भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि बैंकों ने असुरक्षित ऋणों से हटकर सोने को गिरवी रखकर कर्ज देने की ओर रुख किया है। इसकी वजह से गोल्ड लोन में तेजी आई है। बहरहाल इस समय की बैंकिंग व्यवस्था में यह वृद्धि चिंता का कारण नहीं है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘हम सभी पोर्टफोलियो की समीक्षा कर रहे हैं। इसमें गोल्ड लोन, एमएसएमई ऋण, पर्सनल लोन सहित सभी श्रेणियां शामिल हैं। सभी श्रेणियों में संपत्ति की गुणवत्ता बेहतर नजर आ रही है और चूक कम है। ऐसे में चिंता का कोई विषय नहीं है। गोल्ड लोन के मामले में एलटीवी (लोन टु वैल्यू) अनुपात काफी कम है, हालांकि हमने 85 प्रतिशत तक की उच्चतम सीमा दे रखी है, जो ऋण की राशि पर निर्भर होता है। लेकिन बैंकों द्वारा एलटीवी अनुपात का पालन किया जा रहा है और बैंकों के साथ एनबीएफसी ने इसे बहुत निचले स्तर पर बनाए रखा है।’
रिजर्व बैंक के हाल के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में सोने के आभूषणों को गिरवीं रखकर दिया गया ऋण सालाना आधार पर 127.6 प्रतिशत बढ़कर 3.82 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि दिसंबर 2025 में 84.6 प्रतिशत सालाना वृद्धि के साथ यह 84.6 प्रतिशत था। यह मुख्य रूप से सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण हुआ है।
डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा कि गोल्ड लोन में वृद्धि को कुल दिए गए ऋण के अनुपात में देखे जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि गोल्ड लोन में वृद्धि अनपेक्षित नहीं है, क्योंकि असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण की वृद्धि दर इसके पहले के वर्षों में अधिक रही है और इसने प्रमुख भूमिका निभाई है। स्वामीनाथन ने कहा, ‘हमें गोल्ड लोन को कुल उधारी के अनुपात में देखने की जरूरत है। वृद्धि (गोल्ड लोन में) अनपेक्षित नहीं है, क्योंकि पहले के वर्षों में असुरक्षित पर्सनल लोन की कुल ऋण वृद्धि में अहम भूमिका होती थी। जब किसी खास सेग्मेंट जैसे एमएफआई या पर्सनल लोन में ज्यादा चूक होती है, जो असुरक्षित है, तो ऐसे में बैंक सुरक्षा की ओर बढ़ते हैं और उनके गिरवीं वाले ऋण में तेजी आती है। इसमें बदलाव है, लेकिन यह तेजी सोने की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण भी दिख रही है।’
3 फरवरी 2026 तक सालाना आधार पर सोने की कीमतों में करीब 80 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
पहले के वित्त वर्ष में असुरक्षित ऋण अधिक होने के कारण कर्जदाताओं पर दबाव था, जिसमें पर्सनल लोन और माइक्रो फाइनैंस सेक्टर शामिल थे। इसमें संपत्ति की गुणवत्ता को लेकर दबाव था और चूक अधिक थी। इसकी वजह से बैंकों को सुरक्षित उधारी और पर ज्यादा ध्यान देना पड़ा और उन्होंने असुरक्षित पोर्टफोलियो के ऋण को कम किया। बहरहाल सोने की कीमतों में आई तेजी ने भी वित्त वर्ष के दौरान गोल्ड लोन में वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है।
स्वामीनाथन ने कहा कि एलटीवी अनुपात और कुल ऋण में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी को देखें तो गोल्ड लोन में वृद्धि कोई चिंता वाली बात नहीं है।