रजनीश के योनो का लक्ष्य अत्यधिक नहीं
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कुछ सप्ताह पहले कहा था कि बैंक के योनो ऐप की वैल्यू 40 अरब डॉलर होनी चाहिए और उसके परिणामस्वरूप प्रस्ताव रखा कि इसे एसबीआई काड्र्स ऐंड पेमेंट सर्विसेज जैसे अलग सहायक इकाई की तरह एक अलग इकाई में तब्दील किया जाना चाहिए। तब उनकी इस […]
शेयरधारकों ने किया विरोध में मतदान
मुश्किल में फंसे लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरधारकों के बड़े वर्ग ने सालाना आम बैठक में बैंक के प्रबंध निदेशक व सीईओ एस सुंदर, सात निदेशकों और अंकेक्षकों की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया है। हाल में संशोधित बैंकिंग नियमन अधिनियम के तहत यह शायद पहला मामला होगा, जो मोरेटोरियम लगाए बिना आरबीआई को […]
प्रतिकूल फैसले से बैंक होंगे प्रभावित
मोरेटोरियम के तहत ऋणों के लिए ‘ब्याज पर ब्याज’ पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई अगले सप्ताह सोमवार को होनी है। एक अनौपचारिक अनुमानित गणना से संकेत मिलता है कि यदि फैसला प्रतिकूल आता है तो बैंकों को अपने लाभ और नुकसान स्टेटमेंट में 10,0002-20,000 करोड़ रुपये के प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि […]
भारतीय बैंकिंग व्यवस्था सुधरने में लगेगा लंबा वक्त
रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स (एसऐंडपी) के अनुसार भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे उभरते बाजारों में कोविड-19 महामारी की वजह से प्रभावित हुई बैंकिंग व्यवस्था रिकवरी की रफ्तार धीमी रहेगी और यह वर्ष 2023 के बाद ही संभव हो पाएगी। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को देर से उबरने वाला माना जा रहा है। इसकी रिकवरी […]
दो लाख करोड़ रुपये के ऋणों का पुनर्गठन कर सकते हैं बैंक
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि भारत में बैंकिंग क्षेत्र द्वारा उन कर्जदारों के करीब दो लाख करोड़ रुपये के ऋणों को पुनर्गठित किए जाने की संभावना है जो कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुए हैं। कर्ज पुनर्गठन के लिए इस अनुमान (2,00,000 करोड़ रुपये के) में कॉरपोरेट, एमएसएमई और […]
रिजर्व बैंक की बढ़ती जा रहीं चुनौतियां
महामारी के भयावह रूप धारण कर लेने से पिछले कुछ महीने मुश्किल भरे रहे हैं। मगर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इन मुश्किलों से बड़ी सहजता से पार पाने में सफल रहा है। केंद्रीय बैंक ने दर में कटौती, तरलता डालने और नकदी आपूर्ति में बढ़ोतरी समेत हरसंभव तरीके से अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। आरबीआई […]
कोविड-19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों में जो गिरावट आई है उससे ठोस तरीके से बाहर निकलना काफी हद तक बैंकिंग तंत्र की ऋण देने की क्षमता पर निर्भर करेगा। यह खासतौर पर सरकारी बैंकों की उत्पादक क्षेत्रों को ऋण देने की क्षमता पर निर्भर होगा। परंतु मौजूदा स्वरूप में सरकारी बैंक अर्थव्यवस्था […]
भारतीय कारोबारों के आकार की समस्या
ऐंबिट कैपिटल की सलाहकार, अर्थशास्त्री ऋतिका मांकड़ मुखर्जी ने एक दिलचस्प रिपोर्ट लिखी है जिसका शीर्षक है-स्काउटिंग फॉर जाइंट्स। रिपोर्ट भारतीय कंपनियों में परिमाण की कमी से संबंधित है। उन्होंने अलग-अलग दौर और देशों की कंपनियों के आंकड़ों का राजस्व के आधार पर अध्ययन किया और पाया कि भारतीय कंपनियां अन्य देशों की कंपनियों की […]
एनबीएफसी में चूक बढऩे की आशंका
कोविड-19 महामारी से पैदा हुई आर्थिक मंदी से बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव पडऩे की आशंका गहरा गई है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अनुमान व्यक्त किया है कि कर्जदारों के पास नकदी प्रवाह की अस्थिरता की वजह से इस क्षेत्र में चूक की दर चालू वित्त वर्ष में 50-250 आधार अंक के बीच […]
इस बार अलग है ऋण पुनर्गठन की व्यवस्था
देश का बैंकिंग क्षेत्र अपनी बदकिस्मती को दूर कर पाने में नाकाम नजर आ रहा है। वर्षों तक प्रदर्शन में सुधार से जो बेहतरी हासिल होती है वह किसी न किसी बाहरी झटके से नष्ट होती नजर आती है। सुधार के बाद के दौर में यानी सन 1996-97 में इस क्षेत्र का फंसा हुआ कर्ज […]