कनाडा के कंप्यूटर वैज्ञानिक जोशुआ बेंजिओ को अक्सर आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) का गॉडफादर कहा जाता है। उनका कहना है कि आर्टिफिशल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) को अगली बड़ी चीज के रूप में भूल जाना ही बेहतर होगा, अगर आधुनिक प्रणालियों में असंगत इंटेलिजेंस बनी रहती है जो कई जटिल कार्यों में तो बहुत अच्छी है, लेकिन कई सरल कार्यों में वाकई बुरी है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के अंतिम दिन उन्होंने कहा, ‘अगर एआई में ये असंगत क्षमताएं बनी रहती हैं तो हम एजीआई के इस दृष्टिकोण से बच सकते हैं। हम ऐसी दुनिया में हो सकते हैं, जहां एआई में पहले से ही ये खतरनाक क्षमताएं हों और इसलिए इन मशीनों के जोखिम और क्षमताओं को निर्धारित करने के लिए सावधानीपूर्वक वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता है।’
शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं ने एआई की विशाल शक्ति के खिलाफ आगाह किया है। उनका कहना है कि हालांकि वैज्ञानिक अनुसंधान और दवा खोज या कैंसर के इलाज जैसे कई क्षेत्रों में इसकी संभावनाएं रोमांचक बनी हुई हैं, लेकिन यह भ्रम, पूर्वग्रहों और खराब परिणामों का भी शिकार है।
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बेंजिओ ने अंतरराष्ट्रीय एआई सुरक्षा रिपोर्ट पेश करते हुए कहा, ‘शायद कुछ साल पहले एजीआई का मानव स्तर तक पहुंचने के बारे में सोचना रोमांचक होता। लेकिन अब यह अर्थहीन है क्योंकि हमारे पास ऐसी चीजें होंगी जो कुछ मायनों में बेहद मूर्खता भरी लऔर कमजोर होंगी और गलत हाथों में खतरनाक होंगी। कारोबारों को यह भी तय करने की आवश्यकता है कि एआई उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों के लिए अच्छा है या नहीं।’
उनकी यह टिप्पणी गूगल डीपमाइंड के मुख्य कार्य अधिकारी और सह-संस्थापक डेमिस हसाबिस के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि एजीआई का जमाना अब भी लगभग पांच से आठ साल दूर है और प्रणालियों को आगे प्रशिक्षित करने और अपने दम पर सीखने की क्षमता रखने की जरूरत है।