facebookmetapixel
Advertisement
REITs vs FDs vs equities: टैक्स कटने के बाद किस निवेश में ज्यादा रिटर्न बचेगा?Trade Deficit: जुलाई में भारत का व्यापार घाटा 6 महीने के हाई पर, 31.98 अरब डॉलर पहुंचाआधार कार्ड से घर बैठे मिनटों में बनाएं अपना ई-पैन: जानें स्टेप-बाय-स्टेप पूरा ऑनलाइन प्रोसेससाइबर सुरक्षा पर साथ आए भारत-इजरायल, AI और रैंसमवेयर हमलों से निपटने के लिए बढ़ाएंगे सहयोगएयर इंडिया की सख्ती, हर पायलट को एक बार देना होगा साइकोएक्टिव पदार्थों का टेस्टभारत का कमोडिटी में बढ़ रह दबदबा! ग्लोबल इंटीग्रेशन की जरूरत; ईयरबुक भी हुई लॉन्चQ1 नतीजों से उछला टाटा ग्रुप का ये शेयर, पैसे लगाएं या नहीं? ब्रोकरेज को 47% तक तेजी की उम्मीदगाजा कैपिटल का IPO अगले हफ्ते खुलेगा, कंपनी ने तय किया प्राइस बैंड; ₹550 करोड़ जुटाने की योजनाकौन संभालेगा टाटा संस की कमान? चंद्रा के उत्तरा​धिकारी के लिए टाटा ट्रस्ट्स बनाएगा चयन समितिआईनॉक्स क्लीन एनर्जी में मोतीलाल ओसवाल समूह का बड़ा दांव, ₹1,500 करोड़ का करेगा निवेश

लेखक : विजय केलकर

आज का अखबार, लेख

जीएसटी का मूल सिद्धांत फेल, अगर इनपुट टैक्स क्रेडिट सिस्टम नहीं हो सरल

अप्रत्यक्ष कराधान व्यवस्था अगर त्रुटिपूर्ण हो तो यह आर्थिक वृद्धि की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाता है। हम इस प्रणाली को दुरुस्त करने के शुरुआती प्रयासों का भी हिस्सा थे जब मूल्य वर्द्धित कर (वैट) की तरफ कदम बढ़ाया गया था जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्थापित अप्रत्यक्ष कर धारणा थी। वैट को […]

आज का अखबार, लेख

बेहतर जीएसटी की ओर: नए सुधार अहम, लेकिन और कदम जरूरी

देश के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर बहस तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक चार बिंदुओं वाली आलोचना में कहा है: मौजूदा व्यवस्था बहुत अधिक जटिल है और इसकी वजह कई दरों का होना है, यह एमएसएमई को हतोत्साहित कर रही है, राजकोषीय संघवाद को क्षति पहुंचा रही है […]

आज का अखबार, लेख

नीट जैसी समस्याओं की गहरी हो पड़ताल

देश में नीट को लेकर मचे हो हल्ले के बीच ध्यान देने वाली बात यह है कि हमें सिर्फ तात्कालिक लक्षणों का समाधान नहीं करना चाहिए। बता रहे हैं अजय शाह और विजय केलकर राष्ट्रीय अर्हता सह पात्रता परीक्षा (NEET) के संचालन में नाकामी ने काफी नाराजगी पैदा की है। यह सोचना संभव है कि […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: देश में ऊर्जा बदलाव की गति में तेजी

विकासशील देशों को अगर विशुद्ध शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना है तो कम कार्बन उत्सर्जन वाले तरीके ही बेहतर रणनीति माने जाएंगे। बता रहे हैं विजय केलकर और राहुल पई पाणंदीकर भविष्य में ऊर्जा को लेकर बनने वाले किसी भी परिदृश्य में भारत प्राथमिक ऊर्जा खासकर तेल एवं गैस का विशुद्ध आयातक बना रहेगा। […]

Advertisement
Advertisement