जेन जी (Gen Z) और मिलेनियल्स (Millennials) यानी युवा भारतीयों के बीच सोने पर भरोसा मजबूत बना हुआ है, लेकिन इसे खरीदने का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है। स्मिटन पल्सएआई के सर्वे में सामने आया है कि सोने की खरीद अब अधिक व्यक्तिगत और छोटी रकम/मात्रा में होने लगी है। 18-39 वर्ष के 5,000 उपभोक्ताओं पर आधारित इस अध्ययन के अनुसार पारंपरिक, परिवार-केंद्रित खरीदारी की जगह अब तर्क-आधारित और व्यक्तिगत फैसलों का महत्व बढ़ रहा है। जेन जी और मिलेनियल्स सोने की खरीद को अब शादी-समारोह से आगे बढ़कर व्यक्तिगत माइलस्टोन और पहली सैलरी जैसे शुरुआती निवेश के रूप में देख रहे हैं।
आधुनिक निवेश विकल्पों की बढ़ती पहुंच के बावजूद युवा भारतीयों के लिए सोना अब भी सबसे भरोसेमंद निवेश बना हुआ है। सर्वे के अनुसार यदि आज ₹25,000 निवेश करने हों तो 61.9% उत्तरदाता सोने को चुनेंगे। यह आंकड़ा म्यूचुअल फंड (16.6%), फिक्स्ड डिपॉजिट (13%), शेयर बाजार (6.6%) और क्रिप्टो (1.9%) से काफी आगे है। आर्थिक अनिश्चितता के समय भी सोने पर भरोसा कायम है। 65.7% लोगों ने कहा कि बैंक बचत, म्यूचुअल फंड या इक्विटी की तुलना में सोना उन्हें सबसे सुरक्षित विकल्प लगता है। यह ट्रेंड दर्शाता है कि जेन जी और मिलेनियल्स दोनों के लिए सोना अब भी वित्तीय सुरक्षा का प्रमुख सहारा बना हुआ है।
निवेश के मामले में परिवार की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है, लेकिन सोने की खरीद के फैसले अब तेजी से व्यक्तिगत होते जा रहे हैं। सर्वे के मुताबिक 66.7% उत्तरदाताओं ने कहा कि आज सेाना खरीदना मुख्य रूप से व्यक्तिगत और स्वयं प्रेरित निर्णय बन चुका है, न कि केवल पारिवारिक प्रभाव से लिया गया फैसला। 42.3% लोगों ने बताया कि उनके घर में हाल की सोने की खरीद की पहल उन्होंने खुद की, जबकि 40% ने माता-पिता या बड़े परिवार के सदस्यों को इसका श्रेय दिया। यह बदलाव पीढ़ियों के बीच स्पष्ट अंतर को दिखाता है। जेन जी अब कब और कैसे सोना खरीदना है, इसका फैसला खुद लेने में अधिक आत्मविश्वास दिखा रहे हैं और इसे व्यक्तिगत वित्तीय निर्णय मानते हैं। वहीं मिलेनियल्स अब भी गोल्ड को परिवार की योजना और दीर्घकालिक सुरक्षा के नजरिए से देखते हैं, जहां खरीदारी सामूहिक प्राथमिकताओं से प्रभावित रहती है।
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इस सर्वे से स्पष्ट संकेत मिलता है कि अब सोने की बड़ी और कम अंतराल वाली खरीदारी से हटकर छोटी और नियमित खरीदारी का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। हाल की 61.9% खरीद 5 ग्राम से कम की रही, जिसमें 27.5% लोगों ने 2 ग्राम से कम और 34.4% ने 2 से 5 ग्राम के बीच सोना खरीदा। अब 42% परिवार समय-समय पर छोटी मात्रा में सोना खरीदना पसंद कर रहे हैं, जबकि 58% अभी भी एकमुश्त और अवसर आधारित खरीद करते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि पहली बार सोना खरीदना अब केवल शादी जैसे अवसरों तक सीमित नहीं रहा। 24.3% लोगों ने अपनी पहली सैलरी या व्यक्तिगत आय के बाद पहली बार सोना खरीदा, जबकि 23.9% ने इसे निवेश के रूप में चुना। यह ट्रेंड पीढ़ियों के व्यवहार में अंतर भी दिखाता है। जेन जी छोटे और व्यक्तिगत माइलस्टोन से सोने की खरीद शुरू कर रहे हैं, जबकि मिलेनियल्स इसे जीवन की बड़ी घटनाओं और दीर्घकालिक सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं।
सोने की खरीद में डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ा है। इसके बावजूद सोने की खरीदारी में अभी भी पारंपरिक चैनल्स पर भरोसा अधिक है। सर्वे के अनुसार, 38.3% लोग सबसे अधिक सोना बड़ी ब्रांडेड ज्वेलरी चेन से खरीदते हैं, जबकि 34.7% उपभोक्ता स्थानीय ज्वैलर पर भरोसा करते हैं। इसके विपरीत, केवल 5.2% लोग ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या ऐप के जरिए सोना खरीद रहे हैं। खरीद से जुड़ी चिंताओं में शुद्धता और प्रामाणिकता सबसे बड़ी चिंता के रूप में सामने आई, जिसे 49.4% उत्तरदाताओं ने प्रमुख कारण बताया। इसके अलावा 21% लोगों ने छिपे हुए या मेकिंग चार्जेस को लेकर चिंता जताई, जबकि 17% उत्तरदाता सोने के रीसेल वैल्यू को लेकर चिंतित हैं।
सर्वे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि सोना खरीदने के बाद बड़ी संख्या में युवा उपभोक्ता असमंजस या पछतावा महसूस करते हैं। करीब 67.1% उत्तरदाताओं ने माना कि उन्हें अक्सर या कभी-कभी सोना खरीदने के बाद पछतावा हुआ है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह खरीदी गई कीमत (38.9%) रही, जबकि 33.5% लोगों ने ज्वैलरी, सिक्के या डिजिटल गोल्ड जैसे फॉर्मेट को लेकर भ्रम को कारण बताया। वहीं 18.8% ने पर्याप्त जानकारी के अभाव को जिम्मेदार ठहराया। यह ट्रेंड दिखाता है कि सोने पर भरोसा मजबूत है, लेकिन खरीद प्रक्रिया को लेकर युवाओं का आत्मविश्वास अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है।
लोग भविष्य में भी खूब सोना खरीदना चाहते हैं। स्मिटन पल्सएआई द्वारा किए गए इस सर्वे में यह भी सामने आया कि भविष्य में सोना खरीदने का इरादा बहुत मजबूत है। 52.7% उत्तरदाता अगले 12 से 24 महीनों में सोना खरीदने के लिए “बहुत संभावना” दिखाते हैं। कुल मिलाकर सोने का स्थान युवा भारतीयों के बीच अब भी अडिग है, हालांकि खरीदारी के तरीके बदल रहे हैं। छोटे निवेश, व्यक्तिगत निर्णय और पारंपरिक खरीदारी चैनल्स में भरोसा दर्शाता है कि सोना का आकर्षण मजबूत है और आने वाले समय में भी यह सुरक्षित निवेश के रूप में रहेगा।