Housing sale tier 2 cities: टियर-2 शहरों में भी महंगे मकानों की बिक्री जोर पकड़ रही है। इन शहरों में कुल मकानों की बिक्री भले घटी हो, लेकिन एक करोड़ से महंगे मकानों की बिक्री में इजाफा हुआ है। रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी के अनुसार वर्ष 2025 में शीर्ष 15 टियर-2 शहरों में आवासीय बिक्री का कुल मूल्य ₹1.48 लाख करोड़ पर स्थिर रहा, जबकि बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 10% की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,56,181 यूनिट तक पहुंच गई, जो आवास की बढ़ती कीमतों और प्रीमियम संपत्तियों की बढ़ती मांग को दर्शाती है। मोहाली और लखनऊ को छोड़कर जहां बिक्री मात्रा में क्रमशः 34% और 6% वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अन्य 13 शहरों में मकानों की बिक्री में 38% तक की गिरावट देखी गई, जिसमें विशाखापत्तनम में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई।
एक करोड़ से महंगे मकानों की बिक्री बढ़ी
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च मूल्य वाले आवास की ओर बढ़ते रुझान को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि वर्ष 2025 में 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले मकानों की बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 15% की गिरावट दर्ज की गई और इनकी हिस्सेदारी 2024 के 77% से घटकर 72% रह गई। वहीं दूसरी ओर 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले मकानों की बिक्री में 9% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इनकी हिस्सेदारी 2024 के 23% से बढ़कर 28% हो गई।
अहमदाबाद टियर-1 शहर की ओर बढ़ रहा है
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भविष्य की ओर देखें तो, 2026 की शुरुआत से अहमदाबाद को ‘टियर-1’ शहर माना जा सकता है, क्योंकि यह मकानों की लॉन्चिंग और मांग दोनों ही मामलों में कई स्थापित टियर-1 बाजारों को पीछे छोड़ चुका है। विकास के बड़े पैमाने और मांग की गहराई को देखते हुए, यह शहर अब भारत के टियर-1 शहरी केंद्रों में शामिल होने का वास्तविक हकदार है।
आंकड़ों के लिहाज से गुजरात के चार शहरों अहमदाबाद, गांधीनगर, वडोदरा और सूरत की 15 टियर-2 शहरों की कुल बिक्री में 63% हिस्सेदारी रही। इसमें अकेले अहमदाबाद का योगदान 33% रहा, जहां 51,148 मकानों की बिक्री हुई।
मकानों की बिक्री में क्यों आई कमी?
प्रॉपइक्विटी के संस्थापक एवं सीईओ समीर जसूजा ने कहा, ‘पिछले दो वर्षों में आवास बिक्री में आई मंदी का मुख्य कारण 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले मकानों की घटती सप्लाई है I यह एक ऐसा सेगमेंट है जिसने पारंपरिक रूप से टियर-2 शहरों में मांग को गति दी है। जमीन की बढ़ती कीमतों और निर्माण लागत में वृद्धि के साथ-साथ खरीदारों की बदलती आकांक्षाओं के कारण नई लॉन्चिंग अब ऊंचे प्राइस ब्रैकेट (महंगे वर्गों) की ओर बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप, टियर-2 बाजार अब तेजी से टियर-1 शहरों की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जहां बिक्री की मात्रा कम हो रही है लेकिन कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।’ जसूजा ने कहा कि टियर-2 शहरों पर सरकार का बढ़ता फोकस, शहरी विकास में सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी तथा औद्योगिक कॉरिडोर और मैन्युफैक्चरिंग हब के निर्माण के माध्यम से कीमतों में निरंतर वृद्धि का कारण बना है। इसके परिणामस्वरूप कई टियर-2 बाजारों में औसत आवासीय इकाइयों की कीमत भी 1 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है, जिससे बिक्री की गति धीमी हुई है। आगे चलकर यह रुझान चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि वहन क्षमता (अफोर्डेबिलिटी) का दबाव केवल प्रीमियम सेगमेंट ही नहीं, बल्कि इन शहरों के किफायती और मध्यम आय वाले आवासों को भी प्रभावित करने लगा है।
टियर 2 शहरों में आपूर्ति में भी आई कमी
प्रॉपइक्विटी के मुताबिक शीर्ष 15 टियर-2 शहरों में नई आपूर्ति 6% घटकर 1,36,243 इकाइयों पर आ गई, जो 2024 में 1,45,139 इकाइयां थी। यह कमी सभी मूल्य वर्गों में देखी गई। 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले मकानों की आपूर्ति में 5% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की आपूर्ति में 8% की कमी आई।
मोहाली (108%), भोपाल (66%), अहमदाबाद (3%) और जयपुर (2%) में नई लॉन्चिंग में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अन्य 11 शहरों में 57% तक की गिरावट देखी गई, जिसमें भुवनेश्वर में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई। गुजरात के इन चार शहरों का 2025 में कुल लॉन्च में 64% हिस्सा रहा।