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Unsecured Loans: 2019 के बाद से चुनिंदा असुरक्षित लोन में 7 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि

आरबीआई ने बैंकों को शुक्रवार को सलाह दी कि वे असुरक्षित उधारी को लेकर सावधानी बरतें। वर्तमान समय में असुरक्षित उधारी में ‘अत्यधिक वृद्धि दर्ज’ हुई है।

Last Updated- October 09, 2023 | 11:05 PM IST
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महामारी के बाद लोगों को असुरक्षित उधारी लेने का रुझान कहीं अधिक बढ़ गया है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक अगस्त 2019 से अगस्त 2023 के दौरान बैंकों के टिकाऊ उपभोक्ता सामान की खरीद के लिए ऋण देने, क्रेडिट कार्ड के लिए रुपये जुटाने और अन्य व्यक्तिगत उधारी में 6.9 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। ये पारंपरिक रूप से असुरक्षित उधारी हैं।

इसका अर्थ होता है कि यह उधारी गारंटी के बिना मुहैया करवाई गई। बैंकों इन उधारियों को गारंटी वाले लोन की तुलना में अधिक जोखिम वाला मानता है। असुरक्षित उधारी में चूक होने पर वसूली के लिए बैंक संबंधित वस्तु की नीलामी कर सकता है।

आरबीआई ने बैंकों को शुक्रवार को सलाह दी कि वे असुरक्षित उधारी को लेकर सावधानी बरतें। वर्तमान समय में असुरक्षित उधारी में ‘अत्यधिक वृद्धि दर्ज’ हुई है।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान बैंकों के साथ-साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) से उधारी देने के दौरान साख सुनिश्चित करने की खातिर समुचित जोखिम प्रबंधन और उनके मानकों को पूरा करने के लिए कहा है।

2019 के अगस्त की तुलना में इस साल की अवधि के दौरान असुरक्षित उधारी का मूल्य 7.4 लाख करोड़ रुपये से 93 प्रतिशत बढ़कर 14.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस अवधि के दौरान अन्य व्यक्तिगत उधारियों की श्रेणी में 87 प्रतिशत वृद्धि हुई और यह बढ़कर 11.9 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई।

क्रेडिट कार्ड का बकाया 124 प्रतिशत बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपये व टिकाऊ उपभोक्ता सामान में उधारी 218 प्रतिशत बढ़कर 0.21 लाख करोड़ रुपये हो गई। दरअसल, असुरक्षित उधारी में केवल ये उधारियां ही नहीं हैं बल्कि शिक्षा ऋण भी असुरक्षित उधारी में आ सकता है। हालांकि कुछ टिकाऊ उपभोक्ता सामान के ऋण भी सुरक्षित हो सकते हैं।

रुझानों के अनुसार इनकी संख्या में वृद्धि हो सकती है। आरबीआई की जून, 2023 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार बैंकों की उधारी में एक तिहाई खुदरा ऋण है और असुरक्षित उधारी निरंतर बढ़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘इस अवधि के दौरान सुरक्षित और असुरक्षित एडवांस के ढर्रे में बदलाव आया है। खुदरा असुरक्षित ऋण 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 25.2 प्रतिशत हो गया। हालांकि सुरक्षित उधारी 77.1 प्रतिशत से घटकर 74.8 प्रतिशत हो गई।’ फंसे हुए कर्ज की हिस्सेदारी बढ़ गई है और इसमें कुछ दबाव के संकेत हैं।

कई बैंकों ने असुरक्षित पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। नोमूरा की 29 अगस्त की ग्लोबल मार्केट्स रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई आदि असुरक्षित पोर्टफोलियो में संख्या का खासा इजाफा हुआ है।

First Published - October 9, 2023 | 11:05 PM IST

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