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लेखक : विनायक चटर्जी

आज का अखबार, लेख

निजी इंफ्रा निवेश की वापसी को संस्थागत रूप से तैयार हो भारत

पीपीपी यानी सार्वजनिक-निजी भागीदारी अब देश के बुनियादी ढांचा विकास में निजी निवेश का संकेत देने वाला एक स्वीकृत संक्षिप्त रूप बन चुका है। भारत के ब्रिटिशकालीन बुनियादी ढांचे के निर्माण में कई परियोजनाएं निजी उपक्रमों के रूप में सामने आई थीं। गारंटीशुदा रिटर्न वाले स्टर्लिंग बॉन्ड्स ने रेलमार्ग, ट्रामवे और बिजली वितरण को वित्तपोषित […]

आज का अखबार, लेख

ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला से गैस बनाना भारत की नई राष्ट्रीय प्राथमिकता

दशकों तक भारत में कोयले की एक ही भूमिका रही कि इसे जलाकर बिजली बनाई जाए। आज वही कोयला उर्वरक, इस्पात के कच्चे माल, परिवहन ईंधन और हाइड्रोजन में बदल सकता है। इसे अब सिर्फ ऊर्जा स्रोत के रूप में नहीं बल्कि एक रणनीतिक औद्योगिक कच्चे माल के रूप में देखा जा रहा है। यह […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

निजीकरण नहीं, मुद्रीकरण: सरकार बनाएगी और मालिक रहेगी, निजी कंपनियां सिर्फ चलाएंगी प्रोजेक्ट्स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के अपने बजट भाषण में बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि सरकार संपत्तियों का मालिकाना हक (स्वामित्व) नहीं बेच रही है, बल्कि सिर्फ उनके इस्तेमाल के ‘अधिकारों’ से कमाई करेगी। यानी सरकार सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों के परिचालन का अधिकार निजी कंपनियों को दे रही है, लेकिन […]

आज का अखबार, लेख

सीईआर, यूसीएफ और नगर निगम बॉन्ड: भारत के शहरी विकास में फाइनैंसिंग की नई दिशा

सिटी इकनॉमिक रीजन (सीईआर), अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) और नगर निगम बॉन्ड की ओर बढ़ता रुझान इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि शहरों को केवल फंडिंग से आगे बढ़कर फाइनैंसिंग की दिशा में ले जाया जा रहा है। फाइनैंसिंग के लिए पुनर्भुगतान क्षमता, जोखिम मूल्य का निर्धारण, पारदर्शी अंकेक्षण और राजस्व संबंधी […]

आज का अखबार, लेख

PPP मॉडल का पुनर्जीवन: भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए रीसेट जरूरी

भारत का सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल एक स्पष्ट सबक देता है। जब इन परियोजनाओं की डिजाइन संतुलित होती है और इनका क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से किया जाता है तब वे बुनियादी ढांचा के विकास को नई गति दे सकती हैं लेकिन यदि इनकी संरचना त्रुटिपूर्ण हो तो वही परियोजनाएं वर्षों तक वृद्धि की रफ्तार को […]

आज का अखबार, लेख

बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर फिर से जोर, निजी भागीदारी को मिले बढ़ावा

बुनियादी ढांचे से जुड़े खर्च को एक बार फिर से आर्थिक विकास के इंजन के तौर पर देखा जाना चाहिए क्योंकि इसका गुणक प्रभाव बहुत अधिक होता है। सीधे शब्दों में कहें तो बुनियादी ढांचे में लगाया गया प्रत्येक एक रुपया अर्थव्यवस्था में लगभग 3 रुपये की वृद्धि करता है। यह आंकड़ा अपने आप में […]

आज का अखबार, लेख

लॉजिस्टिक लागत में सुधार: आर्थिक बदलाव की नई कहानी

भारत में परिवहन एवं ढुलाई व्यवस्था (लॉजिस्टिक्स) पर लागत पिछले दशकों से एक अक्रियाशील आर्थिक वास्तविकता मानी जाती थी। अनुमान के अनुसार यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 13-14 प्रतिशत थी जो भारत के समकक्ष देशों की तुलना में बहुत अधिक थी। इस पहलू को अक्सर ‘छिपा हुआ कर’ बताया जाता था जिसने भारतीय विनिर्माण […]

आज का अखबार, लेख

बुनियादी ढांचा: शहरी चुनौती कोष के लिए परियोजना का चयन

भारत के नए 1 लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष (यूसीएफ) की घोषणा फरवरी के बजट में की गई थी और इसे जल्द ही शुरू किया जाना है। यह शहरी क्षेत्र की फंडिंग में केंद्र की भूमिका में एक मौलिक बदलाव को दर्शाता है जिसके तहत आवंटन वाले मॉडल से हटकर एक ‘चुनौती कोष’ […]

आज का अखबार, लेख

अगला गेम चेंजर: हाई-स्पीड रेल 15 साल में अर्थव्यवस्था में जोड़ सकती है ₹60 लाख करोड़

भारत में एक और विशाल बुनियादी ढांचा तैयार हो रहा है, जो अर्थव्यवस्था को उसी तरह बदल कर रख देगा जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना और नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित कार्यक्रमों ने किया है। नि:संदेह यहां बात हाई-स्पीड रेल के बारे में हो रही है। क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर भारत का प्रति […]

आज का अखबार, लेख

Urban Challenge Fund: शहरी चुनौती फंड को मजबूत बनाने के लिए सात जरूरी कदम

भारत के शहर संभावनाओं से भरपूर हैं मगर धन जुटाने के पुराने तौर-तरीकों और अत्यधिक दबाव का सामना कर रहे बुनियादी ढांचे के कारण अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रगति नहीं कर पा रहे हैं। वर्ष 2011 और 2018 के बीच शहरी उपयोगिता ढांचे (रियल एस्टेट को छोड़कर) पर पूंजीगत व्यय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) […]

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