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भारतीय शेयर बाजार में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की मार्केट कैप में गिरावट जारी है। इसी बीच ICICI बैंक ने TCS को पीछे छोड़ते हुए पहले स्थान पर कब्जा कर लिया है। यह पहली बार है जब जून 2009 के बाद ICICI बैंक की मार्केट वैल्यू TCS से अधिक हुई है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार दोपहर 12 बजे ICICI बैंक का मार्केट कैप 10.18 ट्रिलियन रुपये पर पहुंच गया, जबकि TCS की वैल्यू 10.02 ट्रिलियन रुपये रही। इस बीच, ICICI बैंक के शेयर 1,428 रुपये तक बढ़ गए, जो इस साल 16 जनवरी के बाद का उच्चतम स्तर है। दूसरी ओर, TCS के शेयर 2,766 रुपये तक गिर गए, जो दिसंबर 2020 के बाद सबसे कम स्तर है।
शेयर बाजार के समग्र रुझान की बात करें तो गुरुवार को Nifty50 इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।
वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर बनी हुई है, जिसकी मार्केट कैप 19.71 ट्रिलियन रुपये है। HDFC बैंक दूसरे और भारती एयरटेल तीसरे स्थान पर हैं, जिनकी मार्केट कैप क्रमशः 14.19 ट्रिलियन और 11.51 ट्रिलियन रुपये है।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और अन्य प्रमुख IT कंपनियों की मार्केट कैप में लगातार गिरावट देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर तकनीकी शेयरों पर बढ़ते दबाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी चिंताएं हैं।
इस सप्ताह निवेशकों में बेचैनी उस समय बढ़ी जब AI स्टार्टअप Anthropic ने इन-हाउस लॉयर्स के लिए नया प्रोडक्टिविटी टूल लॉन्च किया। इससे निवेशकों को डर है कि AI आधारित टूल्स की बढ़ती लोकप्रियता से सॉफ्टवेयर कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
गुरुवार को Nifty IT इंडेक्स में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि साल की शुरुआत से अब तक यह इंडेक्स 11.7 प्रतिशत नीचे आ चुका है। इंडेक्स इस साल अप्रैल के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचा। सालाना गिरावट में Wipro सबसे आगे है, जो 16.8 प्रतिशत नीचे है। इसके बाद Coforge 14 प्रतिशत, LTIMindtree 13.8 प्रतिशत और TCS 13.5 प्रतिशत गिरकर निवेशकों को चिंता में डाल रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले 3-6 महीनों में एआई-नेटिव साझेदारियों पर कड़ी निगरानी जारी रहेगी। मोतीलाल ओसवाल के विशेषज्ञों के अनुसार, ये साझेदारियां अगले 12-14 महीनों में आईटी सेवाओं में नए अवसर पैदा कर सकती हैं। उनका मानना है कि 2026 के मध्य तक छोटे-चक्र वाले AI-संबंधी डील में तेजी आ सकती है।
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वैश्विक सॉफ्टवेयर कंपनियों जैसे Salesforce सहित अन्य एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर फर्मों में भी भारी बिकवाली देखी गई, क्योंकि बाजार में AI आधारित बदलाव को तेजी से अपनाने का अनुमान लगाया जा रहा है। ICICI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एआई वर्कस्पेस जैसे Claude Cowork एजेंट-आधारित ऑटोमेशन की दिशा में बदलाव का संकेत देते हैं, लेकिन बड़ी कंपनियों को अभी भी डेटा मॉडर्नाइजेशन, सिस्टम ऑर्केस्ट्रेशन और गवर्नेंस जैसे बड़े पैमाने के इंटीग्रेशन की जरूरत है। यही क्षेत्र हैं जहां आईटी सेवाएं अहम भूमिका निभाती रहती हैं।
वहीं, दिसंबर तिमाही में TCS का शुद्ध मुनाफा घटकर ₹10,657 करोड़ रह गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹12,380 करोड़ था। तिमाही दर तिमाही मुनाफा 11.7 प्रतिशत कम हुआ। कंपनी की राजस्व वृद्धि ब्लूमबर्ग के अनुमान से बेहतर रही, जबकि मुनाफा उम्मीदों से कम रहा। TCS के मुनाफे पर कर्मचारी कानून में बदलाव से जुड़े पुनर्गठन खर्च, एक बार के शुल्क और ₹1,010 करोड़ के कानूनी दावे का प्रावधान असर डालने वाला रहा।