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REITs को मिली बैंक ऋण की मंजूरी: फंड जुटाना होगा आसान, कमर्शियल संपत्तियों का होगा विस्तार

उद्योग के जानकारों के अनुसार इससे ट्रस्टों के लिए अपेक्षाकृत सस्ती दर पर धन जुटाकर खुदरा और कार्यालय संपत्तियों के विस्तार में तेजी लाना आसान हो जाएगा

Last Updated- February 06, 2026 | 10:08 PM IST
Real Estate
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) को सीधे ऋण देने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया है। उद्योग के जानकारों के अनुसार इससे ट्रस्टों के लिए अपेक्षाकृत सस्ती दर पर धन जुटाकर खुदरा और कार्यालय संपत्तियों के विस्तार में तेजी लाना आसान हो जाएगा। 

इससे पहले बैंक के लिए रीट को सीधे ऋण देने पर रोक थी। लिहाजा ये ट्रस्ट स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) या बॉन्ड जारी करके और कैपिटल मार्केट से इक्विटी के जरिए धन जुटाते थे।

इंडिया रीट एसोसिएशन (आईआरए) ने कहा, ‘रीट अधिक वित्तीय लचीलेपन और दीर्घकालिक पूंजी पहुंच के बूते अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करने की स्थिति में होंगे। इससे वे भारत के वाणिज्यिक रीयल एस्टेट क्षेत्र को औपचारिक व संस्थागत बनाने में अधिक योगदान दे सकेंगे।’

एसोसिएशन ने कहा कि बैंकों से सीधे ऋण प्राप्त करने की सुविधा से रीट को धन जुटाने का स्थिर व दीर्घकालिक स्रोत मिलेगा। इससे रीट को इन संस्थानों से धन जुटाने के अधिक अवसर मिल जाते हैं। इस सिलसिले में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह कदम बैंक और रियल एस्टेट क्षेत्र दोनों के लिए सकारात्मक होने की उम्मीद है।

रीट निवेश के ऐसे साधन हैं जो आय उत्पन्न करने वाली अचल संपत्ति के मालिक होते हैं या उसका संचालन करते हैं। इससे निवेशकों को सीधे संपत्ति खरीदे बिना उत्पन्न आय का हिस्सा अर्जित करने में मदद मिलती है। 

उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि रीट म्यूचुअल फंड और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को प्रतिभूतियां जारी करके कर्ज जुटाते हैं। दरअसल, ये निवेशक आमतौर पर 3 से 5 साल की अवधि वाली योजनाओं को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में लंबी अवधि के लिए धन जुटाना चुनौती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब बैंक से ऋण उपलब्ध होने से रीट के पास धन जुटाने के विविध स्रोत्र हो जाएंगे। इससे उनमें पूंजी बाजार की अस्थिरता के कारण कम उतार-चढ़ाव होगा। 

एम्बेसी रीट के मुख्य कार्याधिकारी अमित शेट्टी ने बताया, ‘बैंकों से ऋण लेने के कई विकल्प और पूंजी बाजार की मदद से रीट को अपने कारोबार और रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी और वे अधिक वृद्धि और अंततः शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न दे सकेंगे।’ नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनैशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा कि बैंक क्रेडिट तक पहुंच धन जुटाने के अतिरिक्त स्रोत के रूप में काम करेगी। इससे देनदारियों में विविधता आएगी और पुनर्वित्त में मजबूती बढ़ेगी।

अधिकारियों ने कहा कि रीट अब ऊंची लागत वाले मौजूदा ऋणों को अधिक स्थिर बैंक ऋणों से आसानी से बदल सकते हैं। इससे उनके वितरण योग्य नकदी प्रवाह में सुधार होगा। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि इस कदम के साथ जोखिम को लेकर  मजबूत नियामक सुरक्षा उपाय और मजबूत क्रेडिट अंडरराइटिंग और निगरानी प्रक्रियाएं भी होनी चाहिए।  अभी भारत में  पांच सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध रीट हैं –  ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट, एम्बैसी ऑफिस पार्क्स रीट, नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट, माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट और नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट हैं। इनके पास ऑफिस और रिटेल सेगमेंट में लगभग 27  अरब डॉलर की परिसंपत्तियां हैं और ये ऐतिहासिक रूप से पूंजी बाजार निर्गम और प्रायोजक-समर्थित धन के स्रोत पर निर्भर रहे हैं।

First Published - February 6, 2026 | 10:08 PM IST

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