50 रुपये की बढ़ोतरी से नुकसान की भरपाई 10 हजार करोड़ रुपये तक कम हो गई और शेष राशि का ध्यान सरकार वित्त वर्ष 2026 के अंत तक रख लेगी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में तेल विपणन कंपनियों को करीब 41,338 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था।

इसके ठिकरा एलपीजी के लिए वैश्विक अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क, सऊदी सीपी पर फोड़ा गया था, जो व्यापार युद्ध की आशंका से अस्थिरता के परिणामस्वरूप उच्च स्तर पर पहुंच गया। अधिकारियों ने बताया कि वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2023 के बीच सऊदी सीपी की औसत कीमत 415 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर 712 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गई।

घरेलू मजबूरियां

सरकार ने पहले बताया था कि भारत अपनी जरूरतों का 60 फीसदी से अधिक आयात करता है, लेकिन घरेलू एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों से जुड़ी रहती है। नतीजतन, जुलाई 2023 से फरवरी 2025 के बीच सऊदी सीपी औसतन 63 फीसदी बढ़कर 629 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गई मगर इसी अवधि में सरकार की महत्त्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए कीमतें 44 फीसदी तक घट गईं।

मई 2016 में पेश की गई इस महत्त्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित तबकों तक एलपीजी जैसे खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन मुहैया कराना था। मार्च में इसके देश भर में 10.33 करोड़ लाभार्थी थे। नतीजतन, देश भर में एलपीजी कवरेज बढ़कर 107 फीसदी हो गई।

तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपयोगकर्ताओं की वृद्धि स्थिर हो गई है और अधिकतर परिवार इसके दायरे में आ गए हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में देश भर में एलपीजी की मांग में वृद्धि कम होने की उम्मीद है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की कीमतों में और वृद्धि की उम्मीद नहीं है। इसलिए, मंत्रालय तेल विपणन को क्षतिपूर्ति के तरीके खोजने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा कर रहा है। साल 2022 में कैबिनेट ने तेल विपणन कंपनियों के लिए 22,000 करोड़ रुपये जारी किए थे।

Advertisement
First Published - May 5, 2025 | 10:23 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement