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Odisha: कोरापुट जिले में काला जीरा चावल के GI Tag को लेकर विवाद, MSSRF ने जताई विज्ञापन पर आपत्ति

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MSSRF ने दलील दी कि श्री फार्मर्स प्रोड्यूसर्स नाम की निजी कंपनी द्वारा किए गए आवेदन से संभावित रूप से स्थानीय किसानों को लाभ से बाहर रखा जा सकता है

Last Updated- September 07, 2023 | 11:28 PM IST
Row over GI tag for Kala Jeera rice in Odisha's Koraput district
GI Fair India

ओडिशा के जेपोर में एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) ने कोरापुट के प्रसिद्ध ‘काला जीरा चावल’ के जीआई टैग के लिए औपचारिक मंजूरी के संबंध में भौगोलिक संकेतक (GI) अधिकारियों द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक विज्ञापन पर आपत्ति जताई है।

MSSRF ने तर्क दिया कि जैविक श्री फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी (JSFPC) के रूप में पहचानी जाने वाली एक निजी कंपनी द्वारा जीआई टैग के लिए आवेदन संभावित रूप से स्थानीय किसानों को लाभ से बाहर कर सकता है।

MSSRF ने दलील दी कि श्री फार्मर्स प्रोड्यूसर्स नाम की निजी कंपनी द्वारा किए गए आवेदन से संभावित रूप से स्थानीय किसानों को लाभ से बाहर रखा जा सकता है। आरोप में कहा गया है कि एक बार जीआई टैग मिल जाने के बाद आवेदक कंपनी को काला जीरा चावल की खेती और मार्केटिंग करने का विशेष अधिकार मिल जाएगा, जिससे संभावित रूप से जिले के अन्य किसानों को इस चावल की पहुंच से वंचित कर दिया जाएगा।

MSSRF, जेपोर के निदेशक प्रशांत परिदा ने कहा, ‘काला जीरा चावल कोरापुट जिले का एक विशिष्ट उत्पाद है और जीआई टैग के लिए आवेदन किसी सरकारी एजेंसी द्वारा किया जाता है न की निजी संगठन ऐसा करता है। एक बार जब किसी निजी संगठन को जीआई टैग मिल जाता है तो आवेदक कंपनी एकमात्र लाभार्थी होगी क्योंकि उसे इसकी खेती का अधिकार मिल जाएगा, जिससे इस किस्म के चावल उगाने वाले किसानों को नुकसान होगा।’

उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में काम करने वाले जीआई अधिकारियों के समक्ष हम जल्द ही आपत्ति दर्ज कराएंगे।’

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First Published - September 7, 2023 | 6:02 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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