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लेखक : नौशाद फोर्ब्स

आज का अखबार, लेख

आत्मनिर्भरता से आगे: भारत के भविष्य को क्यों परस्पर निर्भरता आकार देगी?

एक पुराना चीनी शाप कहता है, ‘ईश्वर करे तुम्हारा दिलचस्प समय आए।’ यह कहावत सुनने वाले के लिए ‘अव्यवस्था, अनिश्चितता और उथल-पुथल’ की कामना करती है। यही पिछले छह हफ्तों में दुनिया का सार है, जब अमेरिका और इजरायल ने जंग छेड़ी। इस युद्ध ने गैस की कमी, व्यापक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान और तेल की […]

आज का अखबार, लेख

विकसित भारत का रास्ता: नवाचार, शिक्षा और रचनात्मक विनाश से आएगी तेज आर्थिक प्रगति

पिछले वर्ष अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार जोएल मोकिर, फिलिप एगियों और पीटर हॉविट को दिया गया। उन्हें यह समझाने के लिए पुरस्कृत किया गया कि नवाचार कैसे आर्थिक वृद्धि को गति प्रदान करता है। डॉ. मोकिर जिन्हें आधा पुरस्कार दिया गया उन्हें उन किताबों के लिए जाना जाता है जिनमें उन्होंने समझाया है कि कैसे […]

आज का अखबार, लेख

डॉनल्ड ट्रंप के साथ आर्थिक युद्ध जीतने के लिए भारत को जापान से सीखना चाहिए

डॉनल्ड ट्रंप की शुल्क संबंधी धमकियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समन्वय की राह उपयुक्त होती। परंतु दुनिया ने ऐसा नहीं किया और यूरोपीय संघ, जापान और अन्य देशों ने उसके साथ ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर किए जो अमेरिका के लिए अधिक फायदेमंद थीं, उनके लिए कम। हमारे देश की बातचीत अब तक […]

आज का अखबार, लेख

RDI योजना: नवाचार के लिए सही फर्मों का चुनाव अहम

हाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शोध, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत देश के उद्योग जगत को 1 लाख करोड़ रुपये का आवंटन करने की बात कही गई है। इसमें से 20,000 करोड़ रुपये की राशि इस वर्ष के बजट में तय है। यह फंड किस प्रकार वितरित […]

लेख

वैश्विक व्यापार और ट्रंप शुल्क के प्रभाव

बीते दो सप्ताह के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सभी देशों के साथ कारोबारी जंग छेड़ दी। सिंगापुर जैसा देश जिसने बहुत सावधानी के साथ अपने और अमेरिका के बीच के कारोबार को संतुलित किया था, उसके साथ घाटे की भरपाई करने के लिए 10 फीसदी का टैरिफ लगा दिया गया। इससे फर्क नहीं […]

आज का अखबार, लेख

वर्ष 2025 के लिए तीन तमन्नाएं

अगर उद्योग, आर्थिक नीति तथा राजनीति मददगार रहीं तो अगली चौथाई सदी भारत की हो सकती है। उद्योग जगत को नवाचार में निवेश करते हुए विनिर्माण पर ध्यान देना चाहिए। हमारी आर्थिक नीति को उत्पादकता में दीर्घकालिक वृद्धि पर तथा इसकी जड़ यानी ढांचागत बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। हमारी राजनीतिक बहस भी विचारों के […]

आज का अखबार, लेख

अमेरिका का विकल्प साथ रखने की नीति

वैश्विक विनिर्माण में चीन का दबदबा है। फिलहाल वह वैश्विक उत्पादन में 32 फीसदी का हिस्सेदार है। अमेरिका, जापान, जर्मनी, भारत और दक्षिण कोरिया क्रमश: 16, 7, 5, 3 और 3 फीसदी के हिस्सेदार हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कारोबारी है और अब तक वह दुनिया में विनिर्मित वस्तुओं का सबसे बड़ा निर्यातक भी […]

आज का अखबार, लेख

रतन टाटा और क्रिस्टोफर बेनिंगर…भारत के दो महान वास्तुकारों की विदाई

रतन टाटा और क्रिस्टोफर बेनिंगर के सौंदर्य बोध और उनकी दृष्टि ने भारत को पहले की तुलना में सुंदर जगह बनाया। बता रहे हैं नौशाद फोर्ब्स इस महीने दो महान भारतीयों रतन टाटा और क्रिस्टोफर बेनिंगर का निधन हो गया। क्रिस्टोफर बेनिंगर ने हार्वर्ड से वास्तुकला की डिग्री ली थी और वह देश के सबसे […]

आज का अखबार, लेख

भारतीय उद्योग जगत को R&D निवेश बढ़ाने की जरूरत: वैश्विक प्रतिस्पर्धा और नवाचार में सुधार के लिए जरूरी कदम

मैंने अक्सर इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय उद्योग जगत को शोध एवं विकास (आरऐंडडी) पर अधिक रकम खर्च करनी चाहिए। भारतीय उद्योग जगत अपने आंतरिक आरऐंडडी में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल 0.3 प्रतिशत निवेश करता है, जबकि दुनिया भर में यह औसत 1.5 प्रतिशत है। आरऐंडडी में सबसे अधिक निवेश […]

आज का अखबार, लेख

नौकरियां और विकास: अच्छी और बुरी खबरें

हमारी आकांक्षा 2047 तक विकसित देश बनने की है। किसी विकसित या उच्च आय वाले देश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी करीब 14,000 डॉलर होता है यानी 2,700 डॉलर के हमारे वर्तमान प्रति व्यक्ति जीडीपी के पांच गुने से भी अधिक। उस स्तर तक पहुंचने के लिए हमें अगली चौथाई सदी तक […]

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