निजीकरण नहीं, मुद्रीकरण: सरकार बनाएगी और मालिक रहेगी, निजी कंपनियां सिर्फ चलाएंगी प्रोजेक्ट्स
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के अपने बजट भाषण में बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि सरकार संपत्तियों का मालिकाना हक (स्वामित्व) नहीं बेच रही है, बल्कि सिर्फ उनके इस्तेमाल के ‘अधिकारों’ से कमाई करेगी। यानी सरकार सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों के परिचालन का अधिकार निजी कंपनियों को दे रही है, लेकिन […]
सीईआर, यूसीएफ और नगर निगम बॉन्ड: भारत के शहरी विकास में फाइनैंसिंग की नई दिशा
सिटी इकनॉमिक रीजन (सीईआर), अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) और नगर निगम बॉन्ड की ओर बढ़ता रुझान इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि शहरों को केवल फंडिंग से आगे बढ़कर फाइनैंसिंग की दिशा में ले जाया जा रहा है। फाइनैंसिंग के लिए पुनर्भुगतान क्षमता, जोखिम मूल्य का निर्धारण, पारदर्शी अंकेक्षण और राजस्व संबंधी […]
PPP मॉडल का पुनर्जीवन: भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए रीसेट जरूरी
भारत का सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल एक स्पष्ट सबक देता है। जब इन परियोजनाओं की डिजाइन संतुलित होती है और इनका क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से किया जाता है तब वे बुनियादी ढांचा के विकास को नई गति दे सकती हैं लेकिन यदि इनकी संरचना त्रुटिपूर्ण हो तो वही परियोजनाएं वर्षों तक वृद्धि की रफ्तार को […]
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर फिर से जोर, निजी भागीदारी को मिले बढ़ावा
बुनियादी ढांचे से जुड़े खर्च को एक बार फिर से आर्थिक विकास के इंजन के तौर पर देखा जाना चाहिए क्योंकि इसका गुणक प्रभाव बहुत अधिक होता है। सीधे शब्दों में कहें तो बुनियादी ढांचे में लगाया गया प्रत्येक एक रुपया अर्थव्यवस्था में लगभग 3 रुपये की वृद्धि करता है। यह आंकड़ा अपने आप में […]
लॉजिस्टिक लागत में सुधार: आर्थिक बदलाव की नई कहानी
भारत में परिवहन एवं ढुलाई व्यवस्था (लॉजिस्टिक्स) पर लागत पिछले दशकों से एक अक्रियाशील आर्थिक वास्तविकता मानी जाती थी। अनुमान के अनुसार यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 13-14 प्रतिशत थी जो भारत के समकक्ष देशों की तुलना में बहुत अधिक थी। इस पहलू को अक्सर ‘छिपा हुआ कर’ बताया जाता था जिसने भारतीय विनिर्माण […]
बुनियादी ढांचा: शहरी चुनौती कोष के लिए परियोजना का चयन
भारत के नए 1 लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष (यूसीएफ) की घोषणा फरवरी के बजट में की गई थी और इसे जल्द ही शुरू किया जाना है। यह शहरी क्षेत्र की फंडिंग में केंद्र की भूमिका में एक मौलिक बदलाव को दर्शाता है जिसके तहत आवंटन वाले मॉडल से हटकर एक ‘चुनौती कोष’ […]
अगला गेम चेंजर: हाई-स्पीड रेल 15 साल में अर्थव्यवस्था में जोड़ सकती है ₹60 लाख करोड़
भारत में एक और विशाल बुनियादी ढांचा तैयार हो रहा है, जो अर्थव्यवस्था को उसी तरह बदल कर रख देगा जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना और नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित कार्यक्रमों ने किया है। नि:संदेह यहां बात हाई-स्पीड रेल के बारे में हो रही है। क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर भारत का प्रति […]
Urban Challenge Fund: शहरी चुनौती फंड को मजबूत बनाने के लिए सात जरूरी कदम
भारत के शहर संभावनाओं से भरपूर हैं मगर धन जुटाने के पुराने तौर-तरीकों और अत्यधिक दबाव का सामना कर रहे बुनियादी ढांचे के कारण अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रगति नहीं कर पा रहे हैं। वर्ष 2011 और 2018 के बीच शहरी उपयोगिता ढांचे (रियल एस्टेट को छोड़कर) पर पूंजीगत व्यय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) […]
कोयला, स्वच्छ वायु और भारत के उत्सर्जन मानकों पर एक स्वागत योग्य समाधान
अपनी नीति में व्यापक परिवर्तन करते हुए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसी माह 11 जुलाई को कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन (एफजीडी) सिस्टम के लिए 2015 के अपने आदेश में संशोधन किया है। वैज्ञानिक अध्ययनों और हितधारकों से परामर्श के बाद नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें क्षेत्र-विशेष […]
नाभिकीय ऊर्जा के लिए निजी पूंजी की दरकार
होमी भाभा ने 1950 के दशक में जब भारत के परमाणु कार्यक्रम की कल्पना की थी तब उनका सपना काफी बड़ा था: स्वदेशी तरीके से ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनना। इसके लिए उन्होंने प्रेशराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और आखिरकार देश के बड़े थोरियम भंडार का उपयोग करने वाली थोरियम आधारित प्रणाली […]









