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लेखक : टी एन नाइनन

आज का अखबार, लेख, विशेष

1991 के आर्थिक सुधारों के 35 साल: उपलब्धियां बड़ी, लेकिन अधूरे एजेंडे अब भी भारत के सामने

कई लोग 1991 के सुधारों को भारत की आर्थिक उड़ान की शुरुआत मानते हैं। आज से 35 साल पहले 24 जुलाई, 1991 को अपने बजट भाषण में मनमोहन सिंह ने विक्टर ह्यूगो का कथन दोहराया, ‘धरती पर कोई भी ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती, जिसका वक्त आ गया है’ और साथ में कहा, […]

आज का अखबार, लेख

तेल के झटकों से देश को कैसे मिले निजात? नवीकरणीय ऊर्जा बन सकती है भारत का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच

भारत समेत पूरी दुनिया ने इस घोषणा से राहत की सांस ली होगी कि अमेरिका और ईरान समझौते के करीब हैं। उम्मीद है कि इससे युद्धविराम बढ़ेगा और होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खुलेगा। इस आलेख को लिखे जाते समय कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं थी और निश्चित रूप से यह नहीं कहा जा सकता है कि […]

आज का अखबार, लेख

मैक्रो और संरचनात्मक बाधाओं के बीच तेज विकास की उम्मीदें बरकरार

लगातार तेज वृद्धि के सालों ने टीकाकारों को यह सुझाने के लिए प्रोत्साहित किया कि अर्थव्यवस्था लंबे समय तक तेज वृद्धि के पथ पर बनी रह सकती है। इसका कारण यह है कि पिछले पांच वित्त वर्षों (2021-26) में, वर्तमान वर्ष के अग्रिम अनुमान को ध्यान में रखते हुए, औसत वृद्धि शानदार 8.1 प्रतिशत रही […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

भारत को सिर्फ क्लासरूम में नहीं, पावर सेक्टर में भी ज्यादा इंजीनियरों की जरूरत

स्टैनफोर्ड के हूवर हिस्ट्री लैब के डैन वांग ने अपनी पुस्तक ‘ब्रेकनेक: चाइनाज क्वेस्ट टु इंजीनियर द फ्यूचर’ के माध्यम से व्यापक तौर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। इसमें वे तर्क देते हैं कि चीन एक ‘इंजीनियरिंग राज्य’ है, जबकि अमेरिका ‘वकीलों का राज्य’ है। यह विश्लेषण नया नहीं है। द इकनॉमिस्ट के […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप की दादागीरी के बीच भारत को खुद को कोने में धकेलने से बचना होगा

आठ जुलाई 1853 को कमोडोर मैथ्यू पेरी दो भाप इंजन वाले जहाजों और दो पाल वाली छोटी नावों के साथ टोक्यो की खाड़ी में पहुंचे। जब उन्हें विदेशी पोतों की इजाजत वाले नागासाकी बंदरगाह जाने का आदेश दिया गया तो उन्होंने उसे नकार दिया। इसी तरह उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को अपने पोतों पर नहीं आने […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप का नया कार्यकाल और बदलती दुनिया

डॉनल्ड ट्रंप एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं और दुनिया बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। दूसरे विश्व युद्ध से ही सबसे शक्तिशाली देश भी राष्ट्रीय संप्रभुता को सीमित करने के इच्छुक थे। वे वैश्विक नियमों और सहकारी कदमों के पालन के लिए सहमत थे। ऐसे नियम कई मामलों […]

आज का अखबार, भारत, राजनीति

Manmohan Singh: हर भिड़ंत में दिखाई समझ और बुद्धिमत्ता की गहराई

मैं पहली बार मनमोहन सिंह से 1981 में मिला। दिल्ली में बिजनेस स्टैंडर्ड के संवाददाता के तौर पर योजना आयोग के सदस्य-सचिव से मिलने मैं अपने ब्यूरो प्रमुख के साथ गया था। वे उनके पुराने मित्र थे और जैसे ही हम उस बड़े कार्यालय में सोफा पर बैठे, मेरे बॉस ने पाया कि अच्छी तरह […]

आज का अखबार, लेख

दुनिया पर कमजोर होती अमेरिका और पश्चिमी देशों की पकड़

तकनीकी एवं कूटनीतिक मोर्चे पर चीन और रूस का दबदबा बढ़ने से वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव साफ दिख रहा है। विश्लेषण कर रहे हैं टी एन नाइनन पश्चिम देशों और शेष दुनिया के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देश अब भी ताकतवर अवश्य […]

आज का अखबार, संपादकीय

साप्ताहिक मंथन: कारोबारी जगत में भय और प्रसन्नता

वर्तमान भारतीय कारोबारी जगत का विरोधाभास यह है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चुनावी जीतों पर शेयर बाजार में अत्यंत प्रसन्नता का माहौल है जबकि कई कारोबारी दिल्ली में पार्टी की सरकार को लेकर सशंकित भी हैं। चार वर्ष पहले राहुल बजाज (अब हमारे बीच नहीं) ने अमित शाह से कहा था कि उद्योगपति […]

आज का अखबार, लेख

साप्ताहिक मंथन: रेलवे के लिए नई कारोबारी योजना

उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस दिल्ली से लखनऊ तक 550 किलोमीटर के सफर के लिए 822 रुपये किराया लेती है, यानी 1.49 रुपये प्रति किलोमीटर। रेल से यही सफर लगभग आधी कीमत यानी 432 रुपये में तय किया जा सकता है। तीसरे दर्जे के वातानुकूलित डिब्बे में आप यही सफर 755 रुपये में आराम से […]

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