डिजिटल धोखाधड़ी पर RBI का ऐतिहासिक फैसला: अब पीड़ितों को मिलेगा ₹25,000 तक का मुआवजाPariksha Pe Charcha 2026: PM मोदी ने छात्रों को दी सलाह- नंबर नहीं, स्किल व बेहतर जीवन पर दें ध्याननागालैंड में क्षेत्रीय प्राधिकरण के गठन को मिली त्रिपक्षीय मंजूरी, PM मोदी ने बताया ‘ऐतिहासिक’क्या खत्म हो रहा है स्थायी दोस्ती का दौर? ट्रंप की नीतियों ने हिला दी वैश्विक गठबंधनों की बुनियाद2026 में भारत का ट्रेड एजेंडा: द्विपक्षीय समझौतों से आगे बढ़कर वैश्विक व्यापार धुरी बनने की तैयारीEditorial: डेटा सेंटर को बिजली देना जरूरी, AI में लीडरशिप ऊर्जा आपूर्ति के नियंत्रण पर टिकीRBI गवर्नर को भरोसा: भारत की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत, बाहरी मोर्चे पर भी देश पूरी तरह सुरक्षितPSL वर्गीकरण विवाद पर RBI का रुख साफ: यह बैंकों का व्यक्तिगत मसला, पूरी व्यवस्था के लिए खतरा नहींसोने की कीमतों में उछाल से बढ़ा गोल्ड लोन का ग्राफ, RBI ने कहा: एसेट क्वालिटी पर कोई खतरा नहींREITs को मिली बैंक ऋण की मंजूरी: फंड जुटाना होगा आसान, कमर्शियल संपत्तियों का होगा विस्तार
अन्य समाचार सज्जन के खिलाफ निचली अदालत में कार्यवाही पर रोक से उच्च न्यायालय का इंकार
'

सज्जन के खिलाफ निचली अदालत में कार्यवाही पर रोक से उच्च न्यायालय का इंकार

PTI

- July,03 2012 10:43 PM IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के सिख विरोधी दंगे से जुड़े एक मामले में निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने से आज इंकार कर दिया ।

कुमार ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की है जिसने उन्हें अपने बचाव में दंगा पीडि़त एक महिला द्वारा विभिन्न न्यायिक आयोगों के समक्ष दिये गये बयानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इंकार कर दिया था।

न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने निचली अदालत में कार्यवाही जारी रखने का आदेश देते हुए कहा कि कुमार की अपील का निबटारा होने तक निचली अदालत अपना फैसला नहीं सुनायेगी। इस मामले में अब 27 जुलाई को आगे सुनवाई होगी।

निचली अदालत ने इस मामले में अंतिम जिरह के लिए 12 जुलाई की तारीख तय की है।

निचली अदालत ने दो जून को कुमार की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि गवाह जगदीश कौर के न्यायिक आयोगों के समक्ष बयान को किसी भी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता ।

कांग्रेस नेता ने अपनी याचिका में कहा था कि शिकायतकर्ता और मुख्य गवाह कौर के शपथ पत्र और बयान को जिरह के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए । कौर ने दंगे की जांच करने वाले न्यायिक आयोगों में ये बयान दिए थे ।

दिल्ली के पूर्व सांसद ने अपनी अर्जी में कहा था कि सीबीआई के अभियोजक आर. एस. चीमा ने 12 जुलाई 2010 को अदालत से कहा था कि जी. टी. नानावटी आयोग और रंगनाथ मिश्रा आयोग के समक्ष दिए गए कौर के बयान और हलफनामे का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि उनमें विरोधाभास है ।

संबंधित पोस्ट

Oil Price Surge
अंतरराष्ट्रीय

‘वेनेजुएला हमारा पुराना ऊर्जा साझेदार’

February 6, 2026 9:22 AM IST