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RBI गवर्नर को भरोसा: भारत की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत, बाहरी मोर्चे पर भी देश पूरी तरह सुरक्षित

RBI द्वारा अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित करते हुए द्विपक्षीय समझौतों और संतुलित उधारी कार्यक्रम के माध्यम से बाहरी चुनौतियों को प्रबंधित किया गया है

Last Updated- February 06, 2026 | 10:22 PM IST
sanjay malhotra
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा | फोटो: PTI

भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा, डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर, स्वामीनाथन जे., पूनम गुप्ता और एस सी मुर्मू ने नीति के बाद मीडिया से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। सदस्यों ने कहा कि बाहरी क्षेत्र सहित वृहद आर्थिक धारणा मजबूत है। सरकार के बड़े उधार कार्यक्रम को प्रबंधित करने के मुद्दों पर बातचीत की। सदस्यों ने विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय व बहुपक्षीय समझौतों पर भी बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश :

भारतीय रिज़र्व बैंक सरकार के बड़े उधार कार्यक्रम को कैसे संभालेगा?

संजय मल्होत्रा: हम सरकारी उधार कार्यक्रम में कुल संख्याओं पर ध्यान दे रहे हैं। मुझे स्पष्ट रूप से नहीं लगता कि यह देखने का सही तरीका है। इसे देखने का तरीका यह है : हम 17 लाख करोड़ रुपये की बात करते हैं, लेकिन इससे बेहद अधिक रिडम्पश्न हैं। नतीजतन, यह सकल कैलेंडर स्पष्ट रूप से अधिक होगा। अगर आप शुद्ध संख्याओं को देखें तो इस वर्ष के लिए सरकारी प्रतिभूतियों का उधार कार्यक्रम 11.53 लाख करोड़ रुपये है। यह  अगले साल 11.73 लाख करोड़ रुपये होना अनुमानित है। ऐसे में यह केवल 20,000 करोड़ रुपये अधिक है। 

यदि बजट का आकार लगभग 8-9 प्रतिशत बढ़ रहा है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है तो कम से कम उस स्तर  की उधार वृद्धि की उम्मीद की जानी चाहिए थी। वृद्धि बहुत कम है। दूसरा, ट्रेजरी बिलों के माध्यम से भी पैसा जुटाया जाएगा। इससे यील्ड कर्व को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी। हमें यह भी लगता है कि छोटी बचत के लिए बजटीय संख्या काफी पारंपरिक है। इसलिए मुझे लगता है कि सरकार जिस उधार कार्यक्रम पर विचार कर रही है, वह निचले स्तर पर है और उन्हें बहुत उचित कीमतों पर इन संसाधनों को जुटाने में सक्षम होना चाहिए।

टी रवि शंकर: इस समय बॉयबैक को ध्यान में नहीं रखा गया है। उन्हें संबंधित वर्ष के दौरान ध्यान में रखा जाता है। जिस हद तक बॉयबैक होगा, सकल उधार संख्या उसी के अनुसार कम हो जाएगी।

क्या बैंकों को एस डी एफ में धन जमा करने से रोकने पर कोई चर्चा है? क्या 80-81 प्रतिशत का सीडी  अनुपात हालिया समय में सामान्य है?

ऐसे समय में जब जमा वृद्धि से अधिक ऋण वृद्ध है तो यह काफी अपेक्षित है कि सीडी अनुपात बढ़ेगा। ऐसे समय में जब ऋण उतना नहीं बढ़ रहा है तो सीडी अनुपात कम हो जाएगा। हमने इसे बार-बार होते देखा है। ऐसे समय होते हैं जब सी डी अनुपात बढ़ते हैं। हालांकि ऐसे समय भी होते हैं जब वे घटते हैं। लिहाजा यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम बैंकों के व्यापार चक्र में कहां हैं। 

हालांकि मैं यह भी उल्लेख कर सकता हूं कि हमारे लिए सी डी अनुपात महत्त्वपूर्ण नहीं है। महत्त्वपूर्ण है नकदी। इसके लिए एलसीआर ढांचा है। इस क्रम में नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो (एनएसएफआर) है जो मध्यम अवधि की नकदी को देखता है। तत्काल या एक महीने की नकदी के लिए एलसीआर है।  ये दोनों बैंकों के साथ-साथ गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों के लिए भी बहुत सहज स्तर पर हैं।

नीति में आई एन आर या भुगतान संतुलन घाटे का कोई उल्लेख नहीं था। क्या इसका कारण व्यापार सौदों के कारण बाहरी क्षेत्रों पर काफी सहज होना है?

हमारी बाहरी क्षेत्र सहित वृहद आर्थिक धारणा बेहद मजबूत व बेहद जबरदस्त है। चाहे आप अर्थव्यवस्था की वृद्धि, महंगाई, बाहरी तरफ चालू खाता या यहां तक कि पूंजी खाते को देखें तो निकट अवधि व मध्यम अवधि का दृष्टिकोण बहुत स्वस्थ व बहुत अनुकूल है। आप जानते हैं कि सरकार ने हमारी बाहरी स्थिति को मजबूत करने के लिए कई उपाय किए हैं। 

कई द्विपक्षीय के साथ बहुपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस क्रम में  ईयू से समझौता पर हस्ताक्षर किया गया। इससे पहले ईएफटीए,  ओमान, ब्रिटेन से समझौते हुए थे। द्विपक्षीय व बहुपक्षीय समझौतों चालू खाते को बेहद आरामदायक स्तर पर रखने में मदद करेंगे।  

पहली छमाही में चालू खाता जीडीपी का महज 0.8 प्रतिशत था जबकि यह बीते साल 0.6 प्रतिशत था। आपने ऋण वृद्धि के मामले में व्यापक प्रणाली में करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि का उल्लेख किया है। कोई यह मान लेगा कि नए साल में प्रवेश करते ही दायरा बढ़ सकता है, लेकिन क्या उच्च सी डी अनुपात वृद्धि को सीमित करेगी?

स्वामीनाथन जे: ऋण वृद्धि सालाना आधार पर 14 प्रतिशत है। दिसंबर में कृषि क्षेत्र की वृद्धि करीब 12 प्रतिशत, उद्योग 13 प्रतिशत और व्यक्तिगत ऋण 14 प्रतिशत से मामूली रूप से  बढ़ा। वृद्धि व्यापक आधार वाला रही है। 

First Published - February 6, 2026 | 10:22 PM IST

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