बिजनेस स?टैंडर?ड - जब अनिश्चितता हो भारी तब सोने में निवेश है समझदारी
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जब अनिश्चितता हो भारी तब सोने में निवेश है समझदारी

सर्वजीत के सेन /  May 02, 2022

पिछले कुछ हफ्तों में बाजार जितनी उठापटक दिखा रहा है उतना ही उतार-चढ़ाव सोने में भी नजर आया है। जब रूस और यूक्रेन के बीच जंग छिड़ी थी उस समय मार्च में सोने की कीमत एकाएक कुलांचे भरने लगी थी मगर उसके बाद भाव में उतनी ही तेजी से गिरावट भी आई और 27 अप्रैल को सोने का भाव 51,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब रह गया, जो पिछले दो महीनों में सबसे कम भाव था। अब अक्षय तृतीया नजदीक आ गई है और सोने की खरीदारी के लिए यह बहुत अच्छा दिन माना जाता है तो जाहिर है कि कई निवेशक इस मौके पर अपने पोर्टफोलियो में इस कीमती धातु की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहेंगे। ऐसे में देखते हैं कि दुनिया भर में फैली अनिश्चितता के बीच इस समय सोने के साथ कैसी रणनीति अपनाई जानी चाहिए।

महंगाई से मिल रही हवा

सोने को इस समय सबसे ज्यादा चढ़ाने का काम महंगाई कर रही है और महंगाई पूरी दुनिया को परेशान कर रही है। लग यही रहा है कि यह दिक्कत अभी कुछ अरसा तक बरकरार रहेगी क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्घ के कारण आपूर्ति शृंखला कई जगह से टूट गई है और माल की किल्लत के कारण महंगाई बढ़ रही है। सोना महंगाई से बचाने के मामले में सबसे कारगर हथियार साबित होता रहा है। कॉमट्रेंड्ज रिसर्च के निदेशक ज्ञानशेखर त्यागराजन समझाते हैं, 'महंगाई के दौर में सोना अच्छा प्रदर्शन करता ही है। डॉलर कितना ही मजबूत क्यों न हो अगर महंगाई की वजह से समय-समय पर सोने के भाव चढ़ते ही रहेंगे।'

मगर अभी यह साफ नहीं है कि महंगाई का मौजूदा दौर सोने के भाव को कितना ऊपर तक ले जाएगा। देखना होगा कि सोना मार्च, 2022 की अपनी ऊंचाई लांघ पाता है या नहीं


भू-राजनीतिक तनाव

जिस समय वित्तीय बाजारों में ज्वार-भाटा चल रहा हो उस समय आपके पास सोना होना ही चाहिए। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग ने बाजारों की हालत बिगाड़ दी है और दुनिया भर के बाजार आएदिन ऊपर-नीचे होते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि यह सिलसिला कुछ समय तक जारी रहेगा।

सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और गोलब्रिज की संस्थापक रोशनी नायक कहती हैं, 'रूस-यूक्रेन युद्घ के बारे में अनिश्चितता है और इससे सोने के गिरते भावों को कुछ सहारा मिलने की पूरी संभावना है।'

जंग का सोने के भावों पर सकारात्मक असर तो पड़ा है और उसके खत्म होते ही भाव चढऩा बंद नहीं होंगे और कुछ समय बाद तक सोना मजबूत रह सकता है। क्वांटम एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी चिराग मेहता कहते हैं, 'लगातार जारी जंग और उसकी वजह से पैदा हुए मानवीय एवं आर्थिक संकट के कारण निवेशकों का हौसला टूट रहा है और यही वजह है कि सोने की मांग लगातार बनी हुई है। लड़ाई खत्म होने के बाद भी इसके भू-राजनीतिक असर सामने आते रहेंगे इसलिए कुछ समय तक जोखिम से बचाव के लिए सोने में निवेश बना रह सकता है, जिस वजह से सोना चढ़ा रहेगा। रूस के खिलाफ

लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध लड़ाई के बाद भी जारी रहेंगे, जिसकी वजह से ऊर्जा तथा खाद्य की वैश्विक आपूर्ति शृंखला में रुकावटें बनी रहेंगी। इससे महंगाई छाई रहेगी और सोना निवेशकों का दुलारा बना रहेगा।'


