शेयर बाजार

Nifty IT Stocks: 10 महीने के लो के पास IT स्टॉक्स, निवेशकों में बढ़ी चिंता; आखिर क्यों टूट रहा है सेक्टर?

Nifty IT Stocks: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और एचसीएल टेक के शेयर गुरुवार को क्रमशः 5.5 प्रतिशत, 5.7 प्रतिशत और 4.1 प्रतिशत टूट गए।

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जतिन भूटानी   
Last Updated- February 12, 2026 | 3:37 PM IST

Nifty IT Stocks: सॉफ्टवेयर सर्विस प्रोवाइड करने वाली देसी कंपनियों के शेयर गुरुवार (12 फरवरी) को 6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। पिछले कुछ दिनों से आईटी शेयरों में दबाव देखा जा रहा है। ताजा गिरावट के साथ निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 10 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया।

10 कंपनियों वाला आईटी इंडेक्स दिन में सबसे ज्यादा गिरने वाला सेक्टर रहा। यह इस साल अब तक का सबसे कमजोर सेक्टर भी है। साल 2025 में यह 12.6 प्रतिशत गिर चुका है और 2026 में अब तक इसमें 12.2 प्रतिशत की और गिरावट आ चुकी है। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस और एचसीएल टेक के शेयर गुरुवार को क्रमशः 5.5 प्रतिशत, 5.7 प्रतिशत और 4.1 प्रतिशत टूट गए।

आईटी शेयरों में गिरावट क्यों आ रही है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आईटी कंपनियों के कामकाज पर असर पड़ने की लगातार आशंका और अमेरिका में जल्द ब्याज दर घटने की उम्मीद कमजोर पड़ने से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया।

पिछले हफ्ते अमेजन और गूगल के समर्थन वाली कंपनी ने एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल पेश किया। यह टूल कई काम अपने आप कर सकता है। इसके बाद दुनिया भर के टेक्नीकल शेयरों पर दबाव बढ़ा और यह चिंता भी बढ़ी कि भारतीय आईटी कंपनियों की सर्विसेज की मांग पर असर पड़ सकता है।

चार फरवरी से शुरू हुई गिरावट के बाद घरेलू आईटी शेयर करीब 14 प्रतिशत टूट चुके हैं। इस गिरावट के चलते टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, जो पहले देश की चौथी सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनी थी, अब छठे स्थान पर आ गई है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि हाल में आए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल के कारण आईटी शेयरों में जो भारी गिरावट आई है। अभी इन मॉडलों को भी इंसानी मदद की जरूरत है। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस जैसे नियमों से जुड़े सेक्टर्स पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर कम पड़ने की संभावना है।

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एक्सपर्ट्स के अनुसार, दबाव बढ़ने की एक और वजह यह रही कि अमेरिका में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आए और बेरोजगारी दर घटी। इससे यह संकेत मिला कि वहां ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है। अगर वहां ब्याज दरें घटतीं, तो इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज पर खर्च बढ़ सकता था, जो पिछले कुछ सालों से धीमा पड़ा हुआ है।

First Published : February 12, 2026 | 3:26 PM IST