बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने इनोवेशन सैंडबॉक्स में आंशिक शेयरों का परीक्षण करने के एक स्टार्टअप के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जो भारत के इक्विटी परिदृश्य में संभावित बदलाव का प्रतीक है। सेबी का यह निर्णय 2021 के उसके रुख में महत्त्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जब उसने सैंडबॉक्स में इसी तरह के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
आंशिक (फ्रैक्शनल) शेयर की यह व्यवस्था निवेशकों को एक पूरे शेयर की खरीद-फरोख्त के बजाय उसके एक या कुछ हिस्से का ट्रेड करने की अनुमति देती है। इस तरह की ट्रेडिंग व्यवस्था अमेरिका में खासी लोकप्रिय है। इस महीने की शुरुआत में बेंगलूरु की जॉल्ट्स भी आंशिक शेयर ट्रेडिंग का परीक्षण करने के लिए सेबी के इनोवेशन सैंडबॉक्स में शामिल हुई थी। जॉल्ट्स के सह-संस्थापक नीरज सिंह ने बताया कि अगले 3 से 4 महीनों में कंपनी सेबी और बाजार के अन्य भागीदारों के समक्ष विभिन्न उपयोग-मामलों का प्रदर्शन करेगी। हालांकि व्यापक स्तर पर लाइव परीक्षण तभी शुरू होगा जब सेबी उन्हें नियामकीय सैंडबॉक्स में शिफ्ट कर देगा।
सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि उनके सफल आवेदन का मूल आधार संरक्षण का ढांचा था, जिसमें आंशिक शेयर ब्रोकर के पास रहने की बजाय डिपॉजिटरी में रखे जाएंगे।
सिंह ने बताया, ‘हम डिपॉजिटरी के साथ मिलकर काम करेंगे और इसे डिपॉजिटरी स्तर पर रखेंगे मगर स्वामित्व उपयोगकर्ता के खाते में या सीधे उपयोगकर्ता के पास होगा। डिपॉजिटरी के जरिये ब्रोकर आंशिक शेयर खरीद-बिक्री के लिए पेश कर सकेंगे।’ जॉल्ट्स स्मार्ट अनुबंध आधारित ट्रेड निपटान में प्रयोग करने के लिए क्लियरिंग कॉरपोरेशन के साथ भी सहयोग करने की योजना बना रही है। सेबी से प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति मिलने के बाद एक विशिष्ट डिपॉजिटरी निर्धारित की जाएगी।
इस बारे में जानकारी के लिए सेबी को ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।
जनवरी 2021 में जीरोधा और स्टॉकहिस्सा डॉट कॉम ने सेबी के नियामक सैंडबॉक्स में आंशिक शेयर ट्रेडिंग की अनुमति मांगी थी लेकिन नियामक ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया था। उनका मॉडल एक होल्डिंग इकाई पर निर्भर था जो पूरे शेयर खरीदती और फिर सेबी द्वारा लाइसेंस प्राप्त रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट के माध्यम से उसका हिस्सा बेचती। ट्रस्टी आंशिक शेयरधारकों के हितों को देखता लेकिन शेयर हस्तांतरण केवल होल्डिंग इकाई के जरिये करने की सुविधा थी, जिससे नियामकीय और संरचनात्मक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती थीं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सेबी का नियम ब्रोकर को शेयर रखने से रोकता है, जिससे आंशिक शेयर की खरीद-बिक्री जटिल हो जाती है।
इकनॉमिक लॉ प्रैक्टिस के पार्टनर मनेंद्र सिंह ने कहा, ‘भारत में आंशिक शेयर स्वामित्व को व्यवहार्य बनाने के लिए कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय को कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रमुख प्रावधानों में संशोधन करना होगा क्योंकि यह प्रावधान वर्तमान में संपूर्ण शेयर की ट्रेडिंग की ही अनुमति देता है।’
साल 2023 में तत्कालीन सेबी चेयरमैन माधवी पुरी बुच ने शेयरों के आंशिक स्वामित्व की सुविधा देने में रुचि दिखाई थी लेकिन इसके लिए सेबी अधिनियम और कंपनी अधिनियम दोनों में बदलाव की आवश्यकता है।
सिंह ने कहा, ‘चुनौतियों में केवाईसी और धनशोधन निषेध नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना, बोनस शेयरों जैसे कॉरपोरेट कार्यों का प्रबंधन करना और आंशिक स्वामित्व को स्पष्ट करने के लिए कर कानूनों को अपडेट करना भी शामिल है। इसके लिए सेबी, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और कर अधिकारियों के बीच समन्वय की आवश्यकता होगी।’