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लेखक : तमाल बंद्योपाध्याय

आज का अखबार, लेख

कर्णाटका बैंक की कहानी: 101वीं वर्षगांठ के जश्न से इस्तीफों तक, अहंकार और संस्कृतियों का टकराव

कर्णाटका बैंक ने 18 फरवरी, 2025 को अपनी 101वीं वर्षगांठ बड़े धूमधाम से मनाई और इस कार्यक्रम में मानवतावादी और आध्यात्मिक शिक्षक मधुसूदन साई का उद्बोधन हुआ। इस अवसर पर कर्नाटक संगीत कार्यक्रम का आयोजन भी कराया गया। इस मौके पर बैंक के चेयरमैन पी प्रदीप कुमार, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्रीकृष्णन […]

आज का अखबार, लेख

माइक्रोफाइनैंस उद्योग की नई चुनौतियां: टिके रहने को फंड की जरूरत, बैंकों को कदम उठाने होंगे

भारत में सूक्ष्म वित्त उद्योग (माइक्रोफाइनैंस) कुछ समय पहले तक फंसे कर्ज की बढ़ती तादाद की समस्या से जूझ रहा था। अभी इस समस्या पर काबू पाया ही गया था कि एक और बड़ी चुनौती सामने आ गई है। कुछ छोटे माइक्रोफाइनैंस ऋणदाताओं को बैंकों से लिए गए कर्ज चुकाने में परेशानी हो रही है। […]

आज का अखबार, लेख

नीतिगत स्थिरता बरकरार: क्या यह रिजर्व बैंक की दर कटौती चक्र का अंत है?

फरवरी से जून के दरमियान तीन चरणों में नीतिगत रीपो दर में एक फीसदी की कटौती करने के बाद रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने बुधवार को दरों को 5.5 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। ‘तटस्थ’ मौद्रिक नीति संबंधी रुख को भी अपरिवर्तित रखा गया। तीन दिवसीय बैठक के […]

आज का अखबार, लेख

अगस्त में मुद्रास्फीति में गिरावट के बावजूद मौद्रिक नीति में दर कटौती की बजाय स्थिरता की संभावना

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक शुरू हो गई है। अर्थशास्त्री एवं बाजार के जानकार इस मौद्रिक नीति से जुड़ी दो महत्त्वपूर्ण बातों पर एक राय रखते हैं। पहली बात, आरबीआई इस वर्ष के लिए मुद्रास्फीति संबंधी अपने अनुमानों में कमी करेगा और दूसरी बात यह कि आर्थिक वृद्धि से […]

आज का अखबार, लेख

असहनीय दबाव, अपेक्षाओं का बोझ: सरकारी बैंकों में तनाव और अवसाद का माहौल

जब लक्ष्य हासिल करना मुश्किल लगता है और वरिष्ठ प्रबंधन तथा ग्राहक दोनों अधीर होते हैं ऐसे में लगातार डर का माहौल बने रहना लाजिमी है और हर बैंकर में इस तरह के प्रतिकूल माहौल में भी टिके रहने और कामयाब होने की हिम्मत नहीं होती। यह एक ऐसी कहानी है जो प्रमाणिक नहीं है। […]

आज का अखबार, लेख

RBI की चुनौतियाँ: तंत्र में कितनी हो नकदी — उपयुक्त, पर्याप्त या बहुत अधिक?

सैमुअल टेलर कॉलरिज की एक कविता ‘द राइम ऑफ द ऐन्शंट मैरनर’ की कुछ पंक्तियों में नाविकों की व्यथा का जिक्र है कि वे समुद्र के बीच होते हुए भी प्यास से मर रहे हैं क्योंकि उनके चारों ओर खारा पानी है। आजकल अगर आप देनदारियों का प्रबंधन करने वाले वरिष्ठ बैकरों के केबिन की […]

आज का अखबार, लेख

सरकारी बैंक के कार्यकारी निदेशक की पदावनति का दिलचस्प मामला

गत 24 जून को वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने एक अधिसूचना जारी की: ‘केंद्र सरकार वित्तीय सेवा विभाग की अधिसूचना क्रमांक 4/3/2023-बीओ.1 दिनांक 27 मार्च 2024 के तहत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक (ईडी) के रूप में ‘ए’ (नाम गोपनीय) की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द करती है और उन्हें […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: डिजिटल भुगतान- UPI, AePS और PPI से मिल रहा आर्थिक सशक्तिकरण को बल

भारतीय रिजर्व बैंक ने जून के आखिरी हफ्ते में आधार के जरिये भुगतान प्रणाली (एईपीएस) को मजबूत करने के दिशानिर्देश जारी किए। हम सब यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को तो जानते हैं मगर एईपीएस क्या है? यह यूपीआई का बड़ा भाई है, जिसे केंद्र सरकार यूपीआई से पांच साल पहले 2011 में लाई थी। बैंक […]

आज का अखबार, लेख

बेमिसाल 70 साल: भारत की आर्थिक प्रगति का प्रतिबिंब रहा है SBI

देश का सबसे बड़ा कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) 1 जुलाई को अपना 70वां स्थापना दिवस मना रहा है। एसबीआई को इस अवसर पर बहुत शुभकामनाएं! भारतीय अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ और परिसंपत्ति के आधार पर दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल एकमात्र भारतीय बैंक एसबीआई देश के हर तीन व्यक्तियों में एक […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: मुनाफे की पटरी पर लौटे बैंक, अधिकांश की कमाई बढ़ी; मगर चुनौतियां बरकरार

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही अगले सप्ताह समाप्त होने वाली है। ऐसे में वक्त है कि हम इस बात पर नज़र डालें कि वित्त वर्ष 2024-25 की आखिरी तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2025 में निजी और सरकारी बैंकों का प्रदर्शन कैसा रहा। इस दौरान सात निजी और एक सरकारी बैंक को छोड़कर सभी का परिचालन […]

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