प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ भवन में पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इसका उद्घाटन किया। इससे पहले दोपहर में उन्होंने साउथ ब्लॉक स्थित पीएमओ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक की अध्यक्षता की। सेवा तीर्थ में कामकाज के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं, किसानों, युवाओं और कमजोर वर्गों से संबंधित फाइलों पर हस्ताक्षर किए। इन फाइलों को दिन में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई थी।
सरकार के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को लखपति दीदी के लक्ष्य को दोगुना कर 6 करोड़ करने, कृषि आधारभूत संरचना निधि को दोगुना कर 2 लाख करोड़ रुपये करने और स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स-2.0 के लिए 10,000 करोड़ रुपये का कोष आवंटित करने से संबंधित फाइलों पर हस्ताक्षर किए। सरकार ने कहा कि सेवा तीर्थ से लिए गए प्रधानमंत्री के पहले फैसले सेवा की भावना को दर्शाते हैं और समाज के हर वर्ग को राहत देने वाले हैं। दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा वाली प्रधानमंत्री राहत योजना भी इस मौके पर शुरू की गई।
इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 और 2 का उद्घाटन किया, जो सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास के तहत साउथ ब्लॉक से पीएमओ के स्थानांतरण का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और जितेंद्र सिंह तथा पीएमओ के शीर्ष अधिकारियों के साथ मोटरकेड में सेवा तीर्थ परिसर पहुंचे। यहां उन्होंने पीएमओ, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय परिसर का उद्घाटन किया। मोदी ने पीएमओ में भगवान गणेश की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। उन्होंने नए परिसर में सेवा तीर्थ के पट्टिका का भी अनावरण किया, जिसका आदर्श वाक्य ‘नागरिक देवो भव’ है। सेवा तीर्थ में स्थानांतरण से पीएमओ और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट और नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट के कार्यालय एक साथ आ जाएंगे। ये अभी तक अलग-अलग स्थानों पर चल रहे थे।
पीएमओ को अब सेवा तीर्थ कहा जाएगा, जबकि केंद्रीय सचिवालय भवनों को कर्तव्य भवन का नाम दिया गया है। कई प्रमुख सरकारी कार्यालय और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में दशकों से अलग-अलग स्थानों पर पुराने भवनों में चल रहे थे। नए भवन परिसर आधुनिक और भविष्य के लिहाज से तैयार सुविधाओं से लैस हैं। एक ही जगह सभी प्रशासनिक काम होने से श्रम और वक्त दोनों की बचत होगी। इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र के लिए कई महत्त्वपूर्ण निर्णय साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से लिए गए और यहीं से अनेक नीतियां भी बनीं। ये भवन ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीकों के रूप में बनाए गए थे। इनका उद्देश्य भारत को सदियों तक गुलामी में जकड़ना था। मोदी ने कहा कि नया सेवा तीर्थ परिसर किसी पहाड़ी पर नहीं है, बल्कि जमीन से ज्यादा जुड़ा हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी केंद्र सरकार के कई मंत्रालय दिल्ली में 50 से अधिक अलग-अलग स्थानों से काम कर रहे थे। इन मंत्रालय भवनों के किराए पर हर साल लगभग 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे, जबकि कार्यालयों के बीच 8,000 से 10,000 कर्मचारियों की रोजाना आवाजाही की लागत अलग आर्थिक बोझ डाल रही थी। उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों के निर्माण से ये खर्च कम होंगे और कर्मचारियों का समय बचेगा। उन्होंने कहा कि पुरानी इमारतों में राष्ट्र के लिए संग्रहालय होगा, जिससे यह युग युगीन भारत संग्रहालय का हिस्सा बन जाएगा।
कर्तव्य भवन 1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, कॉर्पोरेट अफेयर्स, शिक्षा, संस्कृति, कानून, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक और आदिवासी जैसे कई प्रमुख मंत्रालय हैं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह बदलाव 13 फरवरी को हुआ, जो 1931 में भारत की आधुनिक राजधानी के रूप में नई दिल्ली के औपचारिक उद्घाटन के 95 साल पूरे होने का प्रतीक है।