फूड डिलिवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ काम करने वाले गिग वर्कर्स ने नए साल की पूर्व संध्या पर एक और हड़ताल करने की योजना बनाई है। मांग पर भोजन व अन्य वस्तुएं उपलब्ध कराने वाली फर्मों के लिए क्रिसमस और न्यू ईयर का मौका सबसे अधिक बिक्री वाले दिनों में शामिल होते हैं। इससे पहले क्रिसमस के दिन गुरुवार को डिलिवरी रोके जाने से खासकर उत्तर भारत और उसमें भी गुरुग्राम में ज्यादातर ऑनलाइन मंचों के ऑर्डर प्रभावित हुए।
इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के राष्ट्रीय महासचिव और तेलंगाना गिग ऐंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन ने कहा कि यूनियनों ने कम और गिरती कमाई, मनमाने ढंग से दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि, काम करने के अधिक घंटे, सामाजिक सुरक्षा की कमी, अचानक आईडी निष्क्रिय किए जाने और यूनियनों को औपचारिक रूप से मान्यता देने से प्लेटफॉर्म के इनकार के कारण डिलिवरी करने वाले गिग कर्मचारियों ने हड़ताल की थी।
वाऊ! मोमो के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सागर दरयानी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘दिसंबर के अंतिम सात दिन लगभग 13वें महीने की तरह होते हैं और 25 दिसंबर की हड़ताल ने कारोबार बुरी तरह प्रभावित किया। हमारे देशभर में मौजूद 800 आउटलेट्स में से लगभग 100 पर संचालन गड़बड़ा गया, जिससे 20-25 प्रतिशत नुकसान हुआ।’
उन्होंने कहा, ‘फर्म को गुरुग्राम में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जबकि पटना और दिल्ली में लंच का समय खराब रहा। चेन्नई, बेंगलूरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख दक्षिणी बाजार भी प्रभावित हुए। कुछ ऑर्डर हमारे अपने ऐप के माध्यम से दिए गए, जहां हम रैपिडो और पोर्टर जैसे प्लेयर्स के साथ साझेदारी करते हैं। इस अव्यवस्था के कारण लगभग एक चौथाई बिक्री प्रभावित हो गई।’
देश भर में लगभग 100 किचन वाली एक अन्य प्रमुख क्लाउड चेन ने कहा कि गिग कर्मियों की हड़ताल के कारण उनके मंच पर काफी गंभीर असर पड़ा। उद्योग के एक कार्यकारी ने कहा, ‘हमारी लगभग 12 प्रतिशत बिक्री प्रभावित हुई और क्रिसमस जैसे दिन जब वॉल्यूम बहुत अधिक होता है, तो 12 प्रतिशत भी बड़ा नुकसान होता है।’ उन्होंने कहा कि वे जोमैटो और स्विगी के रिलेशनशिप मैनेजर के संपर्क में हैं।
उन्होंने यह भी कहा, ‘एग्रीगेटर्स को इस तरह के संकट से बेहतर तरीके से निपटने की जरूरत है, क्योंकि अंततः ग्राहक और रेस्टोरेंट ही पीड़ित होते हैं। हम साल के अंत में होने वाली बिक्री पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं, क्योंकि इसी मौके पर उनका सबसे ज्यादा कारोबार होता है।’
सलाउद्दीन ने कहा, ‘सेवा प्रदाता प्लेटफॉर्म कंपनियों के साथ कई बैठकें हुईं। कई वार्ताएं और नोटिस दिए गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। प्लेटफॉर्म ने ज्यादातर फैसलों में देरी की या ठोस कार्रवाई के बिना केवल आश्वासन देकर पीछा छुड़ा लिया।’ उन्होंने कहा कि इन बैठकों में उचित और पारदर्शी मूल्य निर्धारण, न्यूनतम कमाई की गारंटी, कमीशन में कमी, सुरक्षा, बीमा और सामाजिक सुरक्षा पर चर्चा की गई, लेकिन नतीजा ठोस नहीं निकला।
इस बीच कुछ क्विक-कॉमर्स फर्मों ने यह भी कहा कि गिग कर्मचारियों की हड़ताल से उनके कारोबार पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ा। हां, कुछ क्षेत्रों में सेवाएं जरूर प्रभावित हुईं। इन फर्मों ने कहा कि 31 दिसंबर को होने वाली हड़ताल को देखते हुए वे प्रोत्साहन राशि बढ़ाएंगे। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के एक अधिकारी ने कहा, ‘वैसे भी दिसंबर के अंतिम पांच दिनों के दौरान प्रोत्साहन राशि अधिक दी जाती है। ठीक वैसे ही जैसे त्योहारी सीजन के दौरान होता है। औसतन गिग वर्कर्स प्रतिदिन 2,000 से 3,000 रुपये कमा लेते हैं, लेकिन दिसंबर अंत के इन कुछ ही व्यस्त दिनों वे प्रतिदिन 5,000 से 7,000 रुपये कमाएंगे।’
अधिकारियों ने कहा कि कंपनियां वैश्विक मानकों का पालन कर रही हैं, डिलिवरी पार्टनर्स को बीमा कवरेज, चिकित्सा देखभाल तक पहुंच, विश्राम सुविधाएं, आपातकालीन सहायता, सुरक्षा प्रशिक्षण और लचीली कार्य व्यवस्था दी रही है। एक ई-कॉमर्स कार्यकारी ने कहा, ‘ये हड़ताल निहित स्वार्थों और राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा से प्रेरित हैं।’