पार्टियों के घोषणापत्रों मंे अधिकतर वायदे न केवल जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं से प्राप्त सुझाव हैं बल्कि ऐसे विचार भी हैं जिन्हें देश या दुनिया के अन्य हिस्सों में लागू किया जा रहा है।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने एक कॉमन स्मार्ट कार्ड देने का वायदा किया है जिसका इस्तेमाल मेट्रो और डीटीसी की बसों में किया जा सकेगा। यह व्यवस्था सिंगापुर जैसे शहरों मंे पहले से प्रचलित है।
शहरी योजना के संदर्भ में पार्टी ने पार्किंग का मास्टर प्लान बनाने और बहुस्तरीय भूमिगत पार्किंग की बात कही है जिस तरह का चलन मुंबई जैसे शहरों में है।
पार्टी ने पूर्वी दिल्ली के मतदाताओं को लुभाने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय का पूर्वी परिसर खोलने की योजना बनाई है।
पहली बार किस्मत आजमा रही आप ने भी अपने घोषणापत्रों मंे महिलाओं, युवाओं, रिक्शा चालकों और अल्पसंख्यकों समेत समाज के अलग अलग वर्गों को लुभाने का प्रयास किया है।
कांग्रेस के घोषणापत्र में इसके 15 साल के शासन की उपलब्धियां गिनाई गयी हैं। संप्रग के महत्वाकांक्षी खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को भी गिनाया गया है।
गौर करने की बात है कि सभी पार्टियों ने अपने घोषणापत्रों मंे अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्ग के मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की है।