facebookmetapixel
पान मसाला कंपनियों पर सख्ती: 1 फरवरी से रजिस्ट्रेशन, मशीन पर अलग टैक्स व फैक्ट्री में CCTV जरूरीघर में कितना सोना रखना लीगल? जानिए नियमनिर्यातकों को बड़ी राहत: MSME एक्सपोर्टर्स को सस्ता लोन और गारंटी सपोर्ट के लिए ₹7,295 करोड़ का पैकेजSIP Investment: ₹2,000 की मंथली एसआईपी से कितना पैसा बनेगा? 5 से 20 साल की पूरी कैलकुलेशन देखेंNCERT को मिलेगा ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा, इसी महीने आ सकता है बड़ा फैसलाShare Market: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, निफ्टी रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा; सेंसेक्स 573 अंक चढ़ाUpcoming NFO: नया साल, नया जोश; जनवरी में 12 नए फंड होंगे लॉन्च, ₹100 से निवेश शुरूसरकार एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर GST 5% करने की तैयारी में, GST काउंसिल जल्द ले सकती है फैसलास्मोकिंग करने वाले दें ध्यान! 1 फरवरी से महंगी होगी सिगरेट, जानें अब कितना ज्यादा पैसा देना होगामुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की तारीख तय! रूट, स्पीड जान लीजिए

विशेषज्ञ समिति का SEBI को IPO नियमों में ढील देने का सुझाव

समिति ने कंपनी सूचीबद्ध होने के बाद 20 फीसदी न्यूनतम हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए प्रवर्तकों को ज्यादा रास्ते देने का सुझाव दिया है।

Last Updated- January 11, 2024 | 11:20 PM IST
SEBI

भारतीय कंपनी जगत को अपनी फर्में सूचीबद्ध कराने में अब आसानी हो सकती है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने कंपनियों को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) दस्तावेज जमा कराने के बाद निर्गम के आकार में फेरबदल करने के लिए ज्यादा छूट देने की सिफारिश की है।

समिति ने कंपनी सूचीबद्ध होने के बाद 20 फीसदी न्यूनतम हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए प्रवर्तकों को ज्यादा रास्ते देने का सुझाव दिया है। समिति ने यह भी कहा है कि बैंकों में हड़ताल जैसी अप्रत्याशित स्थिति आने पर कंपनियों का आईपीओ केवल एक दिन के लिए बढ़ाया जाए जबकि अभी उसमें तीन दिन इजाफा करना ही पड़ता है।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य रह चुके एसके मोहंती की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति में वित्त मंत्रालय, कंपनी मामलों के मंत्रालय और स्टॉक एक्सचेंजों के सदस्य तथा कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं। इसका का गठन पिछले आम बजट की घोषणा के बाद किया गया था, जिसमें वित्तीय नियामकों को अनुपालन सरल बनाने और इसके बोझ को कम करने पर काम करने का निर्देश दिया गया था।

समिति ने सूचीबद्धता के साथ-साथ खुलासे के मोर्चे पर भी कुछ बदलाव के सुझाव दिए हैं। अभी कंपनियों को आईपीओ लाने के बाद प्रवर्तकों की न्यूनतम 20 फीसदी हिस्सेदारी रखनी ही होती है। इस तरह आम निवेशकों से पैसा जुटाने के बाद भी कंपनी में प्रवर्तक को कुछ हिस्सेदारी बनाए रखनी पड़ती है।

प्रस्ताव के मुताबिक निजी इक्विटी और अन्य गैर-व्यक्तिगत शेयरधारकों की हिस्सेदारी को प्रवर्तक की न्यूनतम हिस्सेदारी माना जा सकता है। मगर इसमें शेयरधारिता की अवधि और मात्रा की शर्तें लगेंगी। महत्त्वपूर्ण बात है कि वे प्रवर्तक बने बगैर भी ऐसा कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त डिपॉजिटरी रीसीट सहित परिवर्तनीय प्रतिभूतियों को कम से कम एक साल तक बनाए रखा जाए तो उन्हें भी प्रवर्तक की न्यूनतम हिस्सेदारी में शामिल किया जा सकता है।

समिति ने सुझाव दिया कि ओपन फॉर सेल (OFS) के आकार में इजाफा अथवा कमी या तो निर्गम के आकार पर आधारित हो या शेयरों की संख्या पर। दोनों को इसका आधार नहीं बनाया जा सकता।

कंपनियों को अभी निर्गम में ज्यादा बदलाव करने के लिए नए सिरे से आईपीओ दस्तावेज जमा कराने होते हैं। खुलासे के मोर्चे पर समिति ने सुझाव दिया कि बाजार पूंजीकरण के लिहाज से कंपनी का दर्जा तय करने के लिए 6 महीने का औसत बाजार पूंजीकरण ही देखा जाए।

कंपनियों को बाजार पूंजीकरण से संबंधित प्रावधानों के अनुपालन के लिए तीन महीने की मोहलत देने का भी सुझाव है। समिति ने खाली पड़े प्रमुख पद भरने के लिए 3 महीने के बजाय 6 महीने का समय दिए जाने की सिफारिश भी की है।

First Published - January 11, 2024 | 11:04 PM IST

संबंधित पोस्ट