facebookmetapixel
Advertisement
केजरीवाल को आबकारी नीति मामले में कोर्ट से क्लीन चिट: क्या अब बदल जाएगी 2026 की राजनीति?भारत विभाजन का गवाह ‘जिन्ना हाउस’ होगा नीलाम, ₹2600 करोड़ के इस बंगले की लगेगी बोलीफरवरी में UPI लेनदेन में मामूली गिरावट, कुल 26.84 लाख करोड़ रुपये का हुआ ट्रांजैक्शनGST की शानदार रफ्तार: फरवरी में शुद्ध राजस्व 7.9% बढ़ा, ₹1.61 लाख करोड़ पहुंचा संग्रहफिनो पेमेंट्स बैंक के CEO की गिरफ्तारी से हड़कंप, गेमिंग और सट्टेबाजी के अवैध लेनदेन पर बड़ी कार्रवाईबाजार की गिरावट में भी चमके वायर शेयर: पॉलिकैब और KEI इंडस्ट्रीज ने बनाया नया रिकॉर्डईरान-इजरायल युद्ध का बाजार पर दिख सकता है असर, सोमवार को सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट का डरपेंट दिग्गजों पर दोहरी मार: महंगे कच्चे तेल और कड़ी प्रतिस्पर्धा ने बिगाड़ा एशियन पेंट्स का गणितएमेजॉन इंडिया का बड़ा धमाका: 12.5 करोड़ उत्पादों पर रेफरल शुल्क खत्म, विक्रेताओं की होगी भारी बचतVolvo India का यू-टर्न: 2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनने का लक्ष्य बदला, अब बाजार तय करेगा रफ्तार

विशेषज्ञ समिति का SEBI को IPO नियमों में ढील देने का सुझाव

Advertisement

समिति ने कंपनी सूचीबद्ध होने के बाद 20 फीसदी न्यूनतम हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए प्रवर्तकों को ज्यादा रास्ते देने का सुझाव दिया है।

Last Updated- January 11, 2024 | 11:20 PM IST
SEBI

भारतीय कंपनी जगत को अपनी फर्में सूचीबद्ध कराने में अब आसानी हो सकती है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने कंपनियों को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) दस्तावेज जमा कराने के बाद निर्गम के आकार में फेरबदल करने के लिए ज्यादा छूट देने की सिफारिश की है।

समिति ने कंपनी सूचीबद्ध होने के बाद 20 फीसदी न्यूनतम हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए प्रवर्तकों को ज्यादा रास्ते देने का सुझाव दिया है। समिति ने यह भी कहा है कि बैंकों में हड़ताल जैसी अप्रत्याशित स्थिति आने पर कंपनियों का आईपीओ केवल एक दिन के लिए बढ़ाया जाए जबकि अभी उसमें तीन दिन इजाफा करना ही पड़ता है।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य रह चुके एसके मोहंती की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति में वित्त मंत्रालय, कंपनी मामलों के मंत्रालय और स्टॉक एक्सचेंजों के सदस्य तथा कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं। इसका का गठन पिछले आम बजट की घोषणा के बाद किया गया था, जिसमें वित्तीय नियामकों को अनुपालन सरल बनाने और इसके बोझ को कम करने पर काम करने का निर्देश दिया गया था।

समिति ने सूचीबद्धता के साथ-साथ खुलासे के मोर्चे पर भी कुछ बदलाव के सुझाव दिए हैं। अभी कंपनियों को आईपीओ लाने के बाद प्रवर्तकों की न्यूनतम 20 फीसदी हिस्सेदारी रखनी ही होती है। इस तरह आम निवेशकों से पैसा जुटाने के बाद भी कंपनी में प्रवर्तक को कुछ हिस्सेदारी बनाए रखनी पड़ती है।

प्रस्ताव के मुताबिक निजी इक्विटी और अन्य गैर-व्यक्तिगत शेयरधारकों की हिस्सेदारी को प्रवर्तक की न्यूनतम हिस्सेदारी माना जा सकता है। मगर इसमें शेयरधारिता की अवधि और मात्रा की शर्तें लगेंगी। महत्त्वपूर्ण बात है कि वे प्रवर्तक बने बगैर भी ऐसा कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त डिपॉजिटरी रीसीट सहित परिवर्तनीय प्रतिभूतियों को कम से कम एक साल तक बनाए रखा जाए तो उन्हें भी प्रवर्तक की न्यूनतम हिस्सेदारी में शामिल किया जा सकता है।

समिति ने सुझाव दिया कि ओपन फॉर सेल (OFS) के आकार में इजाफा अथवा कमी या तो निर्गम के आकार पर आधारित हो या शेयरों की संख्या पर। दोनों को इसका आधार नहीं बनाया जा सकता।

कंपनियों को अभी निर्गम में ज्यादा बदलाव करने के लिए नए सिरे से आईपीओ दस्तावेज जमा कराने होते हैं। खुलासे के मोर्चे पर समिति ने सुझाव दिया कि बाजार पूंजीकरण के लिहाज से कंपनी का दर्जा तय करने के लिए 6 महीने का औसत बाजार पूंजीकरण ही देखा जाए।

कंपनियों को बाजार पूंजीकरण से संबंधित प्रावधानों के अनुपालन के लिए तीन महीने की मोहलत देने का भी सुझाव है। समिति ने खाली पड़े प्रमुख पद भरने के लिए 3 महीने के बजाय 6 महीने का समय दिए जाने की सिफारिश भी की है।

Advertisement
First Published - January 11, 2024 | 11:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement