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लेखक : तमाल बंद्योपाध्याय

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: Silence, sound, action: केन्द्रीय बैंकिंग की कामयाबी के लिए क्या है जरूरी?

करीब दशक भर पहले सितंबर 2015 में भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत रीपो दर में 50आधार अंकों की कटौती की थी। यह अनुमान से दोगुनी कटौती थी। यह तीन साल की सबसे बड़ी कटौती थी और इसके बाद रीपो दर घटकर 6.75 फीसदी रह गई। यह साढ़े चार सालों का न्यूनतम स्तर था। मौद्रिक नीति […]

आज का अखबार, लेख

सतर्कता जांच: सरकारी बैंकरों के सिर पर लटकती तलवार

‘सतर्कता’ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के कर्मचारियों के लिए एक भयावह शब्द है। ऐसे भी उदाहरण हैं जहां उच्चाधिकारी इस भय का दुरुपयोग करते हैं। गत वर्ष राजस्थान में एक सरकारी बैंक के मुख्य प्रबंधक को सेवानिवृत्ति के एक दिन पहले नोटिस दिया गया। इसमें उन पर 2022 में एक रियल एस्टेट परियोजना की […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: अपनी चुटकियों से मौद्रिक नीति की ऊब दूर करते केंद्रीय बैंकर

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की इस हफ्ते होने वाली बैठक में एक बार फिर ब्याज दर कटौती की अटकलें लगाई जा रही हैं। एमपीसी की पिछली दो बैठकों में रीपो दर को 6.5 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया गया था। अप्रैल में रिजर्व बैंक ने अपने नीतिगत रुख को […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग साख: जीवन ज्योति, सुरक्षा बीमा कितना फायदेमंद?

हम सभी जानते हैं कि देश में विभिन्न बैंक शाखाओं पर बीमा एवं म्युचुअल फंड योजनाएं कैसे गलत तरीके से और ग्राहकों को पूरी बात बताए बिना बेची जाती हैं। मगर यह कहानी का केवल एक पहलू है। इसका दूसरा पहलू यह है कि इसमें पीड़ित व्यक्ति ज्यादातर वे लोग होते हैं जो सामाजिक-आर्थिक रूप […]

आज का अखबार, लेख

जब DFS Secretary बन गए राजा विक्रमादित्य

किंवदंती है कि गुप्त वंश के राजा विक्रमादित्य अक्सर अपनी प्रजा के कल्याण और उनकी स्थितियों का जायजा लेने के लिए आम आदमी की वेशभूषा में उनके बीच जाते थे। हाल में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव भी बैंकों की ग्राहक सेवाओं का जायजा लेने के लिए विक्रमादित्य की भूमिका में […]

आज का अखबार, लेख

क्या हम बीमा क्रांति की दहलीज पर खड़े हैं

अप्रैल महीने की शुरुआत में लंदन में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत-ब्रिटेन निवेशक गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के वित्तीय क्षेत्र की एक शानदार तस्वीर पेश की। उन्होंने बताया कि देश का बाजार पूरी दुनिया के लिए खुला है और यहां पर्याप्त अवसर व महत्वाकांक्षाओं के साथ ही सुधार की पूरी गुंजाइश […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग क्षेत्र में गड़बड़ियों का कब थमेगा सिलसिला

पिछले सप्ताह 28  अप्रैल को इंडसइंड बैंक लिमिटेड के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (डिप्टी सीईओ)  ने इस्तीफा दे दिया। एक दिन बाद इसके प्रबंध निदेशक और सीईओ ने कई चूक और कृत्यों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना पद छोड़ दिया। बैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी ने जनवरी में ही अपना इस्तीफा दे दिया था। […]

आज का अखबार, लेख

स्वास्थ्य बीमा को ‘सेहतमंद’ बनाने की जरूरत

भारत में स्वास्थ्य बीमा के दावे खारिज होने का डर पॉलिसीधारकों में बढ़ता जा रहा है। दूसरी तरफ, बीमा उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि कम से कम 10 फीसदी स्वास्थ्य बीमा दावे फर्जी होते हैं। उनके अनुसार इससे स्वास्थ्य बीमा उद्योग को हर साल 12,000 करोड़ रुपये नुकसान होता है। सूत्रों के […]

आज का अखबार, लेख

पहले मुर्गी या अंडा, कई विभागों के लिए सवाल

पहले मुर्गी आई या अंडा? इस सवाल का जवाब ऑस्ट्रेलियाई विज्ञान अकादमी के मुताबिक स्पष्ट हो गया है जिसका कहना है कि एमनियोटिक अंडा करीब 34 करोड़ साल पहले आया और पहली मुर्गी करीब 58,000 वर्ष पहले अस्तित्व में आई। इसलिए यह मानना सुरक्षित दांव है कि पहले अंडा आया। लेकिन आज हम जिस पर […]

आज का अखबार, लेख

सरकारी बैंकों में प्रमोशन की उलझन: नियमों के आगे बेबस होती प्रतिभा

मार्च का महीना सूचीबद्ध बैंकों के कर्मचारियों के लिए मुश्किल महीना होता है क्योंकि नियामक और निवेशक दोनों उनकी बैलेंसशीट पर कड़ी नजर रखते हैं, मसलन बैंक की ऋण परिसंपत्ति में कितनी वृद्धि हुई और मौजूदा संदर्भ में जमा पोर्टफोलियो कैसा रहा है। मुनाफा, परिसंपत्ति की गुणवत्ता और अन्य व्यावसायिक मापदंड जैसे कि शुद्ध ब्याज […]

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