दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के सिख विरोधी दंगे से जुड़े एक मामले में निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने से आज इंकार कर दिया ।
कुमार ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की है जिसने उन्हें अपने बचाव में दंगा पीडि़त एक महिला द्वारा विभिन्न न्यायिक आयोगों के समक्ष दिये गये बयानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इंकार कर दिया था।
न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने निचली अदालत में कार्यवाही जारी रखने का आदेश देते हुए कहा कि कुमार की अपील का निबटारा होने तक निचली अदालत अपना फैसला नहीं सुनायेगी। इस मामले में अब 27 जुलाई को आगे सुनवाई होगी।
निचली अदालत ने इस मामले में अंतिम जिरह के लिए 12 जुलाई की तारीख तय की है।
निचली अदालत ने दो जून को कुमार की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि गवाह जगदीश कौर के न्यायिक आयोगों के समक्ष बयान को किसी भी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता ।
कांग्रेस नेता ने अपनी याचिका में कहा था कि शिकायतकर्ता और मुख्य गवाह कौर के शपथ पत्र और बयान को जिरह के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए । कौर ने दंगे की जांच करने वाले न्यायिक आयोगों में ये बयान दिए थे ।
दिल्ली के पूर्व सांसद ने अपनी अर्जी में कहा था कि सीबीआई के अभियोजक आर. एस. चीमा ने 12 जुलाई 2010 को अदालत से कहा था कि जी. टी. नानावटी आयोग और रंगनाथ मिश्रा आयोग के समक्ष दिए गए कौर के बयान और हलफनामे का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि उनमें विरोधाभास है ।