ब्याज दरों में बढ़ोतरी

भारत और अमेरिका में ब्याज दरें बढऩे लगी हैं या बढऩे वाली हैं, जिसका असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है और भाव नीचे आ सकते हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर काबू पाने के लिए इस साल कई बार दरों में बढ़ोतरी करने के संकेत दिए हैं। दूसरे केंद्रीय बैंक भी उसी की राह पर चल सकते हैं। मगर विशेषज्ञों को लगता है कि दरें बढऩा तय नहीं है। उनके हिसाब से अभी यकीन के साथ नहीं कहा जा सकता कि केंद्रीय बैंक दरों में बढ़ोतरी के अपने रुख पर आगे बढ़ेंगे।

क्वांटम एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी चिराग मेहता कहते हैं, 'किताबी बात करें तो दरें बढ़ाने के बारे में फेड का आक्रामक रुख सोने के लिए अच्छी खबर नहीं है। मगर फेड को इस समय अर्थव्यवस्था तथा वित्तीय बाजारों की झटके झेलने की क्षमता के कारण दरें बढ़ाने की बात करने की हिम्मत मिल रही है। उसके इस रुख की असली पैमाइश तब होगी, जब आर्थिक मंदी आएगी और शेयर बाजार ऊपर-नीचे होंगे और इसकी पूरी आशंका नजर आ रही है।' मेहता के हिसाब से फेड अगर अपने रुख में मामूली नरमी भी लाता है तो सोने को फायदा होगा। कॉमट्रेंड्ज रिसर्च के निदेशक ज्ञानशेखर त्यागराजन की राय भी मेहता से अलग नहीं है। वह रजामंदी जताते हुए कहते हैं, 'फेडरल रिजर्व ने तेजी से दरें बढ़ाने के संकेत तो दिए हैं मगर उसने आगाह करते हुए यह भी कहा है कि इस बारे में उसके कदम आगे आने वाले आंकड़ों पर निर्भर करेंगे। अगर दरों में इजाफे से आर्थिक वृद्घि को झटका लगता है तो फेड अपना रुख नरम कर सकता है।'


संपत्ति आवंटन का तरीका सही

आने वाले दिनों में सोने के भाव कभी ऊपर जाएंगे और कभी एक झटके में नीचे आएंगे। इसलिए कोई नहीं बता सकता कि सोना कौन सी चाल चलेगा। ऐसे में निवेशक क्या करें?

क्वांटम एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी चिराग मेहता टुकड़ों में निवेश की सलाह देते हैं। वह कहते हैं, 'एक-दूसरे से बिल्कुल उलट खबरों और घटनाक्रम के कारण सोना कुछ समय तक नीचे आ सकता है। जिन्होंने अपने पोर्टफोलियो में अभी पर्याप्त सोना शामिल नहीं किया है, उन्हें इस मौके का फायदा उठाना चाहिए और भाव गिरने पर सोना खरीद लेना चाहिए। इस तरह उन्हें अपने पोटफोलियो में 10-15 फीसदी हिस्सेदारी सोने की रखनी चाहिए। जिनके निवेश पोर्टफोलियो में पहले ही इतना सोना शामिल है उन्हें चुपचाप बैठना चाहिए और जरूरत से ज्यादा सोना नहीं खरीदना चाहिए।'

मेहता यह भी कहते हैं कि हरेक निवेशक को सोने में रकम जरूर लगानी चाहिए क्योंकि सोना निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाता है, तरलता का भी शानदार स्रोत होता है और खरीदारी की क्षमता बनाए रखता है।

गोलब्रिज की संस्थापक रोशनी नायक भी मानती हैं कि सोने में एक हद तक निवेश होना ही चाहिए। वह कहती हैं, 'अपने पोर्टफोलियो में सोना शामिल कीजिए और विविधता लाने के इरादे से कीजिए। अगर आर्थिक उठापटक होती है तो सोना उससे आपकी हिफाजत कर सकता है। डेट और इक्विटी से इसका नाता नहीं के बराबर होता है, इसलिए जिस समय ये दोनों संपत्ति वर्ग औंधे मुंह गिर जाते हैं तब सोना ही आपके पोर्टफोलियो को बचाता है।'

कम से कम आठ साल के लिए निवेश का इरादा रखने वाले निवेशकों को सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड के जरिये सोनेे में निवेश करना चाहिए। जिन निवेशकों ने सोने में इतने लंबे अरसे तक रकम लगाने की नहीं सोची है, उनके लिए गोल्ड एक्सचेंज पर ट्रेडिंग वाले फंड हैं और म्युचुअल फंड भी हैं, जिनके जरिये वे निवेश कर सकते हैं।

Keyword: अनिश्चितता, सोने में निवेश, अक्षय तृतीया, पोर्टफोलियो, महंगाई, रूस-यूक्रेन युद्घ,
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