निजी क्षेत्र के कुछ बड़े ऋणदाताओं द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण (पीएसएल) के मानकों का अनुपालन न करना व्यवस्था की खामी नहीं, बल्कि उन बैंकों तक ही सीमित है। रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने कहा कि यह चिंता की बात नहीं है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘यह व्यवस्था के स्तर पर नहीं है। ये ऐसे मुद्दे हैं जो बैंकों के स्तर पर सामने आते रहते हैं। इसमें चिंता जैसी बात नहीं है।’
निजी क्षेत्र के देश के सबसे बड़े और दूसरे सबसे बड़े बैंकों एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक को अपने कुछ कृषि कर्जों को पीएसएल ऋण के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत करने के कारण वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में अतिरिक्त मानक परिसंपत्ति प्रावधान करने पड़े थे। इसके बाद रिजर्व बैंक ने पीएसएल अनुपालन मानदंडों को कड़ा किया और ऋणों के दोहरे दावे को रोकने के लिए मध्यस्थों से बाहर के ऑडिटर से सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया।
एचडीएफसी बैंक ने तीसरी तिमाही में 500 करोड़ रुपये अलग रखे, जबकि आईसीआईसीआई बैंक को उसी अवधि के दौरान 1,283 करोड़ रुपये अलग रखने पड़े। देश के तीसरे सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता ऐक्सिस बैंक को भी रिजर्व बैंक की सख्ती के बाद वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-जून तिमाही में इसी तरह की कवायद करनी पड़ी।
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा, ‘कुछ बैंकों में पीएसएल के वर्गीकरण के संदर्भ में विचलन पाया गया। यह निश्चित रूप से ऐसा कुछ नहीं है जो पूरी व्यवस्था में हो। यह कोई व्यवस्था के स्तर का मुद्दा नहीं है।’
इसके अलावा रिजर्व बैंक ने कहा कि उसने कवरेज बढ़ाने, परिचालन सुव्यवस्थित करने और उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना की व्यापक समीक्षा की है। नतीजतन केंद्रीय बैंक ने अब कहा है कि वह कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर समेकित केसीसी योजना पर बैंकों को संशोधित निर्देश जारी करेगा।
रिजर्व बैंक ने कहा, ‘प्रस्तावित दिशानिर्देशों में अन्य बातों के अलावा फसल के सीजन का मानकीकरण, केसीसी की अवधि 6 साल तक बढ़ाना, प्रत्येक फसल सीजन के लिए फाइनैंस (एसओएफ) के पैमाने के साथ आहरण सीमा तय करना और तकनीकी हस्तक्षेपों के खर्च शामिल किया जाना शामिल है।’
स्वामीनाथन ने कहा, ‘केसीसी की समीक्षा करना सभी दिशानिर्देशों की समय समय पर समीक्षा करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। अब करीब 5 साल हो चुके हैं। इस तरह से यह हमारी आवधिक समीक्षा है। साथ ही हम कुछ निर्देशों में बदलाव भी कर रहे हैं, जैसा कि फसल सीजन के बारे में किया गया है। प्रति सीजन दिए गए समय की अवधि और कुल मिलाकर केसीसी की वैधता की अवधि भी इसमें शामिल है।’
उन्होंने यह भी कहा कि इस बदलाव का निजी क्षेत्र के कुछ कर्जदाताओं के पीएसएल अनुपालन की खामियों से कोई लेना देना नहीं है।